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साल गंवाने पर भी नहीं होंगे NEET फॉर्म खारिज़: MP हाई कोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 April 2018, 19:22 IST

उच्च न्यायालय के फैसले से NEET प्रत्याशियों को एक बहुत बड़ी राहत मिलने की अपेक्षा है. बहुत दिनों से चल रहे बहस पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस बात पर मंजूरी दे दी है कि जिस विद्यार्थी ने ग्यारहवीं और बारहवीं के बीच 2 साल से ज्यादा समय लगाया हो वह भी NEET का फॉर्म भर सकता है, अर्थात् ऐसे विद्यार्थी जिन्होनें ग्यारहवीं और बारहवीं के बीच 1 साल का अंतराल लिया हो.

MBBS (Bachelor of Medicine and Bachelor ofSurgery) तथा BDS (Bachelor of Dental Surgery) में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा (NEET 2018) के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी मंजूरी देते हुए कहा है कि अब सभी विद्यार्थी NEET का फॉर्म भर सकते हैं।

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जिन्होनें बारहवीं बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री तथा इंग्लिश 50% मार्क्स से उत्तीर्ण किया हो, वह विद्यार्थी इस परीक्षा के योग्य हैं. जिन छात्र- छात्राओं ने प्राइवेट उम्मीदवार के तौर पर बारहवीं की परीक्षा पास की है, वे भी राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET) दे सकते हैं.

NEET के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव नहीं किये गये हैं, परन्तु इस फॉर्म को भरने की योग्यता में कुछ बदलाव जरूर लाये गए हैं. CBSE ने कहा था कि ऐसे विद्यार्थी जिन्होनें ग्यारहवीं और बारहवीं के बीच अन्तराल लिया हो, वो NEET के फॉर्म के लिए योग्य नहीं हैं, इस बात को नामंजूर करते हुए मध्य प्रदेश की हाई कोर्ट ने कहा कि यह संविधान के “आर्टिकल 14” के विरुद्ध है. उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई उपयुक्त कारण नहीं है, जिससे विद्यार्थियों को परीक्षा देने न दिया जाये.

इस शैक्षिक सत्र में NEET के मामले में पहले भी काफी न्यायिक हस्तक्षेप हो चुके हैं जिसका प्रमुख कारण CBSE एवं MCI द्वारा लाये गए नए अधिनियमों को माना जा सकता है.

अधिकतम आयु सीमा

दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा के लिए आयु सीमा पर भी अपनी राय दे दी है। योग्यता कसौटी के अनुसार NEET का फॉर्म भरने वाले विद्यार्थी की न्यूनतम आयु सीमा 31 दिसंबर 2018 से पहले 17 साल पुरे हो जाने चाहिए.

इस परीक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 साल तय किया गया है. ST/ SC, OBC तथा वह व्यक्ति जिनको “विकलांगता अधिनियम 2016” के तहत यह परीक्षा देने का अधिकार है, इन सबकी अधिकतम आयु सीमा बढाकर 30 साल कर दी गयी है. अब सामान्य जाति को छोड़कर सभी जाति के अभ्यर्थी 30 साल तक मेडिकल की परीक्षा (NEET) में शामिल हो सकते हैं.

आधार कार्ड नंबर

इस बार NEET 2018 के लिए आवेदन करने वाले छात्र तथा छात्राओं के पास आधार नंबर होना जरुरी था, हालाँकि जम्मू- कश्मीर, असम तथा मेघालय के छात्र- छात्राओं को इससे छुट दी गयी थी, अर्थात यह नियम उनपर लागू नहीं होगा. हालांकि उच्चतम न्यायालय ने इस मांग को मान्य करार न देते हुए CBSE को नियम बदलने के लिए आदेश दिया है.

CBSE ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोटिस जारी किया जिसमें आधारनंबर होने की आवश्यकता को नकार दिया. NRI (Non-Resident Indians) तथा OCI के लिए आधार नंबर की जगह पासपोर्ट नंबर देना अनिवार्य है, तभी वो NEET के लिए योग्य हो पाएंगे अन्यथा वे इस परीक्षा में शामिल होने योग्य नहीं हैं. 

परीक्षा के बारे में :-

NEET की शर्तों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी थी, इस पर सुनवाई होने के बाद अब दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है. NEET 2018 के लिए पंजीकरण 8 फरवरी से शुरू हो गया था, जो 12 मार्च तक कराया जा सकता था. परीक्षा की तिथि 6 मई 2018 को तय हुआ है, यह परीक्षा 150 सेंटरों पर होगी, जबकि 2017 में 107 सेंटरों पर ही परीक्षा हुई थी.       

शनिवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने CBSE पर उस छात्र के फॉर्म को रिजेक्ट करने की बात पर अंकुश लगाया है, जिसने ग्यारहवीं तथा बारहवीं के बीच 1 साल का अन्तराल लिया है. आयुष्यमान खुराना जिसने 2012 में ग्यारहवीं और 2014 में बारहवीं की परीक्षा पास की थी, ने इस बात के लिए कोर्ट में अपील की थी, जज रवि शंकर झा तथा राजीव कुमार दुबे ने इस बात की सुनवाई की.

CBSE काउंसल ने कहा कि एक ऐसा ही केश दिल्ली हाई कोर्ट में भी है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सारी बातें समझकर तथा दिल्ली हाई कोर्ट से जाँच पड़ताल करने के बाद CBSE जो NEET कंडक्ट कराती है, उससे कहा कि वह फॉर्म को रिजेक्ट न करें. हाई कोर्ट का यह फैसला उम्मीदवारों के लिए बहुत ही अच्छी खबर है, इससे सभी उम्मीदवार नि:संकोच इस परीक्षा में बैठ सकते हैं.

First published: 3 April 2018, 19:18 IST
 
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