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बिग बी ने ब्लॅाग पर लिखा अपना दर्द, 'विनोद खन्ना पर ग्लास फेंकने का आजीवन रहेगा अफसोस...'

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 April 2017, 15:29 IST

70 और 80 के दशक में अमिताभ बच्‍चन और विनोद खन्ना के अभिनय का हर कोई कायल था. दोनों की एक समान कद काठी और एक्शन हीरो के अंदाज से कोई भी अछूता नहीं था. निर्माता और निर्देशकों में भी दोनों को अपनी फिल्मों में लेने की होड़ सी लगी रहती थी. अपनी दोस्ती को याद करते हुए अमिताभ बच्चन ने कर्इ किस्से बताए हैं आैर विनोद खन्ना के साथ अपनी दोस्ती को जीवंत कर दिया है.

अमित जी लिखते हैं...

अचल... स्थिर... अनंतकाल के लिए बंद आंखें... लकड़ियों के गट्ठर पर... ढके हुए... आग की लपटों का घेरा.. और एक जीवन राख में तब्दील हो गया.

मैंने पहली बार उन्हें बांद्रा में सुनील दत्त के अजंता आर्ट्स के दफ़्तर में दाखिल होते देखा, जहां मैं काम की तलाश में पहुंचा था.... एक बहुत शानदार दिखने वाले युवा... गठीला शरीर... उनकी चाल में एक दबंगपन था... एक भद्र मुस्कान के साथ उन्होंने मेरी तरफ देखा... ये 1969 था... वो अजंता आर्ट्स की फिल्म 'मन का मीत' में काम कर रहे थे... मैं एक रोल पाने के लिए संघर्ष कर रहा था, कोई रोल... कहीं भी...

आगे लिखते हैं...
ये बहुत ही प्यारा साथ था... एक दूसरे के मेकअप रुम में वक्त बिताना, खाना एक साथ खाना... हर तरह की बातें करना... देर रात शूटिंग से पैकअप और आधी रात के बाद जुहू बीच पर ड्राइविंग, सिर्फ अपने निर्देशकों के साथ बैठने के लिए और उनके और मेरे एक ड्रिंक के लिए (उन दिनों मैं भी पीता था).

वो अपराध बोध वाली घटना जब एक सीन में मुझे उनकी तरफ एक ग्लास फेंकना था और दुर्घटनावश ये उनकी ठोढ़ी से टकराया, वो हिस्सा दांत तक कट गया... उस हादसे का मुझे आज तक अफसोस है...देर रात उन्हें डॉक्टर के पास ले जाना, टांके लगवाना, उन्हें घर तक पहुंचाना और उस ग़लती के लिए उनसे माफी मांगते रहना.

ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में उनसे अचानक मुलाकात जहां मैं एक दोस्त को देखने गया था, और वहां उनका ग़ुस्सा और चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखीं, उन्हें अपने करीबी रिश्तेदार की मोटरबाइक से हुए हादसे की जानकारी मिली थी, वो अपनी ज़िंदगी की ज़ंग लड़ रही थीं और वो उनके साथ रहना चाहते थे. 

...और आज शाम 48 साल का ये साथ आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया.
ये शख्स... बेशुमार ऊर्जा वाला ये मददगार शरीर... ये दोस्त... ये साथ काम करने वाला शख्स... हमेशा मुस्कुराहट बांटने वाला व्यक्ति, अस्थिर लेटा है. उनकी तरह किसी की चाल नहीं थी.... भीड़ भरे कमरे में उनकी मौजूदगी की तरह असर किसी और का नहीं था... वो जिस तरह अपने आसपास के माहौल को रोशन कर देते थे कोई नहीं कर सकता था... उनके जैसा... कोई नहीं.. 

First published: 29 April 2017, 15:29 IST
 
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