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खुलासाः दिल्ली-एनसीआर के आधे से ज्यादा ड्राइवर्स टल्ली होकर चलाते हैं कैब

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 March 2018, 19:40 IST

यूं तो पार्टी में जाने वालों को सलाह दी जाती है कि वे 'शराब पीकर वाहन न चलाएं (डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव)' और सुरक्षित घर पहुंचने के लिए कैब या टैक्सी का इस्तेमाल करें. लेकिन दिल्ली-एनसीआर के मामले में कैब-टैक्सी से जाना भी सुरक्षित नहीं है.

यह चौंकाने वाला खुलासा एक ताजा सर्वेक्षण में सामने आया है. कम्यूनिटी अगेंस्ट ड्रंकेन ड्राइव (CADD) एनजीओ द्वारा 10,000 कैब ड्राइवर्स के बीच यह अध्ययन किया गया. यह संस्था पिछले 15 वर्षों से दिल्ली पुलिस के साथ शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर लगाम लगाने के लिए काम कर रही है.

सर्वेक्षण में पता चला कि 55.60 फीसदी कैब ड्राइवर्स नियमित रूप से शराब पीकर वाहन चलाते हैं. इनमें से 27 फीसदी ने यह भी स्वीकार किया कि जब वे काफी ज्यादा नशे में थे, तब भी उन्होंने बुकिंग स्वीकार की.

इस सर्वेक्षण ने कैब में अकेले घूमने वाली महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. कैब चालकों ने यह माना कि वे सामान्यता वेटिंग पीरियड (सवारियों के इंतजार के वक्त) शराब सेवन करते हैं, लेकिन अगर बुकिंग मिल जाती है तो वे उसे भी अस्वीकार नहीं करते.

एनजीओ द्वारा यह सर्वेक्षण दोपहर दो बजे से लेकर रात 1 बजे के बीच किया गया. सर्वेक्षण में शामिल 62.10 फीसदी कैब चालकों ने यह भी माना कि वे अपने वाहन में शराब पीते हैं.

कैब चालकों के बीच शराब सेवन की प्रमुख वजह यह है कि उनमें से ज्यादातर नियमित रूप से शराब पीते हैं यानी लती है. ज्यादातर चालकों ने कहा कि 12-15 घंटों जैसे लंबे वक्त तक काम करने के चलते उन्हें खुद के लिए बहुत कम खाली वक्त मिल पाता है, इसलिए वे काम के दौरान ही शराब पी लेते हैं.

चालकों ने कहा कि क्योंकि वे 10-15 घंटे अपनी कार में ही बिताते हैं इसलिए वाहन के भीतर ही शराब का सेवन आसान रहता है. कई बार काफी देर तक इंतजार करने के चलते भी पीना आसान हो जाता है. कुछ ने यह भी कहा कि वाहन के भीतरर ही शराब पीना सस्ता और सुरक्षित भी रहता है.

वहीं, इस सर्वेक्षण की एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि 90 फीसदी कैब ड्राइवर्स को नियोक्ताओं (नौकरी पर रखने वालों) द्वारा शराब पीकर वाहन चलाने के संबंध में कभी जांचा भी नहीं गया.

यहां गौर करने वाली बात यह है कि शराब पीकर वाहन चलाने वाले ड्राइवर्स किसी आत्मघाती हमलावर से कम नहीं होते. सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और CADD के संस्थापक प्रिंस सिंहल ने कहा, "यह अध्ययन दिल्ली के 50 प्रमुख स्थानों पर किया गया, जिसमें हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, मॉल्स, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, ऑफिस कॉम्प्लेक्स और विश्वविद्यालय जैसे स्थान शामिल हैं. इन 10,000 चालकों में से 893 चालक काली-पीली टैक्सी चलाते थे जबकि 9,107 ड्राइवर्स रेडियो और ऐप-आधारित कैब्स के ड्राइवर हैं."

सिंहल ने आगे कहा, "इस सर्वेक्षण की एक प्रमुख बात यह है कि दिल्ली, गुरग्राम और नोएडा क्षेत्र में कैब चालकों पर पुलिस की सख्ती तकरीबन शून्य है और अगर कभी कैब चालकों को सजा भी मिली तो इसकी वजह रफ्तार, लाल-बत्ती फांदना या फिर गलत ढंग से वाहन चलाना था, शायद ही कभी शराब पीकर सेवन हो."

सर्वेक्षण के लिए चुने गए कुछ प्रमुख स्थानों में इंदिरा गांधी एयरपोर्ट, नई दिल्ली-पुरानी दिल्ली-निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, कनॉट प्लेस, नेहरू प्लेस, ग्रेटर कैलाश एक और दो, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, डीएलएफ साइबर हब, डीएलएफ सिटी सेंटर, एंबिएंस मॉल, सेक्टर 18 मार्केट नोएडा, मॉल ऑफ इंडिया, ग्रेट इंडिया प्लेस और लॉजिक्स सिटी सेंटर जैसे कई प्रमुख मॉल्स शामिल हैं.

First published: 10 March 2018, 19:40 IST
 
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