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2015 : वो फिल्में जिन्हें माफ नहीं किया जा सकता

राहुल देसाई | Updated on: 26 December 2015, 0:13 IST

आपने फिल्म दर्शकों को अक्सर कहते सुना  होगा कि ये पैसा वसूल फिल्म है. आपने खुद कई बार ऐसा कहा होगा. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि आप फिल्म देखते ही कह उठते हों कि इस फिल्म के लिए पैसे वापस करने चाहिए. आज हम आपके लिए ऐसी ही फिल्में की लिस्ट लेकर आए हैं जिनके लिए कहा जा सकता है कि 'मेरे पैसे वापस करो.'

1- दिलवाले

अगर इंग्लिश बाबू देसी मेम और राम-जाने को मिलाकर उसे टाइम मशीन से सत्तर के दशक में पहुंचाकर एडवुड और कांति शाह से उसकी पटकथा लिखवाकर फ़ोटोस्टूडियो में शूट किया जाए और फिर उसमें मैं प्रेम की दीवानी हूं का जीन इंजेक्शन से डाला जाए तो जो फिल्म सामने आएगी वो भी शाहरुख़ ख़ान की 'दिलवाले' का मुक़ाबला नहीं कर पाएगी. रोहित शेट्टी सालों से कार-पोर्न और मिडियॉकर फिल्मों के स्टार निर्देशक रहे हैं. ये फिल्म भी उनकी छवि के अनुरूप ही है.

Dilwale

ये अलग बात है कि शाहरुख़ ख़ान और काजोल को अपने दिलो-दिमाग़ को जवाब देने के लिए कई रातें बगैर सोये गुजारनी पड़ी होगी क्योंकि "सबके पास दिल है लेकिन सब दिलवाले नहीं होते."

2- प्रेम रतन धन पायो

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सूरज बड़जात्या की ये फिल्म अट्ठारहवीं सदी की परिकथा लगती है. मैं सोच रहा हूं कि अगर कानू बहल की तितली को बड़जात्या स्टाइल में बनाया जाता तो वो क्या बनती? मुझे लगता है कि ये जबरदस्त अस्तित्ववादी हॉरर फिल्म बनेगी.

कल्पना कीजिए कि शीशमहल में अपने ही अक्स से घिरे रणवीर शौरी कैसे लगेंगे? या अपनी चचेरी बहन राजकुमारी चंद्रिका के आधी जायदाद मांगने पर शौरी कैसे बरताव करेंगे? ये तो कल्पना होगी हक़ीक़त ये है कि इस फिल्म में सलमान ख़ान का किरदार उनके निजी जीवन के दोहरे व्यक्तित्व (एक कोर्ट वाला दूसरा बीइंग ह्यमून वाला) का ही प्रतीक नज़र आता है.

3- ब्रदर्स

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ब्रदर्स के निर्देशक करन मल्होत्रा को ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं थी. उन्हें गेविन ओ कोनोर के वैरियर की स्टाइल को हीरो वाले जैकी श्राफ के साथ उतार देना था. लेकिन उन्होंने किया कुछ और. उन्होंने स्वर्ग के राजेश खन्ना और यादें केे जैकी श्राफ का कॉकटेल बना दिया. नतीजा ये हुआ कि हिंदी सिनेमा को बॉक्सिंग/फाइटिंग पर बनी शायद अब तक की सबसे घटिया फिल्म झेलनी पड़ी.

इस फिल्म में एक मात्र राहत राज जुत्सी हैं. सिद्धार्थ मल्होत्रा ने फिल्म में जो किया है उसे देखकर टॉम हार्डी को चक्कर आ जाता है.

4- अलोन

bipasha basu alone

रागिनी (एमएमएस-2) के निर्देशक भूषण पटेल ने बिपाशा बसु की आहों और कराहों से भरी ये फिल्म इस साल जनवरी में बनायी थी. हॉरर फ़िल्मों का पहले ही भारत में डरावना हाल है. भूषण पटेल ने कुछ अलग करने की कोशिश में उसी हिरोइन को लिया जिसे राज़(2002) के बाद से ही ऐसी हर फिल्म में ज्यादातर डॉयरेक्टर ले रहे हैं. फिल्म दर्शकों को डराने में तो कामयाब नहीं हुई शायद भूतों को इसने जरूर डराया होगा.

इस फिल्म के निर्देशक ने हर पिटे हुए फार्मुले का प्रयोग करते हुए एक ऐसी फिल्म बनायी है जो बॉलीवुड को सालों तक डराती रहेगी. इस फिल्म के बाद शायद बिपाशा बसु का करियर भी कब्र में दफन हो जाए.

5- हमारी अधूरी कहानी

humari adhuri kahani film

विद्या बालन को इस फिल्म में देखकर राखी की मां के रोल वाली शुरुआती फिल्में (राम लखन से लेकर करन अर्जुन तक) याद आ गयीं. कुल मिलाकर वो फिल्म में बेहतर एक्टिंग की कोशिश करती नजर आयी हैं. फूलों, आंसुओं और सुनहरी धूप में डूबी उनकी आवाज़ दर्शकों में शायद ही कोई भाव जगा पायी.

फिल्म में नायिका का पति (राजकुमार राव) आतंकवादी बन जाता है. दूसरी तरफ एक अरबपति (इमरान हाशमी) का दिल उसपर आ जाता है. बस उसके बाद दर्शकों के हाथ आती है हमारी अधूरी कहानी.

विशेष उल्लेख

  • हेट स्टोरी-3 को किसी भी सूची में शामिल करना नफरत फैलाना होगा.
  • निखिल आडवाणी की हीरो दो स्टार किड्स को लॉन्च करने के लिए बनायी गयी रीमेक
  • निखिल आडवाणी की कट्टी बट्टी सठियाई हुई प्रेम कहानी
  • गब्बर इज बैक - अक्षय कुमार की खराब फिल्मों की लिस्ट में नया नाम
  • हवाईज़ादे- भंसाली की स्टाइल में बनी हुई बुरी फिल्म
  • किस किसको प्यार करूं- कपिल शर्मा का महिलाविरोधी जहन
  • तेवर- राज बब्बर की रिटायरमेंट की सवारी
  • शानदार- विकास बहल का फौरी पागलपन
  • एक पहेली लीला- सनी लियोन का 'अभिनय'
  • आल इज वेल- अभिषेक बच्चन की आखिरी आवाज़
  • मिस्टर एक्स- हॉलो मैन को एक खोखली श्रद्धांजलि
  • कैलेंडर गर्ल- मधुर भंडारकर की अब तक की सबसे बुरी फिल्म

नोट

बी-ग्रेड की नगीना फिल्म सबकी बजेगी बैंड, एमएसजी(1 और 2) मॉनसून, मुंबई कैन डांस साला, जय जवान जय किसान, बरखा हे ब्रो, डर्टी पोलटिक्स, दिल्लीवाली ज़ालीम गर्लफ्रेंड, हम बाजा बजा देंगे, इश्क के परिंदे, पैसे हो पैसा, थोड़ा लुत्फ थोड़ा इश्क और सॉरी डैडी जैसी फिल्मों को अलग रखकर ऊपर की लिस्ट बनायी गयी है.

First published: 26 December 2015, 0:13 IST
 
राहुल देसाई @ReelReptile

Rahul Desai is a full-time Federer enthusiast and avid traveller who absolutely must find a way to reach Europe once a year. In his spare time, he reviews films, aspires to own a swimming pool and whines about the lack of palatable food in Mumbai.

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