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इस साल 5 लाख युवा बने 'बेरोजगार इंजीनियर', अब करेंगे चपरासी की नौकरी

दीपक कुमार | Updated on: 15 July 2018, 15:38 IST

हमारे देश में प्रत्येक साल लगभग 9 लाख स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर इंजीनियर बनते हैं. IIT, NIT और कुछ प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों से पास उम्मीदवारों को अच्छी नौकरी मिलने में कोई परेशानी नहीं होती, अधिकांश स्टूडेंट्स का आकर्षक सैलरी के साथ कैंपस प्लेसमेंट हो जाता है.

लेकिन अन्य संस्थानों से पास स्टूडेंट्स में स्किल की कमी और कम योग्यता की वजह से लाखों इंजीनियर नौकरी की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाते हैं. इंजीनियरिंग कोर्स में कैंपस प्लेसमेंट के दौरान नौकरी पाने वाले भाग्य शाली स्टूडेंट्स की तादात कम ही होती है.

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बेरोजगार इंजीनियर: सरकार और संस्थान जिम्मेवार 

इसके लिए संस्थान और सरकार की पॉलिसी मुख्य मुख्य रूप से जिम्मेवार हैं. निजी इंजीनियरिंग संस्थानों को मान्यता देने वाली सरकार की नोडल एजेंसी AICTE (ऑल इंडिया कॉउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन), अगर अपना काम ईमानदारी से करती और सभी मापदंडों को पूरा करने वाले कॉलेज को ही मान्यता देती तो शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ऐसा खिलवाड़ नहीं होता. इसका खामियाजा स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ता है.

आज इंजीनियरिंग की डिग्री हाथों में लिए बेरोजगार युवा "चपरासी और सफाई कर्मी" की सरकारी नौकरी के लिए भी मशक्कत कर रहें हैं. इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है कि अभी हाल ही में राजस्थान के नगर निगम में सफाई कर्मी के लिए वैकेंसी निकाली गई थी जिसके लिए हजारों की तादात में इंजीनियर और एमबीए स्टूडेंट्स ने आवेदन किया है.

लाखों की फीस देकर लुट गए इंजीनियर

फीस के नाम पर पर लाखों की मोटी रकम वसूलने वाले और शिक्षा को व्यापर में तब्दील करने वाले इंजीनियरिंग संस्थान बड़ी-बड़ी बिल्डिंग दिखाकर विद्यार्थियों को एडमिशन के लिए आकर्षित तो कर लेते हैं लेकिन गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नहीं दे पाते हैं, इस कारण स्टूडेंट्स के पास इंजीनियरिंग की डिग्री तो होती है लेकिन कम्पटीशन के युग में वे अपनी औद्योगिक उपयोगिता साबित नहीं कर पाते हैं.

इस साल 5 लाख युवा बने बेरोजगार इंजीनियर

हालांकि इस साल इंजीनियरिंग कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट की तादाद में इजाफा हुआ है. इस साल कुल 875234 उम्मीदवारों ने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है जिसमें 365342 उम्मीदवारों को ही कैंपस से सीधे नौकरी हासिल हुई है. अगर पिछले पांच सालों की बात करें तो कैंपस प्लेसमेंट का यह आंकड़ा पहली बार 40 प्रतिशत के ऊपर गया है.

इस बार कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से करीब 42 फीसदी इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को जॉब ऑफर किया गया है. लेकिन यह चिंता की बात है कि 58 फीसदी स्टूडेंट कैंपस प्लेसमेंट के दौरान नौकरी हासिल करने में असफल रहे हैं. AICTE से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 के दौरान यह 38.39% और 2013-14 में यह 31.95% था.

First published: 15 July 2018, 15:38 IST
 
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