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एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी बनीं फैशन आइकॉन

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 January 2016, 9:14 IST
QUICK PILL
  • वीवा एन दीवा नामक ब्रांड ने एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी सा को अपने डिजाइनर कपड़ों का नया मुखड़ा बनाते हुए \"फेस ऑफ करेज\" नाम से नया प्रमोशनल कैंपेन शुरू किया है.

बदलते फैशन के साथ फैशन आइकॉन भी तेजी से बदलते हैं. अब एक देसी फैशन रिटेल ब्रांड ने सराहनीय प्रयास करते हुए कपड़ों के जरिये लोगों की सोच बदलने की शुरुआत की है. वीवा एन दीवा नामक ब्रांड ने एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी सा को अपने डिजाइनर कपड़ों का नया मुखड़ा बनाते हुए इसे "फेस ऑफ करेज" का नाम दिया है.

आज 32 वर्षीय लक्ष्मी एसि़ड पीड़ितों की अगुवा चेहर बन चुकी है. जब वो मात्र 15 साल की थी तब शादी से इनकार करने पर एक युवक ने उनके ऊपर तेजाब डाल दिया था. उस डरावने समय को याद करते हुए वो कहती हैं, "पहले तो यह बहुत ठंडा लगा. इसके बाद मुझे बहुत तेज जलन महसूस होने लगी. फिर इसने मेरे त्वचा को गला दिया."

इसके बाद से लक्ष्मी देश में बिना किसी नियम के बिकने वाले एसिड (तेजाब) की बिक्री के विरोध में पूरे जोश और दलीलों के साथ सामने आईं. उन्होंने एसिड अटैक करने वालों के खिलाफ सख्त नियम बनाए जाने के लिए भी अभियान चलाया. 

बीबीसी को दिए साक्षात्कार में उन्हें कहा, "परिधानों के एक ब्रांड का प्रतिनिधित्व करने से मुझे यह मौका मिला कि मैं शारीरिक रूप-रंग के बगैर अपने जैसी महिलाओं के लिए आत्मविश्वासी और साहसी होने का एक सशक्त उदाहरण पेश कर सकूं. इस मंच से मैं शारीरिक रूप-रंग को एसिड से बर्बाद करने वाले अपराधियों को यह सीधा संदेश भी देना चाहती हूं कि इन हमलों के बाद भी महिलाएं अपना आत्मविश्वास नहीं खोएंगी."

एसिड सर्वाइवर्स ट्रस्ट इंटरनेशनल के एक अनुमान के मुताबिक केवल भारत में ही प्रतिवर्ष 1,000 एसिड अटैक की घटनाएं होती हैं. इनमें से तमाम की जानकारी ही नहीं मिलती. इतना ही नहीं, देश में इन हमलावरों को सजा देने के लिए कोई विशेष कानून भी नहीं है.

हालांकि, 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने लक्ष्मी की याचिका पर राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे कि वे देश में खुले में बिकने वाले तेजाब के संबंध में नीति बनाएं. 

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वीवा एन दीवा

वीवा एंड दीवा कंपनी के मुताबिक उन्होंने लक्ष्मी को इसलिए चुना ताकि वो फैशन और सुंदरता के बारे में लोगों के दृष्टिकोण को बदल पाएं और यह जागरूकता फैला सकें कि सुंदरता हकीकत में शारीरिक रूप-रंग से भी परे है. 

लक्ष्मी कहती हैं, "समस्या केवल पीड़ित बनने तक ही सीमित नहीं है. बल्कि समाज द्वारा आपको पीड़ित बनाने की है. हमारे साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है जैसे हम बेकार हैं और हमारा जीवन व्यर्थ है."

वीवा एन दीवा के सह संस्थापक रूपेश झावर के मन में इस अभियान का विचार तब आया जब उन्होंने एसिड अटैक में बची पीड़िताओं का कैलेंडर देखा. 

First published: 17 January 2016, 9:14 IST
 
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