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रात में अमीर और ग़रीब के मुहल्लों में एटीएम के बाहर क्या हाल है?

वरीशा सलीम | Updated on: 15 November 2016, 15:37 IST
(विकास कुमार/कैच न्यूज़)

'500 और 1,000 के नोट बंद होने से देश का गरीब चैन की नींद सो रहा है जबकि अमीर नींद की गोलियां खोजने के लिए बाज़ार में चक्कर काट रहा है'. यह दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के ज़िला गाज़ीपुर की एक चुनावी सभा में किया है. इस दावे की पड़ताल के लिए मैं रात 9 बजे से 12 बजे तक साउथ दिल्ली के कई इलाक़ों में घूमा. यह जानने के लिए कि कौन सो रहा है और कौन जाग रहा है? मगर यहां नज़ारा उल्टा दिखा. दूर-दूर तक अमीर लापता मिले और ग़रीब लंबी क़तारों में. 

नेहरू प्लेस, 9 PM

मैंने अपनी पड़ताल साउथ दिल्ली के नेहरू प्लेस मार्केट से शुरू की, रात 9 बजे. यह एशिया के सबसे बड़े और बदनाम इलेक्ट्रॉनिक बाज़ारों में से एक है. यहां अलग-अलग बैंकों के तक़रीबन 20 से ज़्यादा एटीएम लगे हुए हुए हैं लेकिन सिवाय एसबीआई की मशीन के, सभी बंद मिले. ज़्यादातर मशीनों में कैश नहीं था और एसबीआई एटीएम के बाहर कम से कम 20 लोग क़तार में थे. आधे घंटे बाद जब मैं नेहरू प्लेस से ग्रेटर कैलाश-2 की तरफ़ बढ़ रहा था, तब लाइन 20 की बजाय 40 की हो गई थी. लोग अपने जानने वालों को फ़ोन पर बता रहे थे कि एसबीआई एटीएम से रुपए निकल रहे हैं, जल्दी से आ जाओ. 

ग्रेटर कैलाश-2, 10 PM

ग्रेटर कैलाश-2 का एम ब्लॉक मार्केट अमीरों में एक ख़ास वर्ग का अड्डा है. यहां कम से कम पांच एटीएम नज़र आए लेकिन लोग नहीं थे. अगर कोई मिलता तो मैं उससे पूछता कि वह कितना परेशान है और यह भी कि क्या वह नींद की गोलियां ढूंढ रहा है? 

थोड़ा भटकने के बाद मैं इसी मार्केट में एटीएम की सुरक्षा के लिए तैनात गार्ड सतीश के पास जाकर बैठ गया. सतीश कहते हैं, 'जब गाड़ी कैश लेकर आती है तो नज़ारा देखने वाला होता है. सभी शोर मचाने लगते हैं. पान वाले अपनी दुकान छोड़कर लाइन में लगते हैं तो चाय वाला भी सबसे पहले रुपए निकाल लेना चाहता है'. सतीश ने बताया कि गुरु पर्व होने के नाते आज रात कैश आने की संभावना भी नहीं है और लोगों पर दबाव बढ़ता जा रहा है'.

कटवारिया सराय, 11 PM

इसके बाद मैं साउथ दिल्ली के ही एक गांव कटवारिया सराय पहुंचा. यहां एक मशीन से कैश निकल रहा था जहां स्टूडेंट्स, दुकानदार, नौकरीपेशा समेत हर कोई कतारबद्ध दिखा. यह तकरीबन आधी रात का नज़ारा है और जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, लाइन लंबी होती जा रही है. इसी लाइन में पीछे खड़े लोगों को डर सता रहा है कि कहीं उनका नंबर आने तक कैश ख़त्म नहीं हो जाए. 

इसी तरह मैं सावित्री नगर, मालवीय नगर, हौज खाज़ और मुनिरका की गलियों में भी गया. हर जगह एटीएम बिना कैश के मिले. कुछ आउट ऑफ सर्विस भी थे. 

मेरे लिए ढाई घंटे का यह अभ्यास निहायत दिलचस्प रहा इस मायने में भी कि मंच से कुछ भी बोल देने और ज़मीनी हक़ीक़त में कितना फ़र्क़ होता है. 12 बजे इस सच्चाई को समझ लेने के बाद चुपचाप मैं अपने घर की तरफ़ बढ़ चला. 

First published: 15 November 2016, 15:37 IST
 
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