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UGC ने PhD और MPhil में एडमिशन के लिए इंटरव्यू में 100% वेटेज के नियम को रद्दी में डाला

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 May 2018, 12:03 IST

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने शोध छात्रों के लिए पीएचडी और एम.फिल प्रोग्राम में एडमिशन के लिए एकमात्र पैरामीटर के रूप में ओरल इंटरव्यू या वाईवा- वॉयस को खत्म कर दिया है. यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने रिसर्च स्टूडेंट्स के लिए इस विवादास्पद चयन नियम वापस ले लिया है.

उच्च शिक्षा नियामक (higher education regulator) ने लिखित प्रवेश परीक्षा में प्रदर्शन के लिए 70 प्रतिशत और मौखिक साक्षात्कार के लिए 30 प्रतिशत वेटेज देने के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2016 की न्यूनतम मानक और एम.फिल / पीएचडी डिग्री के लिए अवार्ड प्रक्रिया में संशोधन किया है.

UGC ने एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों द्वारा लिखित परीक्षा में न्यूनतम अंक में पांच प्रतिशत की छूट की भी अनुमति दी है. इसलिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को इंटरव्यू लिए क्वालीफाई करने के लिए प्रवेश परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना होगा जबकि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को सिर्फ 45 प्रतिशत स्कोर सिक्योर करना होगा.

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साल 2016 में यूजीसी ने सभी शैक्षिक संस्थानों में पीएचडी और एम.फिल कोर्स में एडमिशन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक नया नियम लागू किया था. इन नियमों के अंतर्गत दूरस्थ शिक्षा (Distance education) मोड से पीएचडी कार्यक्रमों में एडमिशन को प्रतिबंधित कर दिया गया.

यूजीसी की इस अधिसूचना ने पीएचडी में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा भी अनिवार्य कर दी है और निर्धारित किया है कि इंटरव्यू के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत स्कोर करना होगा, जिसके आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा. मतलब इन नियमों से पीएचडी में प्रवेश के लिए वाईवा- वॉयस 100 प्रतिशत वेटेज दे दिया था और एंट्रेंस एग्जाम सिर्फ क्वालीफाइंग परीक्षा बन गई थी.

First published: 25 May 2018, 11:45 IST
 
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