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सिनेमा को सहेजने वाले पीके नायर नहीं रहे

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया(एनएफएआई) के संस्थापक और पूर्व निदेशक पीके नायर का शुक्रवार को निधन हो गया. वो 82 वर्ष के थे. नायर 1991 में एनएफएआई से रिटायर हुए.

भारत की ऐतिहासिक महत्व की कई फिल्मों के संरक्षण का श्रेय नायर को दिया जाता है. उन्होंने लगभग आठ हजार भारतीय फिल्मों समेत करीब 12 हजार फिल्मों का संरक्षण किया था.

उन्होंने सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक, मृणाल सेन, वी शांताराम, राज कपूर और गुरु दत्त जैसे निर्देशकों की फिल्मों का संरक्षित किया.

उन्होंने इंगमार बर्गमैन, अकीला कुरोसावा, आंद्रे वाज्दा, विक्टिरियो डिसिका और फेदरिको फेलिनी जैसे विख्यात अंतरराष्ट्रीय निर्देशकों की फिल्मों को भी संरक्षित किया था.

उनके प्रयासों की वजह से ही भारतीय सिनेमा के पितामह माने जाने वाले दादा साहब फाल्के की राजा हरिश्चंद्र और कालिया मर्दन, बॉम्बे टाकीज की जीवन नैया, बंधन, कंगन, अछूत कन्या और किस्मत, एसएएस वासन की चंद्रलेखा और प्रसिद्ध नृत्य गुरु उदय शंकर की कल्पना जैसी फिल्में भावी पीढ़ियों को देखने के लिए उपलब्ध हो सकीं.

नायर का जन्म 1933 में केरल के तिरुअनंतपुरम में हुआ था. उन्होंने केरल यूनिवर्सिटी से साइंस की पढ़ाई की थी. जिसके बाद वो फिल्म निर्माण में करियर बनाने के लिए मुंबई (तब बॉम्बे) चले गए.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 1946 में फिल्मों के संरक्षण के लिए पुणे में एनएफएआई की स्थापना की थी. नायर के अथक प्रयासों से संस्थान फिल्म संरक्षण का अगुआ संस्थान बन गया.

फिल्म संरक्षक शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर ने उनके जीवन पर 'सेल्युलाइड मैन' नामक डाक्यूमेंट्री बनायी है. जिसे सर्वश्रेष्ठ जीवनवृत्त के लिए नेशनल अवार्ड मिला था.

First published: 4 March 2016, 3:49 IST
 
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