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बर्थडे स्पेशल: बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत ग़जल 'मधुबाला'

आकांशा अवस्थी | Updated on: 14 February 2018, 14:34 IST

हुस्न, दिल और दर्द की मुकम्मल दास्तान का नाम था मधुबाला. दिल्ली आकाशवाणी में बच्चों के एक कार्यक्रम के दौरान संगीतकार मदनमोहन के पिता ने जब मुमताज़ को देखा तो पहली ही नज़र में उन्हें वो भा गईं, जिसके बाद बॉम्बे टॉकीज की फ़िल्म 'बसंत' में एक बाल कलाकार की भूमिका मुमताज़ को दी गई. जैसे नियति ने तय कर दिया था कि इस बच्ची का जन्म अभिनेत्री बनने के लिए ही हुआ है. एक बाल-कलाकार से लेकर एक आइकॉनिक अभिनेत्री तक का सफ़र तय करने वाली मधुबाला की जीवन यात्रा अविस्मरणीय रही है.

'मुगल-ए-आज़म' की अनारकली यानी मधुबाला का जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था. महज 36 साल की उम्र में ही इस दुनिया के रंगमंच से अपना किरदार निभा कर विदा लेने से पहले मधुशाला ने अपने अभिनय से हिंदी सिनेमा के आकाश पर एक ऐसी अमिट छाप छोड़ी.

मधुबाला को पहली बार हीरोइन बनाया डॉयरेक्टर केदार शर्मा ने. फ़िल्म 'नीलकमल' में राजकपूर उनके हीरो थे. इस फ़िल्म मे उनके अभिनय के बाद से ही उन्हे 'सिनेमा की सौन्दर्य देवी' (Venus Of The Screen) कहा जाने लगा. लेकिन, उन्हें बड़ी सफलता और लोकप्रियता फ़िल्म 'महल' से मिली.

राजकपूर के रिश्तेदार थे  मधुबाला का पहला प्यार

बॉलीवुड के सभी एक्टर जिस पर दिल छिड़कते थे, पर मधुबाला का सबसे पहला प्यार थे राजकपूर के साले प्रेमनाथ. हालांकि, इस लव स्टोरी में धर्म की दीवार आ गई. दिलीप कुमार से पहले राजकपूर के साले प्रेमनाथ से भी मधुबाला का अफेयर चला था. दोनो ने बादल,आराम और साकी जैसी फिल्मों में साथा काम किया था. इस दौरान प्रमेनाथ और मधुबाला की नजदीकियां बढ़ गई थीं. दोनों शादी करना चाहते थे. यहां तक कि दोनों स्टार्स 6 महीने तक एक साथ थे.

प्यार के बीच आयी धर्म की दीवार

मधु बाला की लव स्टोरी का यह पहला चैप्टर धर्म के आधार पर बंद हो गया. मधुबाला दरअसल मुस्लिम थीं और पठान परिवार से थीं. जब मधुबाला और प्रेमनाथ का 6 महीने का रिश्ता शादी की तरफ बढ़ा, प्रेमनाथ के सामने धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनने की शर्त रखी गई जिससे उन्होंने इनकार कर दिया. मधुबाला ने भी झुकने से मना कर दिया और यह रिश्ता टूट गया. बाद में मधुबाला ने किशोर कुमार से शादी की और ये रिश्ता मरते दम तक रहा.

दिलीप कुमार ने जब सरे आम कहा, 'मैं मधुबाला से प्यार करता हूं'

साल 1951 में आई फिल्‍म में दिलीप कुमार और मधुबाला ने फिल्‍म 'तराना' की शूटिंग के दौरान की मधुबाला ने अपने प्‍यार का इजहार अनोखे अंदाज में कर दिया.  उन्‍होंने अपने करीबी मेकअप आर्टिस्‍ट के हाथों दिलीप कुमार को एक खत भेजा, जिसमें लाल गुलाब भी था. उर्दू में लिखे गये इस खत में मधुबाला ने लिखा था, 'अगर आप मुझे चाहते हैं तो ये गुलाब कबूल फरमाइए...वरना इसे वापस कर दीजिये.' मधुबाला की मोहब्‍बत के पैगाम को दिलीप कुमारने क़ुबूल किया और दोनों का प्‍यार परवान चढ़ने लगा.

बात उस समय बिगड़ी जब बीआर चोपड़ा मधुबाला और दिलीप कुमार को लेकर फिल्म 'नया दौर' की शूटिंग कर रहे थे. चोपड़ा भोपाल के पास दिलीप और मधुबाला के साथ आउटडोर शूटिंग करना चाहते थे. लेकिन अताउल्ला खान (मधुबाला के पिता) इसके लिए राजी नहीं हुए. इसका कारण यही माना गया कि खान मधुबाला और दिलीप कुमार के रोमांस के डर से उन्हें आउटडोर शूटिंग की इजाजत नहीं दे रहे हैं.

चोपड़ा ने मधुबाला की जगह वैजयंतीमाला को साइन कर लिया और मधुबाला की कट लगी तस्वीर अखबार में छपवा दी. जवाब में खान ने भी मधुबाला की सभी फिल्मों के नाम लिखकर 'नया दौर' के आगे कट लगाकर इसे अखबार में छपवा दिया. मामला इतना बिगड़ा कि कोर्ट तक पहुंच गया.

बाद में जब सुनवाई के दौरान दिलीप कुमार की गवाही हुई तो उन्होंने कोर्ट में कहा, हां, 'मैं मधु से प्यार करता हूं और करता रहूंगा.' इसके साथ ही इस प्रेम कहानी का अंत हो गया. बाद में दोनों पहले से चल रही फिल्म मुगले आजम की शूटिंग जरूर करते रहे, लेकिन एक-दूसरे से बातचीत बंद कर दी.

किशोर कुमार से शादी और मौत

कई बार दिल टूटने के बाद आखिर में मधुबाला का इश्क़ मुकम्मल होने की और बढ़ा ही था की कुदरत ने फिर से उनके साथ धोखा किया और उन्हें दिल की बीमारी हो गयी. 1960 के दशक में मधुबाला ने किशोर कुमार से शादी कर ली. शादी से पहले किशोर कुमार ने इस्लाम धर्म कबूल किया और नाम बदलकर करीम अब्दुल हो गए. उसी समय मधुबाला एक भयानक रोग से पीड़ित हो गई. शादी के बाद रोग के इलाज के लिए दोनों लंदन चले गए. लंदन के डॉक्टर ने मधुबाला को देखते ही कह दिया कि वह दो साल से ज्यादा जीवित नहीं रह सकतीं.

 डॉक्टर भी इस रोग के आगे हार मान गए और कह दिया कि ऑपरेशन के बाद भी वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाएंगी. इसी दौरान उन्हें अभिनय छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाया. वर्ष 1969 में उन्होंने फिल्म 'फर्ज' और 'इश्क' का निर्देशन करना चाहा, लेकिन यह फिल्म नहीं बनी और इसी वर्ष अपना 36वां जन्मदिन मनाने के नौ दिन बाद 23 फरवरी,1969 को बेपनाह हुस्न की मलिका दुनिया को छोड़कर चली गई.

First published: 14 February 2018, 13:40 IST
 
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