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ख्वाहिशः गर्व होगा अगर अमिताभ बच्चन नहीं बल्कि नाव्या-आराध्या के दादा के नाम से पहचाने दुनिया

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 September 2016, 14:59 IST

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन की भी एक ख्वाहिश है. बिग बी की यह ख्वाहिश एक पत्र में पता चली जो उन्होंने शिक्षक दिवस से एक दिन पहले अपनी नातिन नव्या और पोती आराध्या को लिखा. इसमें अमिताभ ने उनसे कहा है कि वे दोनों अपनी जिंदगी अपने तरीके से जिएं.

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अमिताभ ने अपनी नातिन और पोती को एक खुला खत लिखा है. इसमें अमिताभ ने नातिन नव्या और पोती आराध्या को अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीने और अपने परिवार का नाम रोशन करने की सलाह दी है. अमिताभ ने दोनों को पत्र में कहा है कि वे कभी भी इस बात की बिल्कुल चिंता न करें कि लोग क्या कहेंगे.

जानिए अमिताभ ने अपने पत्र में क्या खास बातें लिखी हैंः

  • आराध्या तुम्हारा बच्चन सरनेम तुम्हारे परदादा डॉ हरिवंशराय बच्चन की देन है और नव्या को उसके परदादाजी एचपी नंदा की. तुम दोनों के कंधों पर उनकी दी हुई विरासत को संभाल कर ले चलने की जिम्मेदारी है. तुम दोनों के परदादाजी ने तुम्हें सरनेम, प्रसिद्धी, सम्मान और पहचान दी है.
  • तुम चाहे सरनेम से नंदा हो या बच्चन, लेकिन तुम लड़कियां/महिला भी हो. और क्योंकि तुम महिलाएं हों इसलिए लोग तुम पर अपनी सोच और उनकी तय की हुई पाबंदियां थोपेंगे. वे तुम्हे बताएंगे क्या पहनना है, कैसे बिहेव करना है, तुम किससे मिल सकती हो और तुम कहां जा सकती हो. लेकिन तुम्हें लोगों की राय से जिंदगी नहीं जीनी है. अपने विवेक से खुद अपनी पसंद तय करनी है.
  • किसी को भी ये राय बनाने का मौका मत देना कि तुम्हें किससे दोस्ती करनी है और तुम्हारा दोस्त कौन बन सकता है. जब तक तुम शादी करना नहीं चाहो तब तक किसी भी दबाव या कारण से शादी नहीं मत करना. लोग बातें बनाएंगे. वे कुछ ऐसी बातें बोलेंगे कि भय लगे. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि तुम्हें हर किसी की बात सुननी है. कभी इस बात की चिंता नहीं करना कि लोग क्या कहेंगे.
  • अंतत: तुम्हे ही अपने किए हुए कि परिणामों का सामना करना है इसलिए लोगों को अपने बारे में निर्णय लेने की अनुमति मत देना. नव्या: तुम्हारे नाम को विशेष बनाने वाला तुम्हारा सरनेम कभी तुम्हारी उन परेशानियों से बचाव नहीं कर पाएगा जो तुम्हें महिला होने की वजह से झेलनी पड़ेंगी. आराध्या: जब तक तुम इन चीजों को देखना और समझना शुरू करोगी तब तक हो सकता है कि मैं तुम्हारे आस-पास ना रहूं. लेकिन मैं समझता हूं कि जो मैं आज कह रहा हूं वो तब भी प्रासंगिक रहेगा.
  • हो सकता है कि महिलाओं के लिए इस जमाने में बहुत मुश्किलें हैं. लेकिन मेरा विश्वास है कि तुम जैसी महिलाएं इसे बदलेंगी. स्वयं की मर्यादाएं बनाना, अपनी पसंद के हिसाब से चलना और लोगों की राय से उपर उठना आसान नहीं होगा. लेकिन तुम दोनों महिलाओं के लिए उदाहरण पेश कर सकती हो. 
  • बस ये कर लो और तुम उतना कर लोगी जितना मैंने भी नहीं किया है. और ये मेरे लिए सम्मान की बात होगी कि मैं अमिताभ बच्चन के नाम से नहीं बल्कि तुम्हारे दादा के नाम से जाना जाऊं.

First published: 6 September 2016, 14:59 IST
 
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