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आखिर क्यों केजरीवाल सरकार अपने बजट का 85 फीसदी ही खर्च कर पायी?

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 June 2018, 17:25 IST

दिल्ली में आप सरकार और लेफ्टिनेंट गवर्नर अनिल बैजल के चले विवाद के मद्देनजर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने पिछले तीन वित्त वर्षों में औसतन 85 फीसदी राज्य सरकार के बजट को खर्च करने में सक्षम रही. गौरतलब है कि दिल्ली सरकार का 6 लाख करोड़ रुपये का आजा रहा है. इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली में पिछली कांग्रेस सरकार का बजट खर्च औसत 2008 और 2013 के बीच 98 फीसदी रहा था.

दिल्ली सरकार के बजट खर्च में यह कमी उस वक़्त आया है जब दिल्ली राज्य के बजट में 2013 से 29.3 फीसदी की वृद्धि हुई है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मीडिया सलाहकार नागेंद्र शर्मा ने इंडियास्पेंड को बताया, "एलजी के फैसले नियोजित खर्चों को प्रभावित करते हैं." उदाहरण के लिए 1,000 मोहाल्ला क्लीनिक और सीसीटीवी लगाने जैसे प्रोजेक्ट में देरी के कारण बजट के खर्च पर इसका असर पड़ा है. 

 

आप सरकार और एलजी के बीच टकराव के कारण 350 करोड़ रुपये की लागत से दिल्ली में 140,000 सीसीटीवी स्थापित करने की योजना में देरी हुई थी. जबकि योजनाबद्ध 1,000 मोहल्ला क्लीनिकों में से केवल 160 ही परिचालन में थे. 4 अप्रैल 2018 को दिल्ली विधानसभा में वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा प्रस्तुत एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में आप को सत्ता में आने के बाद से एलजी ने 32 प्रस्तावों को खारिज कर दिया है या देरी कर दी.
 
दिल्ली राज्य विधानसभा द्वारा उठाए गए निर्णयों की समीक्षा गृह मंत्रालय की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त दिल्ली के एलजी द्वारा की जाती है. एलजी को संविधान के अनुच्छेद 23 9एए और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम, 1991 (जीएनसीटीडी अधिनियम) के तहत प्रशासनिक शक्तियां प्राप्त हैं.

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First published: 8 June 2018, 17:10 IST
 
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