Home » दिल्ली » Note ban: how Chandni Chowk's jewellery & bullion trade is suffering
 

चांदनी चौक के सर्राफ़ा बाज़ार से 50 दिन बाद भी नहीं हटा नोटबंदी का ग्रहण

सादिक़ नक़वी | Updated on: 29 December 2016, 8:28 IST
(सुप्रीत जे बार्गी )
QUICK PILL
  • आज से ठीक 50 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी की घोषणा की थी. इसके बाद पूरे देश में एक असमंजस और अनिश्चय का वातावरण बन गया था. प्रधानमंत्री ने उस वक्त 50 दिन की मोहलत मांगी थी. तब कैच न्यूज़ के रिपोर्टरों ने हाट, बजारों, गांवों, लेबर चौराहों से लेकर लोगों के घरों का दौरा किया था. आज 50 दिन बाद उन स्थानों पर क्या परिवर्तन आया यह जानने के लिए बार फिर से हम उन्हीं स्थानोंं का दौरा कर रहे हैं.

चांदनी चौक के दरीबा कलां में दिल्ली का सबसे बड़ा सर्राफा बाजार है. ज्यादातर दुकानें सूनी पड़ी हैं. शादियों के सालाना मौसम के बावजूद गहने नहीं बिक रहे हैं, जबकि इस समय कारोबार में आमतौर पर तेजी रहती है. 

यहां इलाक़े के ज्यादातर जौहरी खाली वक्त में अखबार पढ़ रहे हैं या गपशप कर रहे हैं. संकड़ी गली से रिक्शा आराम से निकल रहे हैं. चार दीवारी के भीतर की इस गली में गहने खरीदने वालों की भीड़ के कारण आमतौर पर ऐसा कम ही देखने में आता है. बाजार के कोने पर की जलेबी वाले की मशहूर मिठाई की दुकान पर आज बहुत कम ग्राहक हैं, जबकि यहां भी लंबी कतार रहती है. 

नोटबंदी को लेकर नाराज सभी जौहरी एक ही बात दोहरा रहे हैं, ‘नोटबंदी ने हमारे कारोबार की कमर तोड़ दी है.’ जबकि ये सत्तासीन भाजपा का महत्वपूर्ण वोट बैंक हैं. एक जौहरी ने कहा, ‘मोदी के समर्थन में जिन्होंने मुहिम के दौरान चाय की थड़ियां लगाई थीं, उनमें से ज्यादातर पूछ रहे हैं कि अच्छे दिन के वादे का क्या हुआ.’

जौहरियों पर प्रवर्तन निदेशालय ने उस समय छापे मारे जब उन्हें सोना दुगुने दामों में बेचने की रिपोर्ट मिली थी. अपने पुराने नोटों से मुक्ति पाने के लिए लोगों ने उस समय बेतहाशा सोना खरीदा था. एक जौहरी ने अफसोस के साथ कहा,  ‘गलती कुछ लोगों ने की और संदेह पूरे समुदाय पर किया जा रहा है.’

दुकानें खुलीं लेकिन कारोबार मंदा

जिस दिन नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषण की थी, उसके एक दिन बाद, 9 नवंबर से दरीबा में बहुत कम कारोबार हुआ है. तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि 50 दिन में स्थितियां सामान्य हो जाएंगी. 40 दिनों में जो एकमात्र परिवर्तन हुआ, वह यह कि अब ज्यादातर दुकानें खुली हैं. पिछली बार जब यह रिपोर्टर यहां आया था, दुकानें छापे के डर से बंद थीं.

‘आप देख सकते हैं, अब भी बिजनेस नहीं है,’ अखिल कुमार ने अपनी सहित ज्यादातर खाली पड़ी दुकानों की ओर इशारा करते हुए कहा. उनसे यह रिपोर्टर 18 नवंबर को मिला था. 

अखिल चांदी के पारंपरिक गहनों की दुकान में काम करते हैं, जबकि अन्य सोना, हीरा और कीमती रत्नों का कारोबार करते हैं. 

