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मनरेगा मजदूर ने भूखे पेट रहकर बेटे को बनाया डॉक्टर, लोग दे रहे हैं मिसाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 June 2018, 14:06 IST
(indianexpress)

NEET Result 2018: कृष्ण कुमार नाम के एक स्टूडेंट ने अपनी मेहतन और अथक प्रयास से NEET की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है. अब वे MBBS की डिग्री पूरा करने बाद डॉक्टर बन जाएंगे और वे अपनी ग्राम पंचायत के पहले डॉक्टर होंगे. कृष्ण कुमार के माता-पिता मनरेगा मजदूर के रूप में काम करते हैं और काफी के साथ अपना जीवनयापन करते हैं. लेकिन बेटे ने गरीबी को गर्व में तब्दील कर दिया. कृष्ण कुमार राजस्थान के धौलपुर जिले के सखवाड़ा पंचायत से NEET परीक्षा में सफलता पाने वाले अकेले छात्र हैं.

उनके माता-पिता ने कहा कि वे चाहते थे कि वे जीवन में जिन दुखों का सामना कर रहे थे, उनसे बाहर निकलें. उनके पिता मुन्ना लाल ने कहा, "मेरे लंबे समय से प्रतीक्षित सपना सच हो गया है, मुझे गर्व है कि मेरा बेटा मेरे पंचायत में पहला डॉक्टर होगा, मैंने अपना पेट काटकर भूखे रहकर बेटे को पढ़ाई है. लेकिन मुझे विश्वास था मेरा बेटा जरूर सफल होगा. " कुमार की मां अशिक्षित है.

गरीबी के थपेड़ों को झेलते हुए कुमार ने अपने गांव में केरोसिन लैंप से अपनी पढ़ाई करते कई रातें बिताई, उनके पास आधुनिक लैंप खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे. 19 वर्षीय इस छात्र ने अपने गांव से लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित कोटा शहर में इस एग्जाम की तैयारी की. कृष्ण कुमार ने अपने तीसरे प्रयास पर सफलता पाई, हाल ही में आयोजित NEET एग्जाम में आल इंडिया 3,099 की रैंकिंग हासिल की है. वह अपने पंचायत से पहले एमबीबीएस डॉक्टर बनेंगे.

लेकिन यह उनके माता-पिता का दृढ़ विश्वास था, जिससे उन्होंने सफलता प्राप्त की, लगातार दो प्रयासों में विफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी.  इसके बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित और प्रेरित किया. कुमार ने अपने गांव से लगभग 20 किमी दूर एक हिंदी माध्यम सरकारी स्कूल से अपनी12वीं की शिक्षा पूरी की.

उन्होंने कहा कि वह ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करने में योगदान देना चाहते हैं, और गरीबों को मुफ्त में बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना चाहते हैं. कृष्ण कुमार के सफलता से हजारों वैसे स्टूडेंट्स को प्रेरणा मिलेगी जो बिपरीत परिस्थितियों में भी  संघर्ष करना नहीं छोड़ते.

First published: 9 June 2018, 14:05 IST
 
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