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स्वराज इंडिया का आरोप, दिल्ली सरकार ने किया ऑटो घोटाला

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:39 IST
(स्वराज इंडिया )
QUICK PILL
  • स्वराज इंडिया का आरोप है कि फाइनेंस माफ़िया और सरकार की सांठगांठ से 1 लाख 85 हज़ार का ऑटो 4 लाख 50 हज़ार में ग़रीब ऑटो ड्राईवर को बेचा जा रहा है.
  • स्वराज इंडिया ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि इस कथित ऑटो घोटाले के कारण ऑटो चालकों की रोज़ाना कमाई पर बड़ा असर पड़ा है. नया ऑटो खरीदने के बाद भी फाइनेंसर्स के आगे ऑटो ड्राइवर्स की हालत बंधुआ जैसी है.

आम आदमी पार्टी से अलग होकर स्वराज इंडिया का गठन करने वाले योगेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार पर ऑटो घोटाले का आरोप लगाया है. एक प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिए स्वराज इंडिया ने कहा है कि जब एक बेरोज़गार दिल्ली में ऑटो खरीदने जाता है, तो उसे 1,85,000 रूपये का नया ऑटो 4,50,000 से 4,70,000 तक में मिलता है. संगठन का आरोप है कि असल कीमत से दुगने से भी ज़्यादा पैसे में ऑटो मिलने की वजह दिल्ली सरकार और फाइनेंस माफ़िया के बीच मोटी कमाई के लिए हुई सांठगांठ है. 

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने कहा, 'फाइनेंस माफ़िया और दिल्ली सरकार के गठजोड़ से सबसे पहले किसी पुराने ऑटो को किसी और के लाइसेंस बैज के नाम किया जाता है. फिर उस पुराने ऑटो को स्क्रैप कराके स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट ली जाती है. ट्रांसपोर्ट विभाग इसके बाद नो ड्यू सर्टिफिकेट देती है. इसके बदले नया ऑटो ख़रीदने के लिए दिल्ली सरकार के ट्रांसपोर्ट ऑथॉरिटी की मिलीभगत से एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी करवा दिया जाता है, और कानून के आंखों में धूल झोंकते हुए, सभी नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धता बताते हुए ग़रीब ऑटो चालक को नया ऑटो फाइनेंस करवा दिया जाता है.' 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हर कदम पर दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ होती है, या उनके दस्तख़त होते हैं. दिल्ली में लगभग सभी ऑटो फाइनेंस पर ही बिकते हैं. इस पूरे गोरखधंधे में फाइनेंसर की मुख्य भूमिका होती है जो सरकारी अधिकारियों, नेता, मंत्री से सांठगांठ करके ऑटो ड्राईवर का शोषण करता है.' 

सुप्रीम कोर्ट अपने एक फ़ैसले में साफ़ हिदायत दे चुका कि किसी भी रूप में परमिट की ख़रीद-फ़रोख़्त पाये जाने पर परमिट रद्द कर दिया जाएगा और साथ ही ऐसा करने वाले पर कानूनी कार्यवाई की जायेगी. स्वराज इंडिया का दावा है कि इसके बावजूद दिल्ली सरकार और फाइनेंस माफ़िया की मिली भगत से परमिट की ट्रेडिंग की जा रही है. 

अनुपम ने सीधे दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'आम आदमी पार्टी ने सत्ता का सफ़र ऑटो चालकों के कंधे पर बैठकर पूरा किया. पार्टी को 67 सीटें दिलाने में इन मेहनतकश और जुनूनी ऑटो चालकों का सबसे बड़ा योगदान था.' 

स्वराज इंडिया से जुड़े पुरुषोत्तम ने कहा, 'दिल्ली में हर एक ऑटो की ख़रीद में 2,65,000 से 2,85,000 रूपये के कालेधन का लेनदेन हो रहा है. आज जब देशभर में पार्टियां काले धन पर बड़े-बड़े दावे और बहस कर रही हैं तो दिल्ली सरकार में बैठे लोग ऑटो परमिट के नाम पर काला धन बना रहे हैं.'

स्वराज इंडिया के आरोप

1- 8258 ऑटो चालकों को सफ़ल घोषित करने के बाद दिल्ली सरकार ने नहीं दिया ऑटो. 324 चालकों के तो ऑटो डिलीवरी होने के बाद रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया.

2- नया ऑटो साल भर से खड़ा खड़ा सड़ रहा लेकिन ग़रीब ड्राईवर बिना रजिस्ट्रेशन के इन गाड़ियों की किश्त भरने को मजबूर. साथ ही पेट पालने के लिए किसी और का ऑटो किराए पर चलाने को मजबूर.

स्वराज इंडिया ने कहा है कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने 17 नवम्बर को इस मसले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर ऑटोवालों के साथ इंसाफ़ करने की मांग की थी मगर मुख्यमंत्री की तरफ़ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. अगर आगे भी दिल्ली सरकार हमारी मांगो पर कार्यवाई नहीं करती तो ऑटो चालक मजबूरन 5 दिसंबर को विरोध प्रदर्शन करेंगे.

स्वराज इंडिया की मांग

1- दिल्ली सरकार के ऑटो घोटाले की सीबीआई जांच हो और दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाई की जाए.

2- 324 ऑटो चालकों की गाड़ियों का तुरंत रजिस्ट्रेशन किया जाए. लाइसेंस बैज वाले सफ़ल ड्राइवरों को ऑटो दिया जाए.

3- इस घोटाले पर तुरंत रोक लगे ताकि ऑटो भाड़ा मीटर रेट कम हो और ऑटो चालक का मुनाफ़ा भी बढे.

First published: 30 November 2016, 7:52 IST
 
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