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JNU: क्या VC ने मधु किश्वर की नियुक्ति नियमों के ख़िलाफ़ की?

प्रियता ब्रजबासी | Updated on: 11 May 2017, 10:46 IST
मधु किश्वर/ फ़ाइल फोटो

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी की अकादमिक काउंसिल के सदस्य के तौर पर मधु किश्वर की नियुक्ति को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समर्थक मानी जाने वाली मधु किश्वर को काउंसिल का सदस्य बनाने के वाइस चांसलर के निर्णय पर अकादमी के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं.

स्काॅलर और सामाजिक कार्यकर्ता मधु किश्वर को जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी की अकादमिक परिषद् में बाहरी सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है. उनका कार्यकाल दो साल का होगा. बहुत से प्रोफेसरों का कहना है कि वीसी को दी गई सूची में उनका नाम था ही नहीं. नियमानुसार, हर स्कूल को कम से कम चार नाम देने होते हैं, जिसमें से वाइस चांसलर किसी एक को चुनते हैं.

स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स की डीन बिश्नूप्रिया दत्त ने कैच न्यूज़ से कहा, "हमने कला जगत की छह प्रसिद्ध हस्तियों के नाम वीसी के पास भेजे थे. इस सूची में मधु किश्वर का नाम नहीं था, क्योंकि कला के अध्ययन से उनका कोई सरोकार नहीं है. हमें समझ नहीं आ रहा है कि हमारे प्रस्तावित नाम नकार कर किसी ऐसे व्यक्ति को कैसे चुन लिया गया, जिसका हमारे विषय से कोई नाता नहीं है. 17 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है."

 

'मैं वामपंथी गैंग की नहीं'

दूसरी ओर अपनी नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए जाने को मधु किश्वर ने हास्यास्पद बताया. कैच न्यूज़ से इस मुद्दे पर बातचीत में उन्होंने कहा, "मैंने पारंपरिक कला और कलाकृतियों पर कई डाॅक्यूमेंट्री फिल्में बनाई हैं. साथ ही कला व साहित्य पर काफी कुछ लिखा है. अगर उन्हें लगता है कि मै इस पद के योग्य नहीं हूं, तो हो सकता है कि बाल ठाकरे जैसे व्यक्तित्व या संघ से जुड़ा व्यक्ति इस पद के लिए उनकी पसंद हो."

उन्होंने कहा, "यहां समस्या प्रभुत्व की है. मेरी नियुक्ति पर इतना हो-हल्ला इसलिए हो रहा है, क्योंकि मैं किसी 'वामपंथी गैंग' का हिस्सा नहीं हूं, जैसा कि जेएनयू के ज्यादातर शिक्षक हैं." उन्होंने कैच न्यूज़ को बताया कि उन्हें इस पद के लिए अपने नामांकन के बारे में बिल्कुल पता नहीं था और उन्होंने इसके लिए आवेदन भी नहीं किया था.

 

'असल ज़िम्मेदार वीसी'

जेएनयूटीए (जवाहर लाल यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) की अध्यक्ष आयशा किदवई ने कैच न्यूज से कहा, "मधु किश्वर को इस मामले को निजी तौर पर नहीं लेना चाहिए. असल ज़िम्मेदार तो वीसी हैं जो सिर्फ अपने मन मुताबिक कार्य कर रहे हैं. वीसी ने इस मामले में साफ़ तौर पर कानून का उल्लंघन किया है, जिसके अनुसार कहा गया है कि स्कूल या केंद्र द्वारा नामांकित व्यक्ति ही इस पद पर नियुक्त किया जा सकता है. इसके अलावा नामांकित व्यक्ति विषय विशेषज्ञ होना चाहिए. इस मामले में वीसी ने स्कूल की सलाह लिए बिना ही निर्णय कर लिया. यहां बात मधु किश्वर या उनकी राजनीतिक अवधारणा की नहीं है."

मधु किश्वर मानुषी पत्रिका की संस्थापक संपादक हैं. वे मिरांडा हाउस और जेएनयू से स्नातक हैं. उन्होंने लिंग भेद और राजनीतिक मुद्दों पर शोध किया है और काफी कुछ लिखा है. 2014 में उन्होंने एक किताब प्रकाशित की जिसका शीर्षक था- 'मोदी, मुस्लिम्स एंड मीडियाः वाॅइसेज फ्राॅम नरेंद्र मोदीज गुजरात'.

मधु किश्वर इस मंगलवार को आयोजित अकादमिक परिषद की बैठक में शामिल हुईं, जिसके विरोध में छात्रों ने बाहर प्रदर्शन किया. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित पांडे भी इस बैठक में शामिल थे. उन्होंने कहा, "वीसी ने बैठक स्थगित करने की घोषणा की और बिना कोई कारण बताए वहां से उठ कर चल दिए. उन्होंने वहां मौजूद सदस्यों से कुछ नहीं पूछा. इसका मतलब है कि जेएनयू की वर्तमान भर्ती नीति अवैध है, क्योंकि जेएनयू की किसी भी संस्था ने इसका विरोध नहीं किया है."

मधु किश्वर के इस बैठक में शामिल होने के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी हुई. इसके विरोध में उन्होंने ट्वीट किया, "मेरे जेएनयू की एकैडमिक काउंसिल (एसी) का सदस्य बनने का विरोध तो ऐसे हो रहा है, जैसे कोई मैं भारत की राष्ट्रपति पद के लिए नामांकित कर दी गई हूं! यह तो कोई सत्ता या अधिकार वाला पद भी नहीं है."

First published: 11 May 2017, 10:45 IST
 
प्रियता ब्रजबासी @PriyataB

Priyata thinks in words and delivers in pictures. The marriage of the two, she believes, is of utmost importance. Priyata joined the Catch team after working at Barcroft Media as a picture desk editor. Prior to that she was on the Output Desk of NDTV 24X7. At work Priyata is all about the news. Outside of it, she can't stay far enough. She immerses herself in stories through films, books and television shows. Oh, and she can eat. Like really.

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