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ट्रांसजेंडर फिल्म द डेनिश गर्ल बिना काट छांट के पास: संस्कारी छवि से बाहर निकला सेंसर बोर्ड

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 January 2016, 8:35 IST
QUICK PILL
  • सेंसर बोर्ड द्वारा अपनी संस्कारी छवि को तोड़ने का पहला फायदा प्रसिद्ध ट्रांसजेंडर फिल्म द डेनिश गर्ल को मिला है. 
  • इस फिल्म में सेक्स से जुड़ी सामान्य और प्रचलित धारणा से अलग रुचि रखने वाले तमाम संवेदनशील यौन दृश्यों को बिना काटे दिखाने की अनुमति दे दी गई है.

नए साल में द सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) अपनी संस्कारी छवि से बाहर निकलता दिख रहा है. उदारवादी बदलाव की बयार सेंसर बोर्ड में चलती दिख रही हैं. 

सेंसर बोर्ड द्वारा अपनी संस्कारी छवि को तोड़ने का पहला फायदा प्रसिद्ध ट्रांसजेंडर फिल्म द डेनिश गर्ल को मिला है. इस फिल्म में प्रतिभाशाली अभिनेता एड्डी रैडमीन एक डेनिश कलाकार की भूमिका में हैं. जो अपनी पत्नी के प्रोत्साहन और सहायता से अपना लिंग परिवर्तन करा लेता है.

फिल्म में संभावित संवेदनशील यौन दृश्यों को सेंसर बोर्ड ने पास कर दिया है. ये दृश्य ऐसे हैं जिनपर कैंची चलने की पूरी संभावना थी. विशेषकर हाल ही में रिलीज हुई जेम्स बॉन्ड की फिल्म स्पेक्टर में चुंबन दृश्य हटाए जाने के बाद इसकी संभावना काफी बढ़ गई थी. द डेनिश गर्ल के दृश्य उससे कहीं ज्यादा खुलापन लिए हुए हैं. लेकिन बोर्ड के नए तेवर की वजह से इस फिल्म को बिना एक भी दृश्य काटे प्रदर्शन की अनुमति दे दी गई. फिल्म को केवल वयस्क प्रमाण पत्र के साथ रिलीज किए जाने को बोर्ड ने हरी झंडी दी है.

जाहिर है इस फिल्म में सेक्स से जुड़ी सामान्य और प्रचलित धारणा के विपरीत जाने वाले तमाम संवेदनशील यौन दृश्य हैं. पुराने दिशा निर्देशों के अनुसार इन्हें सेंसर कर दिया गया होता, लेकिन इन्हें बिना काटे दिखाने की अनुमति दे दी गई है.

निहलानी बताते हैं कि 2015 की सभी प्रमुख ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शायद ही कोई कांटछांट की गई थी

एक वेबसाइट को दिए गए बयान में पहलाज निहलानी कहते हैं, "हमारी छवि के विपरीत सीबीएफसी दिशा निर्देशों का आंख मूंद कर पालन नहीं करता है. 2015 में हम तमाम फिल्मों के लिए दिशा निर्देशों की सीमाओं से आगे गए. इनमें श्रीराम राघवन की बदलापुर और नवदीप सिंह की एनएच10 जैसी फिल्में भी शामिल थीं. दुर्भाग्यवश जिनकी मदद के लिए हमनें इन दिशा निर्देशों की सरहद को पार किया उन फिल्म निर्माताओं ने भी हमारे खिलाफ बयान दिए."

निहलानी बताते हैं कि 2015 की सभी प्रमुख ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शायद ही कोई काटछांट की गई थी. वो कहते हैं, "चाहे वो नीरज पांडेय की आतंकवाद विरोधी फिल्म बेबी हो या फिर भारत-पाक संबंधों पर बनी फिल्म बजरंगी भाईजान. या बीते साल की अन्य प्रमुख ब्लॉकबस्टर फिल्में जैसे तनु वेड्स मनु रिटर्न्स, बाजीराव मस्तानी और प्रेम रतन धन पायो, हमनें इन्हें तकरीबन बिना काटे ही प्रदर्शन की अनुमति दी."

सीबीएफसी के खिलाफ कुछ फिल्म निर्माताओं द्वारा की गई निंदा पर निहलानी कहते हैं, "जिन तीन फिल्म निर्माताओं को हमसे सबसे ज्यादा शिकायत है उनमें मुकेश भट्ट, प्रकाश झा और अनुराग कश्यप शामिल हैं. इनके द्वारा बनाई गई फिल्में सीबीएफसी में मेरे पदभार ग्रहण करने से काफी पहले से ही विवादों में रहती आई हैं."

उन्होंने कहा, "मुकेश भट्ट द्वारा हाल के दिनों में बनाई गई तकरीबन सभी फिल्मों में कटौती की सकती थी. उनकी बनाई गई फिल्मों मसलन दामूल से लेकर गंगाजल और प्रकाश झा की अपहरण से लेकर सत्याग्रह तक सभी का सेंसर विवाद में नाम सामने आया. अनुराग कश्यप की बात करें तो उनकी पहली फिल्म पांच अभी तक प्रतिबंधित है. इसलिए मेेरे ऊपर ही मजा किरकिरा करने का आरोप लगाती उंगली क्यों उठाई जा रही हैं?"

First published: 12 January 2016, 8:35 IST
 
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