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कभी तन्हाइयों में यूं हमारी याद आएगी... मुबारक बेगम के 5 बेहतरीन गाने

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 July 2016, 12:29 IST
(यूट्यूब)

मंगलवार को बीते जमाने की मशहूर पार्श्व गायिका मुबारक बेगम का निधन हो गया. 80 साल की बेगम फिल्मों में उस दौर में आईं जिसे गीत-संगीत के लिहाज से हिंदी सिनेमा का स्वर्ण काल कहा जा सकता है.

लेकिन उस दौर की कई प्रतिभाशाली गायिकाओं की तरह मुबारक बेगम एक तरह से लता मंगेशकर और आशा भोसले की जोड़ी के तले पनप नहीं पाईं. उन्हें कुछ अच्छे गाने तो मिले लेकिन लता जैसा स्टारडम उन्हें कभी हासिल नहीं हो सका.

मुबारक बेगम जैसी गायिकाओं के इस हालात का समझाते हुए संगीत इतिहासकर राजू भारतन एनडीटीवी से कहते हैं, "वो तब सामने आईं जब लता मंगेशकर उभर रही थीं. उस वक़्त में केवल मुबारक बेगम ही नहीं बल्कि कई दूसरी गायिकाएं खो गईं. लता की मखमली आवाज के कारण शमशाद बेगम, जोहराबाई अम्बावाली इत्यादि भी फलक से गायब हो गईं."

भले ही मुबारक बेगम को वो नामो-इकराम न मिला हो जो दूसरी गायिकाओं को मिला लेकिन संगीत प्रेमियों की ज़हन में वो अपने गीतों के जरिए बनी रहेंगी. आइए हम आपको उनके कुछ अमर गीत सुनाते हैं. 

कभी तन्हाइयों में यूं हमारी याद आएगी, हमारी याद आएगी (1961)

राजस्थान में जन्मीं और अहमदाबाद में पली-बढ़ी मुबारक बेगम को बड़ा ब्रेक फिल्म मधुमति के गाने 'हाले दिल सुनाइए' से मिला. फिल्म उस दौर में हिट साबित हुई. किदार शर्मा की फिल्म 'हमारी याद आएगी' से उन्हें शोहरत मिली और इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक नगमे इंडस्ट्री को दिए. 

हम हाल-ए-दिल सुनाएंगे, मधुमती (1958)

फिल्मों में उन्हें पहला ब्रेक महज 13 साल की उम्र में संगीतकार नौशाद ने दिया था. उन्होंने फिल्म 'आइए' के लिए 'मोहे आने लगी अंगड़ाई' को अपनी आवाज़ दी.

वादा हमसे किया, दिल किसी को दिया, सरस्वतीचंद्र (1968)

मुबारक बेगम ने अपने तीन दशकों लम्बे करियर में एसडी बर्मन, शंकर जयकिशन, सलिल चौधरी और खय्याम जैसे दिग्गज संगीतकारों के लिए गीत गाए.

उन्होंने अपना आखिरी गीत 1980 में आयी फिल्म 'राम तो दीवाना है' के लिए गाया. उसके बाद के 36 साल उन्होंने एक तरह की गुमनामी में गुजारे.

कुछ अजनबी से आप हैं, कुछ अजनबी से हम, शगुन (1964)

पिछले कुछ समय से केवल अपनी मुफलिसी को लेकर खबरों में रहने वाली मुबारक बेगम को फिल्मी दुनिया से ज्यादा मदद नहीं मिली. अभिनेता सलमान खान और गायिका लता मंगेशकर उन चंद लोगों में शामिल हैं जिन्होंने गुरबत में उनकी आर्थिक मदद की.

वो न आएंगे पलट के, देवदास (1955)

First published: 20 July 2016, 12:29 IST
 
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