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CBSE: शुभम ने एक पैर से लिख कर लहराया सफलता का परचम, दास्तां सुनकर आंखों में आ जाएंगे आंसू

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 May 2019, 16:14 IST

''कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों..'' दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया है 15 वर्षीय छात्र शुभम ने, इनके हौसलों के आगे मुश्किलों ने भी घुटने टेक दिए.

दरअसल 11 साल पहले शुभम को बिजली का भयानक झटका लगा था जिससे इलाज के दौरान उनका दोनों हाथ और एक पैर काटना पड़ा था. लेकिन शुभम ने हार नहीं मानी और CBSE की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 79 फीसदी अंक हासिल किए वो भी सिर्फ एक पैर से कॉपी लिखकर. शुभम जिंदगी में पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहते और उस बुरे सपने को भूल चुके हैं.

सफलता की नई इबादत

1 साल तक शुभम का इलाज चलता रहा, वे 3 महीने तक ICU में रहे. उनके पिता अलानंद सिंह, प्राइवेट नौकरी करते हैं और आर्थिक तौर पर ज्यादा संपन्न नहीं हैं. उन्होंने बताया- सफदरजंग हॉस्पिटल में कई ऑपरेशन हुए, शरीर में इन्फेक्शन फ़ैल जाने के कारण डॉक्टरों को उसके दोनों हाथ और फिर दायां पैर भी काटना पड़ा. लेकिन एक पैर के सहारे उन्होंने आपकी किस्मत लिखने की सोची, अब उनके कदम लगातार सफलता की नई इबादत लिख रही है.

लैपटॉप और मोबाइल भी पैरों से ही चलाते हैं

इतने भयावह दर्द से गुजरने के बाद के बाद उनकी जिंदगी जीतने की ख्वाहिश और मजबूत हो गई. कड़ी मेहनत और लगन के बदौलत उन्होंने कामयाबी हासिल करने की ठानी और एक पैर से सफलतापूर्वक लिखने लगे. उन्होंने विकलांगता, असंभव और हार जैसे शब्दों पर फतह हासिल की. ऐसा नहीं है कि शुभम ने सिर्फ 10वीं में सफलता प्राप्त की है बल्कि वे बचपन से ही मेधावी स्टूडेंट थे.

शुभम 2015 में इंडोनेशिया में दिव्यांगों की ग्लोबल आईटी प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं और उन्होंने ये कम्पीटशन जीता था. कई क्विज प्रतियोगिताओं में भी भाग ले चुके हैं. 2013 में जीआरएफ फाउंडेशन की ओर से कराई गई प्रतियोगिता में उन्होंने 1st पोजीशन हासिल की थी. वह बाकी बच्चों की तरह लैपटॉप और मोबाइल भी पैरों से ही चलाते हैं.

First published: 8 May 2019, 16:12 IST
 
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