अशोक कुमार ने कहा,  ‘मैंने आज साढ़े बारह बजे दुकान खोली थी.’ ये उस दुकान के मालिक हैं, जहां अखिल काम करते हैं. वे कहते हैं, मुझे कैश निकालने के लिए सुबह बैंक जाना पड़ा. सिर्फ 10 हजार रुपए मिले, जबकि प्रति सप्ताह 24 हजार रुपए निकाल सकते हैं.  ‘मैंने बेटे को पैसे लेने भेजा था, पर वह दोनों बार खाली हाथ आ गया. बिना कैश के भला कोई बिजनेस कैसे करे?’

कुमार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि 50 दिन के वादे के बाद भी पैसा निकालने की सीमा शायद बनी रहेगी. वे कहते हैं, ‘हमारा ज्यादातर कारोबार नकद या उधार होता है.’ कुमार ने क्रेडिट-डेबिट कार्ड से भुगतान के लिए पोइंट ऑफ सेल मशीन (पीओएस) मंगवाई है, पर अभी तक नहीं आई.  ‘ग्राहकों को वापस भेजने के सिवा कोई चारा नहीं है.’

कुमार पूछते हैं, ‘सरकार बराबर कह रही है कि काफी करेंसी नोट छप रहे हैं. फिर वे कहां जा रहे हैं. यह तभी होता है, जब आप बिना योजना के कुछ करते हैं.’ यह देखते हुए कि सरकार अपने ही नियमों पर आगा-पीछा कर रही है, वे कहते हैं, ‘अब हम सुन रहे हैं कि वह 31 मार्च की समय सीमा से पहले ही पुराने नोट रखना गैर कानूनी घोषित कर रही है.’ 

एक जौहरी इस बात को लेकर हैरान है कि नोटबंदी के ‘सख्त फैसले’ पर विशेषज्ञों के साथ कोई आर्थिक विमर्श नहीं हुआ. जौहरी कहते हैं,  ‘इस फैसले से सरकार ने काला धन कम करने की बजाय उसे पैदा करने के नए रास्ते खोल दिए हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि  ‘डंडे के जोर से’ गलत कमाई पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता. 

अशोक कुमार बताते हैं कि जौहरी अब भी सरकार को लेकर चौकन्ने हैं क्योंकि प्रवर्तन अभिकरण के छापे अब भी जारी हैं. वे कहते हैं,  ‘कूचा महाजनी के सर्राफा कारोबारियों पर कई छापे पड़ चुके हैं. और दरीबा के जौहरियों पर भी.’

चमक फीकी पड़ी

दरीबा से कुछ सौ मीटर की दूरी पर कूच महाजनी, जहां एशिया के सर्राफा कारोबार के मुख्य व्यवसायी हैं, डरावनी चुप्पी बनी हुई है. पिछली बार जब यह रिपोर्टर नवंबर में यहां आया था, तब भी जौहरी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पड़े छापों पर चर्चा कर रहे थे और आज भी कर रहे हैं. यह बाजार हवाला वालों से बदनाम है, जो पहले भी एजेंसी की चर्चा का मुख्य केंद्र थे. सर्राफा व्यवसायी और जौहरी पवन अग्रवाल कहते हैं, ‘चार दिन लगातार छापा पडऩे से बंद हुई दुकानें कल खुली हैं.’

एक अन्य जौहरी ने कहा, ‘अब भी चिंता और भय बना हुआ है, इस आशंका से कि गहने रखने की मात्रा में और कटौती नहीं हो जाए. सरकार ने पहले ही इसमें कटौती कर दी है कि जौहरी कितना गहना रख सकता है. आयकर विभाग की बजाय जिस तरह से प्रवर्तन अभिकरण उनका पीछा कर रहा है, उससे उनमें डर बैठ गया है.’ हालांकि छापे अब भी पड़ रहे हैं, पर उनमें कमी आई है. अब वे बड़े खिलाडिय़ों पर निशाना साध रहे हैं, खासकर इस कारोबार के.

