Home » दिल्ली » Left to rot: Note ban ruins wholesale vegetable, flower trade in Delhi
 

50 दिन के बाद भी सब्ज़ी और फूल बाज़ार की हालत जस की तस

सुहास मुंशी | Updated on: 29 December 2016, 8:27 IST
(सुहास मुंशी/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • आज से ठीक 50 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी की घोषणा की थी. इसके बाद पूरे देश में एक असमंजस और अनिश्चय का वातावरण बन गया था. प्रधानमंत्री ने उस वक्त 50 दिन की मोहलत मांगी थी. तब कैच न्यूज़ के रिपोर्टरों ने हाट, बजारों, गांवों, लेबर चौराहों से लेकर लोगों के घरों का दौरा किया था. आज 50 दिन बाद उन स्थानों पर क्या परिवर्तन आया यह जानने के लिए बार फिर से हम उन्हीं स्थानोंं का दौरा कर रहे हैं.

राष्ट्रीय राजधानी की थोक सब्जी मंडियों में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. सब्जियों के थोक बाजार में जबर्दस्त गिरावट देखी गई है और यह गिरावट लगातार जारी है. थोक सब्जी बाजार में सब्जी लेने के लिए 100 रुपए और 500 रुपए के नोट लेकर आने वाले लोगों की भारी कमी है.

नोटबंदी की घोषणा हुए लगभग 50 दिन बीत जाने के बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ है. लोगों में नाउम्मीदी की भावना पनपने लगी है और सरकार तथा उसकी नीतियों के विरुद्ध लोगों में आक्रोश और नाराजगी है.  

सूत्रों के अनुसार सब्जी मंडियों के सभी थोक सब्जी व्यापारियों के बीच बहुत जल्द ही हड़ताल किए जाने को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है. लेकिन दूसरी ओर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि हड़ताल से कुछ हासिल होने वाला नहीं है. व्यापारी भी यह बात अच्छे से समझ रहे हैं कि अब काफी देर हो चुकी है और इसका कितना असर होगा. बड़े विपक्षी दलों को भी यह नहीं सूझ रहा है कि अब वे आगे क्या करें.

8 नवम्बर से ही जब से बड़े नोटबंदी की घोषणा हुई है, सब्जी आपूर्ति से जुड़े सभी लोग जैसे-किसान, ट्रांसपोर्टर्स, कमीशन एजेण्ट, बड़े व्यापारी, सब्जी उतारने और लादने वाले दिहाड़ी मजदूर, फुटकर व्यापारी आदि सभी प्रभावित हुए हैं. इन लोगों का ज्यादातर लेनदेन रोजमर्रा के आधार पर नगद में ही होता है और ये सब बुरी तरह त्रस्त हो चुके हैं.

ओखला सब्ज़ी मंडी

ओखला सब्जी मंडी के एक थोक व्यापारी इस्माइल बाबा कहते हैं कि लड़कों को उनकी मजदूरी या वेतन नहीं दिया जा सका है. हम इन लड़कों को समय पर वेतन देने की कोशिश कर रहे हैं, पर ये लोग निश्चित रूप से कष्ट का सामना कर रहे हैं. ट्रकों से सब्जी उतारने और छोटे वाहनों पर उसे लादने वाले दिहाड़ी मजदूर जिनके बैंक खाते नहीं है, उन्हें और भी ज्यादा कष्ट का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें शाम को खाने का सामान खरीदने के लिए नगदी की जरूरत तो होती ही है.

सब्जी मंडियों का व्यापार कितनी बुरी तरह प्रभावित हुआ है और 8 नवम्बर से पहले और बाद में सब्जियों के दाम कितने गिरे हैं. इसकी तुलना करते हुए इस्माइल बताते हैं कि 50 किलो आलू का एक कट्टा जो पहले 600 रुपए का था, अब 150 रुपए में बक रहा है. फूलगोभी जो पहले 40 रुपए किलो थी, अब 5 रुपए प्रति किलो बिक रही है. पत्ता गोभी का 70 किलो का एक बोरा जो पहले 700 रुपए का था, अब 100 रुपए में बिक रहा है. 

हर सब्जी का यही हाल है. सब्जी की कीमतों की तुलना कर आप खुद ही अंदाजा लगा लीजिए कि हम कितनी बुरी तरह पीड़ित हुए हैं और हर घंटे कितना आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं.

इस्माइल कहते हैं कि सब्जी मंडियों को कुछ दिनों के लिए बंद कर देने का विचार अब केन्द्र में है. गुरुवार या शुक्रवार को किसी समय बड़े व्यापारियों की बैठक की जाएगी जिसमें आगे क्या करना है, इस पर कोई फैसला लिया जाएगा.

ग़ाज़ीपुर फूल बाज़ार

नोटबंदी से फूलों का थोक बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. फूल व्यापारियों का कहना है कि शादी-विवाह के दिनों और साल के अंत में उनका व्यापार काफी बढ़ जाता था, जो पहले ही काफी गिर गया था और इस गिरावट में तेजी ही आई है.  

लेकिन गाजीपुर फूल बाजार के अध्यक्ष अशोक रंधावा कहते हैं कि हड़ताल से कुछ हासिल होने वाला नहीं है. वे कहते हैं कि विपक्ष के राजनीतिक दलों को देखिए, उन्होंने संसद के बाहर और भीतर काफी हल्ला मचाया. उन्होंने क्या हासिल कर लिया? हम अपना बाजार बंद करके क्या हासिल कर लेंगे? क्या सरकार अब नोटबंदी को वापस ले लेगी? निश्चित रूप से नहीं. यह तकलीफ सिर्फ हमारी नहीं, बल्कि उन सभी की है जो इससे पीड़ित हैं. फिर लोग क्यों हमारी सुनेंगे?

First published: 29 December 2016, 8:27 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी