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एमसीडी चुनाव: भाजपा और कांग्रेस पर भारी पड़ सकती है आप

आकाश बिष्ट | Updated on: 8 March 2017, 11:17 IST

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के अंतिम चरण के कैंपेन खत्म होने के साथ ही राजनीतिक पार्टियों ने दिल्ली में एमसीडी चुनावों के लिए कमर कस ली है. एमसीडी को 2012 में तीन नगर निकायों में विभाजित किया गया था. इसमें 272 सीटे हैं, जिनके लिए आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहेगा. एमसीडी पर पिछले 10 सालों से भाजपा का राज है. इसलिए कांग्रेस और आप ने शहर में तेजी से कैंपेन शुरू कर दिया है ताकि भगवा पार्टी को अब तीसरे टर्म में वोट नहीं मिले.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के सदस्य मतदाताओं से समर्थन पाने के लिए शहर भर में कैंपेन शुरू कर चुके हैं. आप की सरकार ने दिल्लीवासियों के लिए काफी काम किया है और अब वह अपने कैंपेन के जरिए उन कामों को गिना रही है. हाल ही में एक कैंपेन में केजरीवाल ने मतदाताओं से वादा किया कि चुनाव जीतने के एक साल में ही वे दिल्ली को लंदन बना देंगे.

कांग्रेस भी अपनी तरफ से राज्य में फिर से आने का भरोसा दिला रही है. उन्होंने 15 साल दिल्ली में लगातार शासन किया है. मंगलवार को उपाध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली के रामलीला मैदान में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित किया. वे आप और भाजपा पर निशाना साधेंगे और इसका फीडबैक भी लेंगे कि विभिन्न वार्डों से किनको टिकट दिया जाना चाहिए. सूत्रों ने राज्य में भाजपा के कैंपेन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया है.

आप मजबूत

हो सकता है कि आप 2015 के अपने शानदार प्रदर्शन को फिर से दोहराए. तब उसने दिल्ली विधानसभा में 70 में से 67 सीटें ली थीं. इसके अलावा शहर में सरकार द्वारा किए विकास कार्य भी इन चुनावों के नतीजों को बदल सकते हैं. 2012 में एमसीडी को तीन में विभाजित किया गया था-उत्तर दिल्ली नगर निगम, दक्षिण दिल्ली नगर निगम और पूर्व दिल्ली नगर निगम. तीनों में कुल 272 सीटें हैं. उत्तर और दक्षिण में हरेक में 104 सीटें और पूर्व में 64 सीटें.

नगर निकाय के चुनाव अप्रैल में होंगे. हाल ही में आप ने दिल्लीवासियों के लिए कई योजनाएं और प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे. उसे उम्मीद है कि आम दिल्लीवासियों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए की गई सरकार की मेहनत उसे राजनीतिक लाभ दिलाएगी. पहले रविवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीवर और जल निकासी के लिए प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे, जबकि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 24 घंटे पानी का प्रोजेक्ट लॉन्च किया, जिसमें नल से सीधा साफ पीने का पानी उपलब्ध कराना भी शामिल था.

आप ने एक और योजना की घोषणा की कि सभी आय वर्ग के दिल्लीवासियों के लिए 21 डायग्नोस्टिक क्लिनिकों में रेडियोलॉजी टेस्ट निशुल्क किए जाएंगे. सरकार ने 41 प्राइवेट अस्पतालों से भी टाई अप किया है, जहां सरकारी अस्पतालों के रेफर करने पर रोगियों की 30 सर्जरी निशुल्क हो सकेगी. लोगों के हित के लिए किए कामों से संभव है कि लोगों का रुझान आप के पक्ष में बने. पार्टी की पूर्ण प्रभुता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

दिल्ली विधानसभा में सोमवार से 5 दिवसीय बजट सत्र शुरू हुआ है. केजरीवाल इस मौके का उपयोग अपनी सरकार के ढाई साल के काम को गिनाने के लिए करेंगे. शहर में शिक्षा, सेहत, साफ-साफाई का स्तर सुधारने के लिए किए अपने काम पर सरकार जोर देगी. दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिकों की सफलता, जिसमें रोगियों के लिए निशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था थी, का भी उपयोग राजनीतिक लाभ पाने के लिए किया जाएगा.

केजरीवाल ने एमसीडी चुनावों के लिए कैंपेन करते समय सीधा कहा, ‘विधानसभा चुनावों में आपने हमें 67 सीटें दीं, पर इस बार बिल्कुल भी गैप नहीं रखें. यदि हम एमसीडी चुनाव जीते, तो हम दिल्ली को एक साल में लंदन जैसा बना देंगे.’ स्वच्छता, पानी और एमसीडी में भ्रष्टचार भी चुनाव के प्रमुख मुद्दे होंगे और सिसोदिया ने पहले ही कहा है कि यदि पार्टी को जिताने के लिए मत देंगे, तो वह शहर में सफाई के साथ भ्रष्ट नगर प्रशासन को भी दुरुस्त करेंगे.

एक और बात आप के पक्ष में है. उन्होंने जनवरी की शुरुआत में 272 वार्डों को फिर से व्यवस्थित किया था. नगर के नए नक्शे के बाद बताया गया कि विधानसभा सीटों में बढ़ाए गए म्यूनिसिपल वार्डों में गंदी बस्तियां, अनधिकृत कालोनियां और ग्रामीण इलाके भी हैं, जो आप के गढ़ माने जाते हैं. नतीजतन, जो वार्ड भाजपा के गढ़ माने जाते थे, उनमें कमी आई.

भाजपा और कांग्रेस की संभावनाएं

एमसीडी पर पिछले 10 सालों से राज कर रही भाजपा आप की बढ़ती मजबूती को देखकर चिंतित है. इसका असर पिछले साल मई में हुए नगरपालिका चुनाव में नजर आया था. आप की इन चुनावों में शुरुआत थी, फिर भी उसने 13 सीटों में 5 जीतीं, कांग्रेस ने 4 जीतकर वापसी की और भाजपा तीसरे स्थान पर चली गई. इसलिए भाजपा आप और कांग्रेस के सामने शीर्ष नेता खड़े कर रही है. इसमें प्रधानमंत्री के भी होने की संभावना है.

कांग्रेस भी अपनी तरफ से बेहतर कोशिश कर रही है. वह घर-घर जाकर कैंपेन के जारिए आप और भाजपा की विकास गतिविधियों में आई गिरावट के बारे में बता रही है. पार्टी ने हर पोलिंग बूथ के अधीन कम से कम 16 घरों से संपर्क करने की जिम्मेदारी एक कार्यकर्ता को सौंपी है. हर बूथ को देखने के लिए 15 समर्पित कार्यकर्ता को कहा गया है ताकि एमसीडी चुनावों में पार्टी की वापसी सुनिश्चित की जा सके.

नोटबंदी से आम आदमी को हुई तकलीफों, और कैसे नोटबंदी अपने लक्ष्यों को पाने में विफल रही, इसके बारे में भी कांग्रेस अपने कैंपेन में मुख्य रूप से बताएगी. दिल्ली में करीब 13 हजार बूथ हैं. एक वार्ड में ऐसे 40 बूथ हैं. और हर मतदाता तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

इसके अलावा सोमवार को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी.चिदंबरम, लोकसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और वरिष्ठ नेता अजय माकेन की मौजूदगी में नगर निगमों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए ब्लू प्रिंट ड्राफ्ट जारी किया. यह भी अपनी खोई स्थिति की वापसी के लिए मतदाताओं को रिझाने की युक्ति है. पर देखना है कि आप और भाजपा से मुकाबले के लिए क्या ये मुद्दे अकेले काफी होंगे.

इस राजनीतिक हलचल में आप की स्थिति भाजपा और कांग्रेस से ज्यादा मजबूत नजर आ रही है. क्योंकि उसने अपने विकास कार्यों से दिल्लीवासियों का दिल जीता है.

First published: 8 March 2017, 8:26 IST
 
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