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10वीं में खराब रिजल्ट की सजा भुगत रहे टीचरों के समर्थन में आए साथी टीचर, उठाया बड़ा कदम

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 July 2018, 13:11 IST

10वीं बोर्ड का रिजल्ट खराब आने पर कई सरकारी स्कूल के शिशकों और प्रिंसिपल पर कार्यवाई की गई है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है. दरअसल कुछ सरकारी स्कूल का पास प्रतिशत 30 फीसदी और 20 फीसदी के न्यूनतम स्तर पर रहा. शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल के टीचर्स को कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) जारी करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया.

इस मामले के बाद टीचर्स यूनियन के 200 से भी अधिक शिक्षक निलंबित शिक्षकों के पक्ष में आ गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. यूटी कैडर एजुकेशनल कर्मचारी संघ द्वारा एक प्रोटेस्ट का आयोजन किया गया और शिक्षकों पर की गई कार्यवाई वापिस करने की मांग की गई.

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विरोध करने वाले शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग की ग्रेस मार्किंग की नीति से छात्रों को नुकसान पंहुचा है. उन्होंने आगे कहा कि उन शिक्षकों को दोषी ठहराया गया जिन्होंने छात्रों को परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर अच्छी तरह से तैयार करने की कोशिश की.

यूटी कैडर एजुकेशनल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कामबोज ने कहा, "निलंबन आदेश और शो-कॉज नोटिस वापस लेने तक हम विरोध जारी रखेंगे." उन्होंने बताया कि अगला विरोध 9 जुलाई को मस्जिद ग्राउंड, सेक्टर 20 में यूटी शिक्षकों की संयुक्त कार्य समिति (जेएसी) द्वारा आयोजित की जाएगी.

शिक्षा विभाग ने GMSSS-राम दरबार स्कूल की प्रिंसिपल नीना, गवर्नमेंट हाई स्कूल की संगीता बजाज और सरकारी हाई स्कूल के अन्य 4 प्रभारी को निलंबित कर दिया था, इन स्कूल का रिजल्ट 20 फीसदी से भी कम था. इसके साथ ही तीन स्कूलों के प्रभारी का भी ट्रांसफर कर दिया गया था.

First published: 7 July 2018, 12:44 IST
 
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