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NEET: इन छात्रों को मिले 'जीरो' नंबर, अब बनेंगे MBBS डॉक्टर

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 July 2018, 18:48 IST

हमारे देश में अधिकांश माँ- बाप का सपना होता है कि हमारा बच्चा खूब म्हणत से पढ़े और डॉक्टर / इंजीनियर बने. लेकिन हमारा एजुकेशन सिस्टम  मेधावी छात्रों के करियर से सरेआम खिलवाड़ करता है. पैसे के बल पर अयोग्य छात्रों को मेडिकल / इंजीनियरिंग संस्थानों में एडमिशन मिल जाता है और मेधावी स्टूडेंट्स दर-दर की ठोकर खाते हैं.

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भ्रष्ट एजुकेशन सिस्टम का एक जीवंत उदाहरण वर्ष 2017 में मेडिकल के MBBS कोर्स में हुए ऐडमिशन में देखने को मिला. बड़ी संख्या में ऐसे छात्रों को भी एमबीबीएस कोर्स में ऐडमिशन मिल गया है जिन्होंने मेडिकल एंट्रेंस की परीक्षा NEET में एक या दोनों विषयों में जीरो या एक अंक में नंबर प्राप्त किए हैं.

मेडिकल कोर्सेस में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा NEET में लगभग 400 स्टूडेंट्स को फिजिक्स और केमिस्ट्री विषय में सिंगल डिजिट में नंबर मिले और 110 छात्रों को जीरो नंबर मिले, इसके वावजूद इन सभी छात्रों को MBBS कोर्स में एडमिशन मिल गया. अब वे डॉक्टर बन लोगों का इलाज करेंगे!

इन स्टूडेंट्स में अधिकांश को निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिला है. ऐसे में हमारी शिक्षा नीति पर यह सवाल उठता है कि जीरो (0)नंबर मिलने के बाद भी अगर इन छात्रों को दाखिला मिल जाता है तो फिर प्रवेश परीक्षा कराने की क्या आवश्यकता है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे 1,990 स्टूडेंट्स  के अंकों का विश्लेषण किया जिनका 2017 में ऐडमिशन हुआ और उनके NEET स्कोर 150 से भी कम है. 530 ऐसे स्टूडेंट्स सामने आए जिनको फीजिक्स, केमिस्ट्री या दोनों में जीरो या सिंगल डिजिट में अंक मिले हैं.

पहले NEET में हर विषय में कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य था. बाद में पर्सेंटाइल सिस्टम को लागु किया गया और प्रत्येक सब्जेक्ट में   अनिवार्य नंबर की बाध्यता खत्म कर दी गई. इसका परिणाम यह हुआ कि जीरो या सिंगल डिजिट नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स को भी कई मेडिकल संस्थानों में ऐडमिशन मिल गया.

First published: 16 July 2018, 18:48 IST
 
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