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पोकेमॉन गो खेलते दो यूजर्स को मारी गोलीः जानिए गेम से जुड़ी 9 जरूरी बातें

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 23 July 2016, 12:36 IST

जाहिर है 'पोकेमॉन गो' के बारे में आपको भी पता होगा या सुना तो जरूर होगा. दुनिया भर के तमाम मुल्कों में मोबाइल यूजर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय होते इस रिएलिटी वीडियो गेम ने कई रिकॉर्ड बनाने के साथ ही कई परेशानियां भी खड़ी कर दी हैं.

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शनिवार को ही अमेरिका में पोकेमॉन गो खेल रहे दो किशोरों को चोर समझकर उन्हें गोली मार दी गई. मामला ऑरलैंडों के उत्तर-पूर्वी इलाके का है जहां एक व्यक्ति ने अपने घर के बाहर धीमी होती कार को चोरों की कार समझा और जाकर गोली मार दी. जबकि उस कार में दो किशोर पोकेमॉन गो खेल रहे थे.

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लेकिन यह अकेला मामला नहीं है. दुनिया भर में इस गेम को खेलने वाले आए दिन किसी न किसी नई बात या परेशानी से दो चार हो रहे हैं. अभी तक भारत में यह गेम आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं किया गया है लेकिन आप इस गेम से जुड़ें, इससे पहले इसके बारे में बहुत कुछ जानना हर लिहाज से बेहतर रहेगा.

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जानिए पोकेमॉन गो से जुड़ी 9 जरूरी बातें

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  1. पॉकेट मॉन्स्टर (pocket monster) को छोटा करने से 'पोकमॉन' शब्द बना है. यह सबसे पहले 1995 में वीडियो गेम के रूप में सबसे पहले अस्तित्व में आया. इस पर आधारित तमाम कॉमिक्स, फिल्में, कॉर्टून और टीवी सीरियल्स बन चुके हैं. बच्चों के बीच पोकेमॉन किरदार काफी मशहूर है.
  2. द पोकेमॉन कंपनी ने 6 जुलाई 2016 को निऐनटिक द्वारा डेवलप्ड लोकेशन बेस्ड रिएलिटी वीडियो गेम के रूप में 'पोकेमॉन गो' को लॉन्च किया गया. एंड्रॉयड और आईओएस मोबाइल यूजर्स के लिए मुफ्त में खेलने के लिए बना यह बार गेम मोबाइल का जीपीएस और कैमरा भी इस्तेमाल करता है. हालांकि इसके साथ इन-ऐप परचेज भी जुड़ा हुआ है, इसलिए खेलते वक्त आप कुछ खरीदारी करते हैं तो पैसे चुकाने पड़ेंगे.
  3. फिलहाल यह लैटिन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा, स्पेन, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, पुर्तगाल, ब्रिटेन-आयरलैंड और अमेरिका समेत 15 देशों में आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा चुका है. हालांकि एशियाई मुल्कों के लिए इसे अभी तक लॉन्च नहीं किया गया है. फिर भी अनाधिकारिक रूप से इसे डाउनलोड करने के तरीके मौजूद हैं.
  4. इस गेम ने लॉन्चिंग के बाद ही एक सप्ताह के भीतर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लोकप्रियता के नए कीर्तिमान रच दिए. अकेले अमेरिका में ही 'पोकेमॉन गो' 6 करोड़ 50 लाख ट्विटर अकाउंट को पीछे छोड़ते हुए इससे ज्यादा मोबाइल पर इंस्टॉल हो चुका है. बेहद तेजी से बढते इंस्टॉलेशन से इसका सर्वर दबाव नहीं सह पा रहा और कई बार क्रैश हो चुका है.
  5. न केवल वीडियो गेम प्रेमियों बल्कि शेयर बाजार पर भी 'पोकेमॉन गो' का शानदार प्रदर्शन है और इसके डेवलपर निऐनटिक लैब्स और इसपर एक तिहाई मालिकाना हक रखने वाली कंपनी निनटैंडो के शेयरों में 50 फीसदी तक का उछाल आ चुका है. 
  6. इस गेम की खासियत असली और आभासी दुनिया का बेहतरीन मेल है. इस रोमांचक खेल को खेलने के लिए मोबाइल जीपीएस और वक्त के आधार पर नजदीकी लोकेशन दिखती है और पता लगता है कि अब कौन सा पोकेमॉन आपके सामने आएगा. इसके पोकेमॉन भी जगह आधारित होते हैं. यानी घास ऐसे स्थानों पर कीड़े-मकोड़े की तरह जबकि नदी-तालाब-समुद्र आदि के नजदीक जलजीवों जैसे पोकेमॉन मारने का मौका मिलेगा.
  7. इस लोकेशन बेस्ड गेम को खेलते हुए यूजर्स अपने आसपास की हकीकत की दुनिया में घूमते-टहलते दिखेंगे. क्योंकि इस गेम को खेलने के दौरान यूजर को उस स्थान पर पहुंचना होता है ताकि उसे पोकेमॉन मिले या पोक शॉप. गेम में अंक बंटोरने के लिए बताई गई जगहों पर जाना जरूरी हो जाता है. कई मुल्कों में गेम के इस फीचर की वजह से लोगों को अपने शहर के नए-नए स्थानों और नई घटनाओं से रूबरू होने का भी मौका मिला. जबकि कई को कुछ अप्रत्याशित, खौफनाक, खतरे वाली या जानलेना परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा.
  8. दुनिया पोकेमॉन के बारे में अब ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने में लगी हुई है. परिणामस्वरूप जानकारी जुटाने के महत्वपूर्ण स्रोत विकीपीडिया पर 'पोकेमॉन गो' 10 हजार फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक पाकर सबसे ज्यादा पॉपुलर आर्टिकल बन चुका है. गेम लॉन्च होने से 15 जुलाई तक 58 लाख लोगों ने पोकेमॉन गो के लेख को विकीपीडिया पर पढ़ा. 
  9. तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही इसके नकारात्मक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं. क्योंकि यह एक जगह बैठकर खेला जाने वाला गेम नहीं है और इसे चलते-फिरते खेला जाता है, इसलिए इसमें सबसे बड़ा खतरा दुर्घटनाओं का है, जिसमें सड़क हादसे, पानी में गिरने, किसी से टकरा जाने जैसी बातें शामिल हैं. जबकि एक ताजा वैज्ञानिक शोध में बताया गया कि जो लोग रोज इस गेम को खेलने में काफी वक्त देते हैं उनमें मांसपेशियों के खिंचाव और स्ट्रेस फ्रैक्चर्स की ज्यादा संभावना है. 
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First published: 23 July 2016, 12:36 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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