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मनरेगा मजदूर के बेटे ने लहराए सफलता के परचम, बनेगा गांव का पहला इंजीनियर

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 June 2019, 19:10 IST

महान कवि दुष्यंत ने सच ही कहा है, ''कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों...'' यह बात सच साबित कर दिखाया है 18 साल के लड़के लेखराज ने. मनरेगा में मजदूरी कर बहुत मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने वाले मांगीलाल को कहां पता था कि एक दिन उसका बेटा परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का नाम रौशन करेगा.

राजस्थान के झालावाड़ जिले स्थित भीलन गांव का लेखराज ने अपने पहले प्रयास में ही JEE मेन परीक्षा पास कर ली है. JEE परीक्षा IIT सहित देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में एडमिशन के लिए आयोजित की जाती है. उनके माता-पिता यहां गांव के मनरेगा मजदूर हैं जिन्हें यह भी पता नहीं था कि इंजीनियर होता क्या है.


 

कुछ साल पहले तक लेखराज को खुद भी जेईई-मेन का पता नहीं था. लेकिन अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने इस एग्जाम को क्रैक किया. वह अपने आदिवासी गांव में पहले लाल हैं जो जेईई मेन में चयनित हुए हैं. लेखराज ने कहा कि मेरे माता-पिता का सपना था कि एक दिन उनका बेटा पढ़-लिखकर हमें मजदूरी के काम से छुटकारा दिलाएगा. उन्हें यही आशा है अब हालात शायद पहले से बदल जाएंगे.

बेटे की सफलता से गद्गद पिता मांगीलाल ने कहा कि मैं तो सपने में भी नहीं सोच सकता था कि मेरा बेटा इंजीनियर हो जाएगा. आज मैं ये सोचकर बहुत खुश हूं कि मेरा बेटा भील समुदाय और गांव में पहला इंजीनियर बनने जा रहा है. अपनी सफलता के लिए लेखराज ने अपने शिक्षक, कोटा में अपने कोचिंग संस्थान के निदेशक को धन्यवाद दिया.

First published: 25 June 2019, 19:10 IST
 
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