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CBSE: पेपर लीक रोकने के लिए मोदी सरकार का मास्टर प्लान, जानिए क्या है प्लान

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 June 2018, 14:07 IST
cbse paper leak

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठा सकता है. CBSE परीक्षा सत्र और पेपर पैटर्न में बदलाव करने के लिए उपायों पर विचार कर रही है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय की ओर से गठित एक एक्सपर्ट पैनल ने सिफारिश की है कि क्वेश्चन पेपर में क्यूआर कोड (QR Code) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए इसके साथ ही एक्सपर्ट पैनल ने सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा सत्र को छोटा करने का भी सुझाव दिया है.

गौरतलब है कि इस साल पेपर लीक की ख़बरों के बीच बोर्ड परीक्षा का आयोजन किया गया था और रिजल्ट भी जारी कर दिया गया. इस मामले में सीबीएसई और सरकार को काफी फजीहत का सामना करना पड़ा था. पेपर लीक से उन मेधावी छात्रों पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ता है जो अपनी मेहनत के बदौलत एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाते हैं.

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हिंदुस्तान टाइम्स न्यूज पेपर की एक रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग मार्किंग सिस्टम को भी खत्म करने की मांग की गई है. HRD मिनिस्ट्री ने अपने पूर्व सचिव वीएस ओबेरॉय की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट्स जाँच टीम का गठन किया था. इस पैनल को सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा से संबंधित सभी मामलों की समीक्षा करने का काम दिया गया है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पेपर लीक नहीं होने पाए और सही तरीके से स्टूडेंट्स के पास पहुंचे.

पेपर लीक के अधिकतर मामलों में पेपर प्रिंटिंग प्रेस से परीक्षा केंद्र के बीच से आउट होता है. HRD ने एक्सपर्ट पैनल को क्वेश्चन पेपर के प्रिंटिंग प्रेस से एग्जाम सेंटर तक ले जाने के मौजूदा सिस्टम की कमियों का आकलन करने के लिए भी कहा गया था. पैनल की ओर से की गई सिफारिशों पर अब मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय विचार करेगी और इसे लागू भी किया जाएगा जिस पर फैसला करने के लिए कोई विशिष्ट समय सीमा नहीं होगी.

पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि CBSE को एन्क्रिप्टेड प्रश्न पत्र भेजने पर विचार करना चाहिए और प्रिंटिंग सेंटर आधारित होनी चाहिए. इसके साथ ही साथ सिफारिश की है कि प्राइवेट स्कूल के बदले केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, आर्मी पब्लिक स्कूल और राज्य के सरकारी संस्थानों में ही परीक्षा का आयोजन किया जाए.

पैनल ने सुझाव दिए हैं कि जिन विषयों के लिए कम लोग रजिस्ट्रेशन करते हैं, उनकी परीक्षा जनवरी-फरवरी महीने  में ही आयोजित कर देनी चाहिए जबकि हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, सोशल साइंस आदि मुख्य विषयों की परीक्षा मार्च से अप्रैल के बीच होनी चाहिए. 

First published: 16 June 2018, 14:06 IST
 
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