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IIT दिल्ली और IIT बंबई सहित इन 6 इंस्टीट्यूट्स को मिला 'उत्कृष्ठ संस्थान' का दर्जा

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2018, 15:09 IST

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के 6 यूनिवर्सिटी / संस्थानों को उत्कृष्ठ संस्थान (Institution of Eminence-IoE) का दर्जा प्देने की घोषणा की है. इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में IIT दिल्ली, IIT  बंबई और आईआईएससी बेंगलुरु (IISc Bangalore) शामिल हैं जबकि निजी क्षेत्र से बिट्स पिलानी, मनीपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन और जियो इंस्टीट्यूट को भी उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान किया है. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.

आईआईटी दिल्ली और आईआईटी बंबई को बधाई देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि इन दोनों उत्कृष्ठ संस्थानों को सरकारी वित्त पोषण प्राप्त होगा क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के जिन संस्थानों को उत्कृष्ठ संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया है, उन्हें अगले पांच वर्षो के दौरान 1000 करोड़ रूपये का सरकारी अनुदान मिलेगा.

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एचआरडी मिनिस्ट्री ने कहा कि देश के लिए उत्कृष्ठ संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस) काफी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और इनका देश की प्रतिष्ठा में अहम  योगदान होता है. हमारे देश में 800 विश्वविद्यालय हैं, लेकिन एक भी विश्वविद्यालय टॉप 100 या टॉप 200 की विश्व रैंकिंग में शामिल नहीं है. इस निर्णय से उत्कृष्ठ संस्थान को लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी.

मंत्रालय ने कहा कि इस घोषणा से इन संस्थानों के शिक्षण स्तर एवं शिक्षा गुणवत्ता को तेजी से बेहतर एवं अद्वीतीय बनाने में मदद मिलेगी और अन्य कोर्सेस को भी जोड़ा जा सकेगा. इसके अलावा इन संस्थानों को विश्व स्तरीय संस्थान बनाने की दिशा में जो कुछ भी जरूरी होगा या जिन संसाधनों की जरुरत होगी उसे पूरा किया जा सकेगा.

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर कहा कि इन इंस्टीटूट्स की रैंकिंग को बेहतर बनाने के लिए दूरदर्शी योजना, सम्पूर्ण स्वतंत्रता और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को वित्त पोषण की जरूरत होती है. मोदी सरकार इनमें हस्तक्षेप नहीं करने और संस्थानों को अपने पॉलिसी के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने को प्रतिबद्ध है.

एचआरडी मिनिस्ट्री ने कहा कि यह इस दिशा में मील का पत्थर निर्णय है क्योंकि इसके बारे में पहले कभी न सोचा गया और न ही कभी प्रयास किया गया था. यह वास्तव में संस्थानों की पूर्ण स्वायत्ता जैसा है, इससे संस्थान अपना निर्णय ले सकेंगे. आज का निर्णय एक तरह से पूर्ण स्वायत्तता है और इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी छात्र को शिक्षा के अवसर एवं छात्रवृत्ति, एजुकेशन लोन के ब्याज में छूट, फीस में छूट जैसी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सके.

First published: 9 July 2018, 15:09 IST
 
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