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जब हीरो के साथ भाग गई थी डायरेक्टर की पत्नी, बाद में मिला इस 'ड्रीम गर्ल' को 'पद्मश्री'

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 March 2019, 10:11 IST

आज भारत की पहली ड्रीम गर्ल और पहली अभिनेत्री देविका रानी का जन्मदिन है. देविका रानी अपनी दिलकश अदाओं से तीस की दौर की मशहूर अभिनेत्रियों में से एक थी. इनका जन्म विशाखापट्टनम में 30 मार्च 1908 को हुआ था. अपने दौर की ये हिट अभिनेत्रियों में से एक रही हैं.

काफी संघर्ष के बाद इन्होंने ये मुकाम हासिल किया था. एक सफल मुकाम के साथ देविका रानी की जिंदगी का सफर काफी विवादों में भी रहा है. देविका को पढ़ाई के लिए 9 साल की उम्र में इंग्लैंड भेज दिया गया. अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद देविका भारत लौटकर फिल्मों में अपना नाम कमाना चाहती थीं, लेकिन परिवार में उनकी इस बात का काफी विरोध हुआ.

देविका रानी के पिता का नाम कर्नल एमएन चौधरी था, जो एक बंगाली परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनका परिवार काफी समृद्ध था. देविका ने ऐसे समय में फिल्मों में काम करने का निर्णय लिया था, जिस दौर में महिलाओं को फिल्मों में आना अच्छा नहीं माना जाता था.

इन सभी के बावजूद देविका रानी ने सभी फिल्मों में एंट्री की. फिल्मों में एंट्री लेने के दौरान उनकी मुलाकात उस दौर के प्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर हिमांशु राय से हुई. पहली ही नजर में हिमांशु देविकारानी की खूबसूरती के इतने कायल हो गए. हिमांशु ने देविका को साल 1933 में आई फिल्म 'कर्म' देविका को ऑफर कर दी. इस प्रस्ताव को देविका ने भी स्वीकार कर लिया.

इस फिल्म में हिमांशु ही देविका के हीरो थे. उस दौर की ये ऐसी पहली फिल्म थी, जिसमें इंग्लिश के डायलॉग का भी काफी इस्तेमाल किया गया था. अपनी पहली फिल्म से देविका रानी ने धमाल मचा दिया. देविका ने अपनी पहली फिल्म में ही 4 मिनट तक का लंबा किस सीन दिया. ये उस समय का सबसे लंबा किस सीन था. फिल्म के इस सीन में देविका रानी की हर जगह आलोचना हुई. इस फिल्म को बैन करने की भी मांग की गई. इसके बाद हिमांशु ने देविका से शादी कर ली.

देविका रानी की शादीशुदा जिंदगी में तब भूचाल आया, जब उन्होंन साल 1936 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान फिल्म के हीरो नजमुल हुसैन गायब हो गई. इस फिल्म की शूटिंग बीच में ही रोक दी गई. इसके बाद हीरो और हीरोइन की काफी तलाश की गई.

काफी तलाशी के बाद दोनों कोलकाता में मिले. बाद में पता चला की दोनों शआदी करने के लिए भाग गए थे. देविका अपने पति हिमांशु को छोड़ना चाहती थी और नजमुल के साथ शादी करना चाहती थीं. इस घटना के बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हुई. इस फिल्म में देविका रानी हीरोइन रहीं, लेकिन नजमुल को फिल्म से निकाल दिया गया.

इस फिल्म का नाम जीवन नैया था. नजमुल को फिल्म से बाहर निकाले जाने के बाद अशोक कुमार की इस फिल्म में एंट्री हुई. इसके बाद साल 1936 में आई फिल्म ‘अछूत कन्या’ में देविका रानी ने दलित लड़की का किरदार काफी दमदार तरीके से पेश किया. अपनी इस बेहतरीन अदाकारा के लिए देविका रानी को काफी सराहा गया. देविका रानी एक अभिनेत्री के साथ-साथ एक गायिका भी थीं.

‘अछूत कन्या’ में उन्होंने अपनी आवाज दी है. इस फिल्म के बाद उन्हें 'फर्स्ट लेडी ऑफ इंडियन स्क्रीन' की उपाधि से भी सम्मानित किया गया. दिलीप कुमार और अशोक कुमार को फिल्म इंडस्ट्री में लाने का श्रेय देविका रानी को ही जाता है.

देविका रानी को फिल्म में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए साल 1969 (उनहत्तर) में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. ये पुरस्कार हासिल करने वाली पहली महिला थीं. इसके साथ ही पद्मश्री से भी इन्हें नवाजा गया. बेंगलुरु में 9 मार्च को इनका निधन हो गया.

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First published: 30 March 2019, 10:11 IST
 
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