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दिल्ली: प्राइवेट स्कूल नहीं बढ़ा सकते मनमानी फ़ीस, सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:36 IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि डीडीए की ज़मीन पर चल रहे निजी स्कूल, सरकार की मंज़ूरी के बिना फीस नहीं बढ़ा सकते. निजी स्कूलों की मनमानी पर यही फ़ैसला हाई कोर्ट ने भी दिया था जिसके बाद स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था मगर स्कूल प्रबंधकों को यहां भी राहत नहीं मिली है. 

स्कूलों ने HC के फैसले को गैरकानूनी बताते दिल्ली स्कूल एजुकेशन ऐक्ट ऐंड रुल्स 1973 (डीएसईएआर) की दलील दी थी. यह नियम कहता है कि स्कूलों को अपनी मर्ज़ी से फीस बढ़ाने का अधिकार है लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया है. राजधानी में 400 से अधिक स्कूल डीडीए की जमीन पर चल रहे हैं.

प्राइवेट स्कूलों की ऐक्शन कमिटी के मुखिया एस. के. भट्टाचार्य ने कहा कि डीएसईएआर 1973 के आर्टिकल 17 सी के मुताबिक, स्कूलों को अपनी फीस तय करने का अधिकार है. यह एक पार्लियामेंट ऐक्ट है जिसमें बिना बदलाव किए शिक्षा निदेशालय कोई ऑर्डर नहीं दे सकता है. 

भट्टाचार्य ने कहा कि डीडीए लैंड पर चल रहे स्कूल पहले से ही 25 फीसदी सीटें ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत मुफ़्त में दे रहे हैं. लिहाज़ा, बाकी सीटों पर एडमिशन के लिए फीस तय करने का अधिकार उनके पास होना चाहिए. बावजूद इसके, कमिटी की दलीलों ने अदालतों ने मानने से इनकार कर दिया है. 

First published: 23 January 2017, 3:03 IST
 
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