Home » Education News » Maharashtra: TET Fail 7000 Elementary Teachers in Maharashtra will be face Imminent Termination
 

इस राज्य में जा सकती है TET पास न करने वाले 7000 से अधिक शिक्षकों की नौकरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2020, 13:10 IST

Maharashtra TET Fail Elementary Teacher Face Imminent Termination: प्राथमिक विद्यालयों (Primary Schools) के शिक्षकों (Teachers) के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होता है. महाराष्ट्र (Maharashtra) के प्राथमिक स्कूलों (Primary Schools) के शिक्षकों के लिए भी टीईटी (TET) परीक्षा (Exam) अनिवार्य (Compulsory) होती है. ऐसे में महाराष्ट्र के प्राथमिक स्कूलों में तैनात 7000 शिक्षकों पर नौकरी जाने का खतरा मंडरा रहा है.

बता दें कि महाराष्ट्र के प्राथमिक स्कूलों में तैनात 7000 से ज्यादा टीचर अभी तक टीईटी परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं. ऐसे में सरकार ने उनके खिलाफ शख्त कदम उठाने का फैसला लिया है. जिसके तहत उनकी सेवाओं के समाप्त किया जा सकता है. बता दें कि पिछले सप्ताह बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कक्षा एक से आठवीं तक के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करने के अपने फैसले पर आगे बढ़ने का आदेश दिया था. जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस आरआई चगला की बेंच ने नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया था.


बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने अलग-अलग शिक्षकों द्वारा दाखिल की गई याचिकाओं की सुनवाई पर ये फैसला सुनाया. इन टीचर्स ने डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें लिखा गया है कि जो प्राथमिक शिक्षक 30 मार्च 2019 तक टीईटी परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा.

इस मामले में बेंच ने कहा था कि यह सार्वजिनक हित में हैं. बेंच ने यह भी कहा कि इस तरह की नीतियां इसलिए बनाई जाती हैं जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके. कोर्ट ने कहा कि वह तभी संभव है जब योग्य लोग शिक्षक के रूप में नियुक्त किए जाएं. कोर्ट का कहना था कि जो शिक्षक विषय को अच्छे से जानते हैं और अनिवार्य टेस्ट पास कर चुके हैं, उनसे ही गुणवर्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद की जा सकती है.

कोर्ट ने कहा कि यह भी गौर करने वाली बात है कि प्राइमरी शिक्षा ही बच्चे के दिमाग का विकास और व्यक्तित्व को आकार देती है. अगर इस उम्र में सही मूल्य मस्तिष्क में नहीं बैठाए गए तो बच्चे शिक्षा में दिलचस्पी नहीं लेते है. कोर्ट ने कहा कि एक शिक्षक ही शिक्षा का महत्व और उसकी अहमियत बच्चों को समझा सकता है.

बता दें कि TET की अनिवार्यता बच्‍चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन (NCTE) ने शुरु की थी. इसके तहत बेसिक शिक्षा बीएड और डीएलएड थी. आरटीई कानून के तहत 1 अप्रैल 2010 को लागू हुआ और NCTE ने अगस्त 2010 में टीईटी की शुरुआत की. उसके तीन साल बाद मार्च 2013 में राज्य सरकार ने इस नीति को अपनाया. नवंबर 2017 में राज्य सरकार ने प्राथमिक शिक्षकों के टीईटी पास करने की आखिरी तारीख 30 मार्च 2013 रखी. उस समय यह भी निश्चित किया गया कि जो शिक्षक कट ऑफ डेट से पहले इसे पास नहीं कर पाएंगे. उन शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया जाएगा.

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First published: 10 February 2020, 13:10 IST
 
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