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सिंगर, एक्टर किशोर कुमार से जुड़े पांच दिलचस्प किस्से

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 August 2017, 12:09 IST

किशोर कुमार के आपने कितने किस्से सुने हैं? बहुत से न, चलिए हम आपको पांच मजेदार किस्से सुना रहे हैं जो बताते हैं कि किशोर जितने शानदार गायक थे, उतने ही निजी जीवन में खिलंदड भी थे. किशोर अपने गानों के चलते जितने पॉपुलर हुए उतने ही अपने दिलचस्प किस्सों के चलते भी.

मध्यप्रदेश में खंडवा शहर के बॉम्बे बाजार स्थित गांगुली हाउस में ही बॉलीवुड के फनकार किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को हुआ था. हालांकि, देखरेख के अभाव के कारण मौजूदा समय में यह मकान जर्जर अवस्था में है. किशोर के पिताजी एक जाने-माने वकील थे. किशोर की युवावस्था आने तक अशोक कुमार सिनेमा की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम बन गए थे.

1. खंडवा वाले किशोर कुमार संगीतप्रेमियों के राजा कैसे बन गए, इसकी बेहद मजेदार कहानी है. किशोर अपने बड़े भाई अशोक कुमार के मुंबई स्थित घर में छुट्टियां बिताने पहुंचे थे. एक दिन अशोक कुमार के घर अचानक संगीतकार सचिन देव बर्मन पहुंच गए. उन्होंने बैठक में किसी के गाने की आवाज सुनी तो दादा मुनि से पूछ बैठे 'कौन गा रहा है?' अशोक कुमार ने जवाब दिया- 'मेरा छोटा भाई है. जब तक गाना नहीं गाता, उसका नहाना पूरा नहीं होता. सचिन देव बर्मन पहली दफा किशोर की आवाज से इस तरह रूबरू हुए थे, बाकी की कहानी पूरी दुनिया जानती है. सचिन देव बर्मन ही थे जिन्होंने किशोर की प्रतिभा को पहचाना और भारतीय संगीत को एक ऐसा नगीना दिया जिसकी चमक आज भी कायम है.

2. किशोर कुमार के सबसे मशहूर किस्सों में है 'पैसा'! जी हां, कहते हैं किशोर दा किसी पर अपना पैसा छोड़ते नहीं थे और इसे लेकर कई किस्से भी मशहूर हैं. फिल्म 'प्यार किए जा' में कॉमेडियन मेहमूद ने किशोर कुमार, शशि कपूर और ओमप्रकाश से ज्यादा पैसे वसूले थे. किशोर को यह बात अखर गई. इसका बदला उन्होंने महमूद से फिल्म 'पड़ोसन' में लिया - दोगुना पैसा लेकर.

3. किशोर कुमार को अपने शहर खंडवा से बेहद प्यार था. इसकी बानगी कई मौकों पर नजर आई. किशोर कुमार ने जब-जब स्टेज-शो किए, हमेशा हाथ जोड़कर सबसे पहले संबोधन करते थे- 'मेरे दादा-दादियों. मेरे नाना-नानियों. मेरे भाई-बहनों, तुम सबको खंडवे वाले किशोर कुमार का राम-राम. नमस्कार.' ऐसे ही अपने शहर से लगाव के चलते उन्होंने अपनी दूसरी बीवी मधुबाला से शादी के बाद मजाक में कहा था- 'मैं दर्जनभर बच्चे पैदा कर खंडवा की गलियों में उनके साथ घूमना चाहता हूं'.

4. किशोर कुमार का बचपन तो खंडवा में बीता, लेकिन जब वे किशोर हुए तो इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ने आए. हर सोमवार सुबह खंडवा से मीटरगेज की छुक-छुक रेलगाड़ी में इंदौर आते और शनिवार शाम लौट जाते. कहते हैं वो अपने शहर से ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह पाते थे. सफर में वे हर स्टेशन पर डिब्बा बदल लेते और मुसाफिरों को नए-नए गाने सुनाकर मनोरंजन करते थे.

5. किशोर कुमार ताउम्र कस्बाई आकर्षण से मुक्त नहीं हो पाए. मुंबई की भीड़ उन्हें बांध नहीं पाती थी, पार्टियां और ग्लैमर उनकी आत्मा में नहीं उतरा, उनकी आखिरी इच्छा थी कि खंडवा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाए. इस इच्छा को पूरा भी किया गया और खंडवा में ही उनका अंतिम संस्कार हुआ. पूरा शहर अपने इस नायक को अलविदा कहने के लिए गुनगुनाता हुआ चला आ रहा था. वे कहा करते थे- 'फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वे खंडवा में ही बस जाएंगे और रोज दूध-जलेबी खाएंगे.

First published: 4 August 2017, 12:09 IST
 
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