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सेंसर बोर्ड की मंशा 'साला' और 'घंटा' के बिना हो 'जय गंगाजल'

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 January 2016, 16:28 IST

भारत का केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफ़सी) एक बार फिर विवादों के घेरे में है. ताजा विवाद निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा की नई फिल्म 'जय गंगाजल' से जुड़ा है. मुंबई मिरर अख़बार के मुताबिक बोर्ड ने फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने के लिए प्रकाश झा से 11 सीन में बदलाव करने के लिए कहा है. ख़बर के अनुसार बोर्ड ने झा से 'साला' और 'घंटा' जैसे शब्द बीप करने के लिए कहा है.

जय गंगाजल उनकी 2003 में आयी फ़िल्म गंगाजल का सीक्वल है. प्रियंका चोपड़ा और मानव कौल जय गंगाजल में मुख्य भूमिका में हैं. प्रकाश झा भी फ़िल्म में दर्शकों को अभिनय करते दिखेंगे.

केंद्र में भाजपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद से सेंसर बोर्ड के रूप में जाना जाने वाला सीबीएफ़सी विवादों में आता रहा है. बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने पिछले साल जनवरी में विवादों के बीच ही पद ग्रहण किया था.

ख़बर है कि सेंसर बोर्ड ने प्रकाश झा से 'साला' और 'घंटा' जैसे शब्द बीप करने के लिए कहा है

बोर्ड की पूर्व अध्यक्षा लीला सैमसन कामकाज में दखलअंदाजी का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उनके साथ बोर्ड के दूसरे कई सदस्यों ने भी पद छोड़ दिया था.

पद ग्रहण करने के बाद निहलानी ने फ़रवरी, 2015 में ऐसे 28 शब्दों की सूची जारी की थी जिसे निर्माता-निर्देशक अपनी फ़िल्मों में शामिल नहीं कर सकते. उनकी लिस्ट में 'साला' शब्द भी था.

हालांकि बोर्ड ने कुछ समय पहले ही राजकुमार हीरानी की फ़िल्म 'साला खड़ूस' के शीर्षक को हरी झंडी दे दी थी.

शनिवार को केंद्र सरकार ने सेंसर बोर्ड में सुधार के सुझाव देने के लिये एक समिति का गठन किया है.

फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल, राकेश ओमप्रकाश मेहरा और एड गुरु पियूष पांडे जैसी नामचीन हस्तियां इस समिति के सदस्य हैं.

First published: 4 January 2016, 16:28 IST
 
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