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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: बॉलीवुड की इन फिल्मों के साथ मनाएं महिला दिवस

आकांशा अवस्थी | Updated on: 8 March 2018, 9:44 IST

साहित्य और सिनेमा समाज का आइना होता है. आज जब पूरी दुनिया में महिला दिवस मनाया जा रहा है. हम बात करेंगे बॉलीवुड की कुछ ऐसी फिल्मों की जहां महिलाओं को कमजोरी का प्रतीक नहीं बल्कि समाज का मजबूत आधार दिखाया गया है. ये फिल्में दिखती हैं की नारीशक्ति को उपेक्षित नहीं मन जाना चाहिए.

किस तरह से विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी औरत खुद को मजबूती से खड़ा करती हैं. उन्हें सहारे की जरुरत नहीं पड़ती वो खुद सहारा बनने लायक होती हैं.

 

मदर इंडिया
मदर इण्डिया फिल्म महबूब ख़ान ने लिखी और निर्देशित की है. फ़िल्म में नर्गिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राज कुमार मुख्य भूमिका में हैं. फ़िल्म महबूब ख़ान द्वारा निर्मित 'औरत' का रीमेक है. यह गरीबी से पीड़ित गाँव में रहने वाली औरत राधा की कहानी है जो कई मुश्किलों का सामना करते हुए अपने बच्चों का पालन पोषण करने और बुरे जागीरदार से बचने की मेहनत करती है.

उसकी मेहनत और लगन के बावजूद वह एक देवी-स्वरूप उदाहरण पेश करती है व भारतीय नारी की परिभाषा स्थापित करती है और फिर भी अंत में भले के लिए अपने गुण्डे बेटे को स्वयं मार देती है. वह आज़ादी के बाद के भारत को सबके सामने रखती है.

दंगल
आमिर खान की 'दंगल' में जिस तरह से स्त्री-पुरुष समानता और की बात की गई है. वो वाकई सराहनीय है और महिलाओं के लिए महिला दिवस पर देखने के लिए 'दंगल' से बढ़कर कोई और फिल्म शायद ही हो सकती है.

 

कहानी
विद्या बालन की फिल्म कहानी एक ऐसी महिला की है जो अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए किसी भी हद तक चली जाती है. वो झूट बोलती है, लोगो का इस्तेमाल करती है, ड्रामा करती है लेकिन बदला लेकर रहती है.

नीरजा
सोनम कपूर की फिल्म 'नीरजा', फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट की असली कहानी है जिसने एक हाइजैक प्लेन में लोगों की जान बचाने के लिए खुद की जान देती थी. देश की बेटी पर बनी ये फिल्म हर किसी को देखनी चाहिए.

पीकू
पिता-पुत्री के रिश्ते पर कम ही फिल्म देखने को मिली हैं. इस रिश्ते को लेकर शुजीत सरकार ने 'पीकू' एक अनोखी फिल्म बनाई है. अमिताभ बच्चन,दीपिका पादुकोण और इरफान खान का अभिनय फिल्म को देखने लायक बनाता है.

पिंक
छेड़खानी किये जाने के बाद मीनल दोस्तों के साथ एक राजनेता के भतीजे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कोशिश करती है. जब बाद में मामले बिगड़ जाते हैं, तब सेवानिवृत्त वकील,दीपक (अमिताभ) मुकदमा लड़ने के लिए उनकी मदद करता है और जीत दिलाता है.

क्वीन
इस क्रम में अगर कंगना रनावत की फिल्म क्वीन का जिक्र ना हो तो बात अधूरी रह जायेगी. आपकी चाहतें मर्दो के सहारे की मोहताज नहीं होतीं इसका अहसास इस फिल्म को देखकर जिस गहराई से होता है वो ही इस फिल्म का कमाल है. इस फिल्म के लिए कंगना ने कई पुरस्कार भी जीते.

इंग्लिश विन्ग्लिश
गौरी शिंदे के डायरेक्शन में बनी श्रीदेवी स्टारर ये फिल्म एक ऐसी महिला की कहानी है जो अंग्रेजी सिखने के लिए क्लास लगाती है क्योंकि उसका पति और उसके बच्चे उसकी कमजोर अंग्रेजी की वजह से उसका मज़ाक उड़ाते हैं.
हाल ही में श्रीदेवी बॉलीवुड और अपने फैंस को अलविदा कह गयीं। ये फिल्म श्रीदेवी की बेहतरीन कमबैक फिल्म है.

First published: 8 March 2018, 9:44 IST
 
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