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आप यह कह सकते हैं कि मैं पहाड़ों की बच्ची हूं: डेजी शा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 January 2016, 20:14 IST

फिल्म 'जय हो' के बाद 'हेटस्टोरी 3' में अपने बोल्ड अंदाज से सबको चौंका देने वाली 'डेजी शा' को घर में आराम फरमाना ज्यादा पसंद है. हां, मनाली ज़रूर उन्हें पसंद है. कैच हिंदी को डेज़ी ने बताया कि वे कितनी घुमक्कड़ हैं.

आपको घूमने-फिरने का शौक है?

काम के सिलसिले में देश विदेश घूमना हो तो अच्छा लगता है. लेकिन मुझे नहीं लगता की मैं उन लोगों में से हूं, जिन्हें ज्यादा छुट्टियां पसंद आती हैं. हमारा काम ऐसा है कि हमें आउटडोर शूटिंग के लिए बाहर जाना पड़ जाता है.  

मगर अंतत:  घर ही रास आता है. छुट्टी मिले तो मैं अपने घर पर आराम करूं. बिस्तर पर लेट कर टीवी देखूं और अपने परिवार और प्यारे कुत्ते के साथ समय बिताऊं.

कहीं घूमने की योजना बनाएंगी. वैसे कहां जाना चाहेंगी आप?

पता नहीं, लेकिन इन दिनों मुझे ख्याल आता रहता है की मैं मोरक्को जाऊं. मैं खाने की बहुत शौक़ीन हूं और मैंने सुना है की मोरक्को में काफी अच्छा खाना मिलता है. अभी तक मेरी  योजना यह है कि दो किलो वजन कम करके मैं वहां घूमने जाऊं और जी भरकर खाऊं. फिर से अपना वजन बढ़ा लूं.  मुझे इसका कोई पछतावा भी नहीं होगा ( हंसते हुए ). 

बैकपैकिंग ट्रिप ( ऐसी यात्रा जिसमें आप बस बैग उठाते है और चल पड़ते हैं ) और खर्चीले सफर में किसे तवज्जो देना चाहेंगी ?

मैं बैकपैकिंग ट्रिप पर जाना चाहूंगी. आप जानते हैं कि मैं खुद को प्रकृति के बहुत करीब पाती हूं. मुझे पैदल यात्रा करना पसंद है. तो हो सकता है की मैं अकेली ही निकल जाऊं या फिर कुछ दोस्तों के साथ कि पहाड़ों पर घूमने चली जाऊं. मैं एक टेंट बनाऊंगी और वहीं रहूंगी. अलाव जलाऊंगी. मेरे लिए छुट्टी का मतलब यही है. जहाँ आपके फोन का नेटवर्क काम ना करता हो. बस आप हों और खूबसूरत नज़ारे हों.

इतने सालों में सफर के दौरान पैकिंग के कारण कोई परेशानी हुई है?

मेरे ख्याल से आपको अपनी भारी भरकम पैकिंग से सफर को कठिन नहीं बनाना चाहिए. जितना कम सामान होगा सफर उतना आसान होगा. मैं जब भी कहीं बाहर जाती हूं विशेषकर लंदन तो इस बात का ध्यान रखती हूं कि बैग में सिर्फ ज़रूरत की चीज़ें ही रखूं. 

दरअसल वहां से लौटते हुए मेरे पास काफी सामान हो जाता है, इसलिए बैग तकरीबन खाली ही होता है. वैसे यह मौसम पर निर्भर करता है. यदि गर्मियां रहती हैं तो मैं अपनी कुछ ड्रेस, शॉर्ट्स और वेस्ट ले जाती हूं. हील्स की जगह स्लीपर्स ही ले जाती हूं क्योंकि इससे बैग भारी हो जाता है.

ऐसी कौन सी जगह है जहां आप ऊब महसूस नहीं करेंगी?

मनाली मुझे इस जगह से बहुत प्यार है. मैं यहां आठ बार गयी हूं और अगर आप मुझे मौका देंगे तो मैं यहां हर साल जाना चाहूंगी. पहाड़ मुझे बहुत प्यारे हैं. आप यह कह सकते हैं कि मैं पहाड़ों की बच्ची हूं. 

सस्ते ट्रिप (यात्रा) का कोई सूत्र बताना चाहेंगी ?

सबसे पहले तो आप अपने बैग में खूब सारी मैगी भर लीजिये. आपको रूम सर्विस पर पैसे बर्बाद करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी (हंसते हुए ). नूडल्स सबसे अच्छे होते हैं. मेरा मानना है जब आप अपने बजट में रहकर घूमना चाहते हैं तो होटल की जगह किसी घर को किराये पर ले लीजिये. 

महाबलेश्वर में आपको ऐसे कई लोग मिलेंगे, जो सैलानियों को घर किराये पर देते हैं.  यहां एक बहुत बड़ा बंगला है , जहाँ एक बुजर्ग जोड़ा रहता है. यह लोग किराये पर कमरा देते हैं. बहुत खूबसूरत बंगला है और यहाँ से नज़ारा भी बड़ा हसीन नज़र आता है.

सबसे अच्छी बात यह है की आपके बजट के अंदर है.  इस तरह की सुविधा आपको हर जगह मिलेगी. बस आपको थोड़ी मेहनत करनी होगी ऐसा घर ढूंढने में.  किसी घर पर रहना ज्यादा अच्छा है बनिस्बत किसी होटल के.  यहां आपको अपनापन महसूस होगा. यहां आप बाजार से सामान खरीदकर खुद भी खाना बना सकते हैं. क्योंकि किसी फैंसी होटल पर पैसे खर्च करना.

ऐसी कोई जगह जिससे आपको नफरत हो ?

मानसून के दौरान मुंबई बिल्कुल अच्छा नहीं लगती. मुझे यह शहर पसंद है, लेकिन बारिश के दिनों में यह शहर आपको मार देता है. आप बस अपना समय और ऊर्जा दोनों खर्च करते हो. हम कार में होते हैं , लेकिन कर कुछ नहीं सकते.

विदेश में मानसून के दिनों में आपका मन करेगा कि आप सड़क पर चलो. मगर यहां, बाप रे माफ़ करो! मुझे बारिश पसंद है, लेकिन तभी जब मैं अपने घर में होती हूं. और, बाहर जाने का कोई ऐसे मन नहीं होता। 

First published: 5 January 2016, 20:14 IST
 
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