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किसी इमारत में नहीं बल्कि ट्रेन के कोच में चलता है ये स्कूल, हकीकत जानकर दंग रह जाएंगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 July 2018, 15:07 IST

स्कूल में लगातार कम हो रही बच्चों की संख्या का कर्नाटक के एक सरकारी स्कूल ने समाधान निकाल लिया. इसके लिए स्कूल के टीचर्स ने स्कूल की बिल्डिंग को ट्रेन के कोच के रूप में बदल दिया. कर्नाटक के नानजंगूद तालुका के तैयूर ग्राम पंचायत के दूरदराज गांव हरोपुरा में एक उच्च प्राथमिक विद्यालय है.

इस स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही थी, बच्चे स्कूल छोड़ने लगे थे, वहीं प्रवेश लेना बंद कर दिया था. स्कूल प्रिंसिपल और स्कूल के ही तीन टीचर्स ने इस समस्या से निजात पाने का एक उपाय खोज निकाला. चारों ने स्कूल के क्लास रूम्स को ट्रेन के रूप में प्रिंट करा दियाजिससे बच्चे स्कूल आने में दिलचस्पी जताएं और समय पर स्कूल आएं.

अब ये स्कूल बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. जो बच्चे स्कूल नहीं आते थे. उन्होंने भी स्कूल आना शुरु दिया है. बता दें कि अब स्कूल की इमारत गांव से गुजरने वाली ट्रेन की तरह दिखाई देता है.

बता दें कि इस गांव के कई बच्चों ने कभी ट्रेन नहीं देखी. स्कूल के प्रिंसीपल बसवानायक बताते हैं कि अब स्कूल में बच्चों की संख्या में पहले से ज्यादा इजाफा हुआ है. बच्चे स्कूल आने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. वहीं बच्चे भी खुद हैं क्योंकि उन्हें चलती ट्रेन में पढ़ाई करने जैसा अहसास होता है.

बता दें कि स्कूल प्रिंसीपल बसवानायक, स्कूल टीचर डोरेस्वामी, तारणम और नेत्रावती ने अपने खुद 25000 हजार रुपये लगाकर स्कूल के क्लास रूम्स को ट्रेन के कोच के रूप में बदल दिया. मैसूरू से आए दो कर्मचारियों ने स्कूल की सूरत बदल दी. बता दें कि इस स्कूल में पहली से सातवीं क्लास तक कुल 55 बच्चे पढ़ते हैं.

ये गांव इतना पिछड़ा हुआ है कि इस गांव में ट्रेन तो क्या बस से आने जाने की भी सुविधा नहीं है. यहां के लोगों को कहीं भी आने जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इस गांव के तमाम लोगों ने अपने बच्चों का दाखिला पास ही के दूसरे गांव के प्राइवेट स्कूलों में करा दिया था. जो शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गया था, लेकिन स्कूल की बिल्डिंग को ट्रेन के कोच के रूप में बदलने पर बच्चे दोबारा इस स्कूल में पढ़ने आने लगे.

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First published: 16 July 2018, 15:07 IST
 
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