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जन्मदिन विशेष: हिंदी सिनेमा के पहले सदाबहार एक्टर कुमुद कुमार गांगुली उर्फ अशोक कुमार

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST
(एजेंसी)

हिंदी सिनेमा के पहले सदाबहार अभिनेता अशोक कुमार का फिल्मों के प्रति झुकाव बचपन से ही था. हालांकि खुद अशोक कुमार ने कभी सोचा नहीं था कि उन्हें बतौर एक्टर पहली फिल्म इस कारण से मिलेगी कि उस फिल्म के हीरो की तबियत खराब हो जाएगी.

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के कुमुद कुमार गांगुली उर्फ दादामुनि उर्फ अशोक कुमार का जन्म बिहार के भागलपुर शहर में 13 अक्टूबर, 1911 को एक मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था.

उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मध्य प्रदेश के खंडवा शहर से पूरी की. वो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट थे.

अशोक कुमार ने हिंदी सिनेमा में पहली बार एंटी हीरो की भूमिका भी निभाई थी. उन्होंने फिल्म 'किस्मत' में एंटी हीरो की भूमिका निभाई थी. इस फिल्म ने कलकत्ता के 'चित्रा' थिएटर सिनेमा हॉल में लगातार 196 सप्ताह तक चलने का रिकॉर्ड बनाया.

साल 1934 में न्यू थियेटर में बतौर लेबोरेटरी असिस्टेंट काम कर रहे अशोक कुमार को बॉम्बे टॉकीज मे काम कर रहे उनके बहनोई शशाधार मुखर्जी ने अपने पास बुला लिया.

वर्ष 1936 में बॉम्बे टॉकीज की फिल्म 'जीवन नैया' के निर्माण के दौरान फिल्म के मुख्य अभिनेता बीमार पड़ गए. तब बॉम्बे टाकीज के मालिक हिंमाशु राय का ध्यान अशोक कुमार पर गया और उन्होंने अशोक कुमार से फिल्म में बतौर अभिनेता काम करने की गुजारिश की. इसके साथ ही 'जीवन नैया' से अशोक कुमार का बतौर अभिनेता फिल्मी सफर शुरू हो गया.

वर्ष 1939 में प्रदर्शित फिल्म कंगन, बंधन और झूला में अशोक कुमार ने लीला चिटनिस के साथ काम किया. इन फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया. इसके साथ ही फिल्मों की कामयाबी के बाद अशोक कुमार बतौर अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए.

अशोक कुमार ने बिमल रॉय के साथ वर्ष 1963 में प्रदर्शित फिल्म 'बंदिनी' में काम किया और यह फिल्म हिन्दी फिल्म इतिहास की क्लासिक फिल्मों में शुमार की जाती है.

वर्ष 1958 में प्रदर्शित फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' में उनके अभिनय के नए आयाम दर्शकों को देखने को मिले. हास्य से भरपूर इस फिल्म में अशोक कुमार अपने दो छोटे भाइयों किशोर कुमार और अनुप कुमार के साथ काम किया था.

वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म 'आशीर्वाद' में अपने बेमिसाल अभिनय के लिए वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किए गए. इस फिल्म में उनका गाया गीत 'रेल गाड़ी रेल गाड़ी' बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ.

इसके बाद वर्ष 1967 में प्रदर्शित फिल्म 'ज्वैलथीफ' में उनके अभिनय का नया रूप दर्शकों को देखने को मिला.

वर्ष 1984 में दूरदर्शन के इतिहास के पहले सोप आपेरा 'हमलोग' में आशोक सूत्रधार की भूमिका में नजर आए. इसके बाद दूरदर्शन के लिए ही उन्होंने भीम भवानी, बहादुर शाह जफर और उजाले की ओर जैसे सीरियल में अभिनय किया.

अशोक कुमार को वर्ष 1988 में हिन्दी सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया. लगभग 60 सालों तक अपने अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाले अशोक कुमार का निधन 10 दिसंबर 2001 को मुंबई में हुआ.

First published: 13 October 2016, 11:48 IST
 
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