दरीबा कलान में रतन चंद जानकी नाथ ज्वैलर्स की दुकान पर शोकेस में गहने फिर से सज गए हैं. जबकि नवंबर के मध्य में दुकान खाली पड़ी थी और अन्य दुकानों की तरह आधा शटर बंद था. मालिक लोग चिंतित हैं कि वे अपने कर्मचारियों को कैसे भुगतान करेंगे. वे कहते हैं, ‘यदि यही हाल रहा, तो हम उन्हें भेज सकते हैं.’

एक जौहरी का दावा था कि ‘शहर में किसी भी जौहरी या सर्राफा व्यवसायी के विरुद्ध अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है’ हालांकि 8 नवंबर के बाद कइयों पर छापे डाले गए और पूछताछ की गई. 

इस सर्राफा बाजार में स्वादिष्ट जलेबी वाले की एक मात्र मिठाई की दुकान जलेबी वाला को भी उनके साथ त्रासदी भोगनी पड़ रही है. जलेबी वाला के युवा मालिक अभिषेक ने कैच को बताया, ‘बिजनेस 30 प्रतिशत कम हो गया है. नवंबर में जब आप पिछली बार आए थे, लगभग वैसी ही स्थिति बनी हुई है.’ इस दुकान पर कभी ग्राहकों की लंबी कतार रहती थी, मंगलवार को बहुत कम लोग थे.

अभिषेक ने कहा, ‘मैंने पेटीएम के माध्यम से पैसा लेना बंद कर दिया है, क्योंकि हमने सीमा क्रॉस कर ली है. डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने के लिए मैंने पीओएस मंगवाई है, पर अभी तक नहीं आई. मैंने पीओएस के लिए आवेदन 9 नवंबर को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में किया था. वे बेवकूफी भरे बहाने बना रहे हैं.’

पीओएस मशीन वह है, जिससे कैशलेस का सपना पूरा होने में मदद मिलेगी. तब से बिक रही है, जब से मोदी सरकार ने नोटबंदी का ‘सदमा’ दिया है. शुरू में दावा था कि इससे काले धन पर अंकुश लगेगा, आतंक के वित्त पोषण में कमी होगी, नकली उत्पादों के कारोबार का अंत होगा. हालांकि यह सब अब भी जारी है. नाम नहीं छापने की शर्त पर सत्तासीन भाजपा के एक वरिष्ठ सदस्य ने कैच को बताया, ‘इन सभी मुद्दों पर यह विफल हो गई है और भविष्य में भी बुरी तरह विफल रहेगी.

अशोक कुमार ने पिछले चुनावों में भाजपा को वोट दिया था, ‘इस बार मैं ही नहीं, बल्कि मेरे परिवार के अन्य लोग भी उन्हें वोट नहीं देंगे. हम मोदी को सत्ता में नहीं लाए इसलिए वे हमारे कारोबार को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं.’

एक अन्य जौहरी का मानना है कि मोदी नोटबंदी को लेकर बहुत ज्यादा जुनूनी हैं और अन्य मुद्दों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, ‘उन्हें इससे आगे बढऩे की आवश्यकता है. वे भविष्य के लिए सब चीजें सही करें क्योंकि काफी नुकसान हो चुका है.’ वे आगे कहते हैं कि हालांकि कई कारोबारियों का इस सरकार से मोहभंग हुआ है, पर हो सकता है वे अगले चुनाव में ‘किसी को’ वोट नहीं दें.

जौहरियों के स्थानीय संघ के प्रमुख तरुण गुप्ता के पास नोटबंदी से हुई पीड़ा को कम करने के कुछ सुझाव हैं. वे कहते हैं,  ‘प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों को काफी कम किया जाए. साथ ही सरकार श्रम सुधार पर जोर दे. ’

First published: 29 December 2016, 8:28 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी