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इस होनहार छात्र की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं, ढाबा चलाकर पास की CAT परीक्षा

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 July 2018, 17:24 IST

इंदौर के रहने वाले शशांक अग्रवाल ने IIM और अन्य प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित CAT की एंट्रेंस एग्जाम में 98.01 परसेंटाइल हासिल किया है. शशांक को IIM रोहतक में मैनेजमेंट कोर्स में एडमिशन मिला है. शशांक ने इस सफलता को पाने से पहले काफी संघर्ष किया है. अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें ढाबा चलाना पड़ा. गरीबी और मुसीबतों के झंझावातों ने भी शशांक के बुलंद हौसले के सामने घुटने तक दिए.

रिपोर्ट के मुताबिक, 25 साल के शशांक अग्रवाल के पिता का बहुत कम उम्र में निधन हो गया था. उसके बाद उनके दादाजी को मिलने वाले पेंशन से  घर खर्च किसी तरह चल रहा था. स्कूल खत्म करने के बाद उन्होंने इंदौर के इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया. जब वह सेकंड इयर में थे, तभी उनके दादाजी की मौत हो गई. अब उस पेंशन का स्रोत भी खत्म हो गया और परिवार पर बड़ा आर्थिक संकट आ गया.

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ऐसे में घर की जिम्मेवारी शशांक पर थी और उन्होंने फैसला किया कि अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कुछ रोजगार भी करेंगे. शशांक ने 50 हजार रुपये कर्ज लेकर इंदौर के भवर कुआं चौराहे पर एक ढाबा शुरू किया. इस जगह इंदौर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में रहते हैं.  शशांक ने पांच लोगों को साथ लेकर ढाबा शुरू किया और 50 रुपए में भरपेट खाना देना शुरू किया.

अच्छी क्वालिटी के कारन उनका ढाबा चल पड़ा और करीब 30 हजार रुपए प्रतिमाह तक कमाने लगे. इस दौरान शशांक ने तय किया कि वह अपनी पढ़ाई को नुकसान नहीं होने देंगे. उन्होंने अपनी पढ़ाई और काम के बीच संतुलन बनाया. वह सुबह 6 बजे स्थानीय मंडी पहुंचते और वहां से ढाबे के लिए सब्जी और दूसरे सामान खरीदकर अपने ढाबे पर खाने की तैयारी कराते. इसके बाद दोपहर में कॉलेज पहुंच जाते फिर शाम को ढाबा पर आते, यह दौर  रात 11 बजे तक चलता.

आखिरकार शशांक को सफलता मिली और अब कोर्स पूरा होने के बाद लाखों के पैकेज पर किसी मल्टी नेशनल कंपनी में उनकी नौकरी पक्की है और भविष्य में सफलता के कई दरवाजे उनके लिए खुल गए. परेशानी हरेक इंसान की जिंदगी में आती है लेकिन जो इंसान अपना हौसला बुलंद रखे और अपनी मुश्किलों का डट कर मुकाबला करे विजेता वही है

First published: 29 July 2018, 17:24 IST
 
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