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जब ख़त्म होते स्टारडम को बचाने पैदल चलकर काम मांगने गए अमिताभ बच्चन

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 October 2017, 12:57 IST

11 अक्टूबर को अमिताभ बच्चन 75वां बर्थडे सेलि‍ब्रेट कर रहे हैं. गंगा किनारे के इस छोरे का जन्म इलाहाबाद में हुआ था. लेकिन जब हिंदी सिनेमा के सुनहरे पन्ने पल्टे जाएंगे बाॅलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का नाम सबसे पहले होगा. एंग्री यंग मैन बिग बी का ये सफर आसान नहीं रहा, जानें उनके जीवन से जुड़े अनजाने किस्साें के बारे में...

 

कलकत्ता में 800 रूपए मासिक वेतन पर किया काम
अमिताभ बच्चन ने मुंबई में फिल्मों में किस्मत आजमाने से पहले कोलकाता में रेडियो एनाउंसर और एक शिपिंग कंपनी में एक्ज़ीक्यूटिव के तौर भी काम किया था. उस दौरान उन्हें 800 रुपये मासिक वेतन मिला करता था. वर्ष 1968 में कलकत्ता की नौकरी छोड़ने के बाद मुंबई आ गए.

मुंबई आते वक्त उनके पास तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, जो अमिताभ के मित्र राजीव गांधी की मां भी थीं, का लिखा सिफारिशी खत भी था, जिसकी बदौलत उन्हें के.ए.अब्बास की फिल्म 'सात हिन्दुस्तानी' में काम मिला. अमिताभ बच्चन मुंबई में अपने शुरुआती दिनों में प्रसिद्ध हास्य कलाकार तथा निर्माता-निर्देशक महमूद के घर पर रहे थे, और बाद में उन्होंने महमूद की फिल्म 'बॉम्बे टु गोवा' में काम भी किया.

दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को हरा दिया
1984 में भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन इंदिरा के पुत्र और अपने मित्र राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में शामिल हुए थे. उन्होंने इलाहाबाद की लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर 'भारतीय राजनीति के चाणक्य' कहे जाने वाले दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को पराजित किया था.

12 फिल्मों में किया डबल रोल
अमिताभ बच्चन ने लगभग 12 फिल्मों में डबल रोल किया है. इतना ही नहीं एक फिल्म निर्देशक एस. रामानाथन की 'महान' में उन्होंने तिहरी भूमिका यानी ट्रिपल रोल किया है. अमिताभ बच्चन ने पहली बार 'मिस्टर नटवरलाल' के गीत 'मेरे पास आओ मेरे दोस्तों...' गीत के लिए अपनी आवाज दी थी.

1980 के दशक में अमिताभ बच्चन के चेहरे को लेकर एक कॉमिक्स चरित्र 'सुप्रीमो' की रचना की गई थी, जिसकी सिरीज़ का नाम ही 'द एडवेन्चर्स ऑफ अमिताभ बच्चन' (किस्से अमिताभ बच्चन के) रखा गया था. यह कॉमिक्स श्रृंखला लगभग दो साल तक प्रकाशित होती रही.

जब अमिताभ गंभीर रूप से घायल हो गए थे
फिल्म 'कुली' की शूटिंग के दौरान फिल्म में खलनायक की भूमिका निभा रहे पुनीत इस्सर के हाथों पंच खाकर घायल होने के बाद जब अमिताभ बच्चन बेहद गंभीर स्थिति में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाधी उन्हें देखने अस्पताल आई थीं. उस दौरान उनकी पत्नी जया बच्चन रोज़ाना ब्रीच कैंडी अस्पताल से सिद्धि विनायक मंदिर तक पैदल जाया करती थीं, जो लगभग छह किलोमीटर है. इसके अलावा उन दिनों देशभर में उनके हज़ारों-लाखों प्रशंसक मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों में प्रार्थनाएं करते रहे थे.

अमिताभ को यूं ही बॉलीवुड का शहंशाह नहीं कहा जाता है. जब 2000 के शुरुआती सालों में शाहरुख, सलमान, अक्षय और आमिर जैसे हीरो अमिताभ की छोड़ी जमीन पर पांव जमाने की कोशिश कर रहे थे तब अमिताभ बच्चन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक और मील का पत्थर स्थापित कर रहे थे.

यह वह दशक भी था जब एक बार फिर बॉलीवुड की फिल्मों के किरदार अमिताभ को फ्रेम में रखकर लिखे गए. 'कौन बनेगा करोड़पति' जैसा हिट शो देने वाले अमिताभ ने टीवी और फिल्मों के बीच की दूरी मिटा दी. कहा जाता है कि जब केबीसी टीवी पर आना शुरू हुआ तो शाम होते होते सड़कें खाली हो जाती थी. लोग घरों के अंदर टीवी पर नजर गड़ाए बैठे होते थे. इससे पहले ऐसा सिर्फ टीवी पर दिखाई जाने वाली महाभारत और रामायाण के जमाने में हुआ करता था.

ये वो दशक था जब अमिताभ ने फिल्मों से लेकर छोटे पर्दे तक को अपना बना लिया. उनके बारे में एक प्रसिद्ध किस्सा है कि वो परेशानी के दौर में खुद यश चोपड़ा से पैदल चलकर काम मांगने गए थे. उनकी यश चोपड़ा से इस मुलाकात ने बॉलीवुड को ' मोहब्बतें' जैसी फिल्म दी थी.

First published: 10 October 2017, 12:57 IST
 
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