Home » दिल्ली » The disgrace of Arvind Kejriwal asking the public to pay for his legal battles
 

केजरीवाल के लिए कलंक है अपनी कानूनी लड़ाई के लिए जनता से फ़ीस के लिए कहना

चारू कार्तिकेय | Updated on: 7 April 2017, 9:01 IST


केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अरविंद केजरीवाल के खिलाफ डिफेमेशन केस के बारे में बात करते हुए एक वरिष्ठ टिप्पणीकार ने दो साल पहले कहा था कि “इस लड़ाई को लड़ने के लिए बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया के साथ उच्चतम स्तर की राजनीतिक रणनीति की जरूरत होगी.”

ये और बात है कि उस समय यह इशारा अरुण जेटली के लिए किया गया था, लेकिन दुर्भाग्य से चीजें अब इस तरह से बदल चुकी हैं कि यह वक्तव्य अब केजरीवाल के लिए ही सटीक बैठने लगा है. बिना किसी ग्लानि के केजरीवाल का दिल्ली की जनता से यह आग्रह करना कि उनकी इस कानूनी लड़ाई की कीमत उसे चुकाना चाहिए, आप के संयोजक को महंगा पड़ सकता है. अपने इस कदम से यह आप नेता तेजी से जनता की सहानुभूति खो सकता है.

 

बिल भुगतान के लिए भूमिका


5 अप्रैल को केजरीवाल ने वह स्वीकार कर लिया जो कि अब तक सिर्फ मीडिया का ही खुलासा माना जा रहा था. दिल्ली की सुंदर नगरी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने मान लिया कि वे चाहते हैं कि दिल्ली सरकार उनके वकील जेठमलानी के 3 करोड़ रुपये के बिल का भुगतान करे. एक समय भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की अगुवाई करने वाले व्यक्ति को यह कहते हुए सुनना स्तब्ध करने वाला है कि, “सरकार नहीं देगी तो मैं दूंगा क्या...अपनी जेब से दूंगा क्या?”

बदले हुए केजरीवाल


बुनियादी रूप से केजरीवाल यह कह रहे हैं कि लोगों को उनकी जेब से यह भुगतान करना चाहिए. जनता के धन पर मुख्यमंत्री जो हक जता रहे हैं वह हैरान करने वाला है. वीडियो में केजरीवाल जिस तरह से इस मुद्दे पर जनता की राय मांग रहे हैं और उनकी प्रतिक्रिया को जनमत संग्रह मान रहे हैं वह देखने वाला है. इस वीडियो में केजरीवाल एक एक्टिविस्ट और समाज सुधारक से बहुत दूर नजर आते हैं. अपने एक्टिविज्म की लागत जनता पर कब से थोपने लगे हैं सामाजिक कार्यकर्ता. जनता उन लोगों का समर्थन करे जो कि उनके लिए हाथ में लाठी लेते हैं यह एक बात है, और यह पूरी तरह से दूसरी बात है कि कोई इसको अपना हक समझ ले.

केजरीवाल एक रैली में यह स्वीकार करते हैं कि वे दिल्ली सरकार से 3 करोड़ की फ़ीस दिलवाना चाहते हैं.


केजरीवाल ने जनता को इस मामले में गुमराह भी किया. नेटवर्क18 के मुताबिक केजरीवाल ने कहा, “ मैंने जांच बैठा दी...इन लोगों ने...बीजेपी वालों ने केस कर दिया मेरे उपर. ” लेकिन जेटली ने जांच के खिलाफ कोई केस दायर नहीं किया था, उस जांच के खिलाफ जो आप सरकार ने दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन में अनियमितताओं पर बैठाई है. यह केस तो केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बयान पर मानहानि से जुड़ा था. रिपोर्ट यह भी है कि केजरीवाल ने खुद ही इस मामले को कोर्ट में अपनी “पिटीशन” में प्राइवेट बताया था.  

 

आप पार्टी के खिलाफ, सरकार के खिलाफ नहीं

यह केस अभी न्यायालय में विचाराधीन है और अभी किसी को इस पर टिप्प्णी नहीं करना चाहिए कि कौन इसमें दोषी है. पर यह एक जाना—माना तथ्य है कि यह मानहानि का मामला आप नेताओं के खिलाफ दायर किया गया था, किसी दिल्ली सरकार के अधिकारी या नेताओं के खिलाफ नहीं. सरकार और किसी भी रूप में जनता इस केस में पार्टी नहीं है. यह कारण ही पर्याप्त है यह बताने के लिए जनता पर इससे जुड़ा कोई और बोझ लादा जाए.


केजरीवाल और उनके साथी इस मामले में एक गंभीर गलती कर चुके हैं. जैसी की उम्मीद थी कि इससे विपक्षियों को एक बड़ा अवसर मिल गया है कि इस मुद्दे पर उनकी छवि को धूमिल करें. इसके बाद फिर से यह आग्रह करने पर कि जनता को ही यह भुगतान करना चाहिए, आप छवियों की इस लड़ाई में अपनी बढ़त को खो रही है और उसके प्रति वह सहानुभूति भी कम हो रही है कि एक सफल नई राजनीतिक पार्टी को शक्तिशाली लोग परेशान कर रहे हैं. आप को कोशिश करनी चाहिए उसकी यह छवि खराब न हो, क्योंकि उसकी यही एक मात्र पूंजी है, विशेषकर पंजाब और गोवा में हार के बाद.

पार्टी को यह मानकर चलना बंद कर देना चाहिए जनता उनकी ऐसी लड़ाई का झंडा अपने हाथ में लेती रहेगी जो कि उन्होंने दूसरों पर टिप्पणी करके खुद ही मोल ली है.

अपनी छवि बचाने के लिए आप के लिए यह बेहतर होगा कि वह इस दावे को करना बंद करे और जनता के पैसे पर बोझ डालने के लिए माफी मांगे तथा जेठमलानी का बिल अदा करने के लिए जरूरी पैसों का इंतजाम करे. जेठमलानी जिस तरह से जेटली और भाजपा से बदला लेने के लिए उतारू बैठे हैं, कौन जाने थोड़े से आग्रह करने पर ही वे अपनी फीस को माफ कर दें.

First published: 7 April 2017, 9:01 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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