Home » मनोरंजन » Meet the fine actor Gyanendra Tripathi of who played the role of coach in Rahul Bose's Poorna
 

पूर्णा की कहानी में उसके अभिनेता ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की झलक मिलती है

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 May 2017, 16:54 IST

 

मशहूर एक्टर और निर्माता-निर्देशक राहुल बोस की फिल्म पूर्णा पिछले दिनों काफी चर्चित रही. इस फिल्म में एक नन्हीं सी आदिवासी लड़की पूर्णा माउंट एवरेस्ट पर पहुंच जाती है. पूर्णा जब महज़ 13 साल की थी तो दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी एवरेस्ट पर पहुंचने का करिश्मा कर दिखाती है.

पूर्णा की इस कहानी के ज़रिए राहुल बोस हमारी सरकारी शिक्षा व्यवस्था, उसकी ज़मीनी हक़ीक़त, गांवों में लड़कियों की शिक्षा, बाल विवाह और पूरे तंत्र में बुने भ्रष्टाचार को बताने की कोशिश करते हैं. पूर्णा एक बायोपिक है जो किसी प्रेरणा के रूप में उभरकर सामने आती है.

मगर कमाल की बात है कि इस फिल्म में पूर्णा के कोच का किरदार निभाने वाले अभिनेता ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की असल ज़िंदगी पूर्णा की कहानी से मिलती-जुलती है. ज्ञानेंद्र मध्यप्रदेश के रीवा ज़िले में पैदा हुए और ख़्वाब मायानगरी में पांव जमाने का देखा करते थे.

मायानगरी से उनका न कोई नाता है और न ही फिल्मी दुनिया में कोई गॉड फादर. रीवा से निकलकर कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए उन्होंने राजधानी भोपाल का रुख़ किया. 2003 में भोपाल के एक्सिलेंस कॉलेज में एडमिशन के दौरान ही उन्होंने थिएटर ज्वाइन कर लिया. कॉलेज के अलावा उनका पूरा वक़्त भोपाल के मशहूर भारत भवन और रवींद्र भवन में गुज़रने लगा.

मगर मुंबई में पांव जमाने की इस कोशिश के दौरान ही उनपर नौकरी का दबाव बनने लगा. उनके पास मुंबई के किसी संस्थान में अभिनय का गुर सीखने की फीस तक नहीं थी. लिहाज़ा, ज्ञानेंद्र ने दो साल कॉल सेंटर में नौकरी करके कुछ रुपए इकट्ठा किए और मुंबई जाने की तैयारी भी करते रहे. दो साल बाद उन्हें देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थान फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से एडमिशन का ऑफर आया और स्कॉलरशिप भी मिली.

पुणे में भी ज्ञानेंद्र ने एफटीआईआई में पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी जारी रखी. वो दिन में कॉलेज में हुआ करते थे तो रात में कॉलसेंटर में. एफटीआईआई से निकलने के बाद ज्ञानेंद्र ने जाने कितने ऑडिशन दिए और फिर एक चर्चित टीवी सीरियल क्राइम
पेट्रोल में उन्हें ब्रेक मिला. वो यहां लंबे समय तक रहे और क्राइम पेट्रोल के कई सारे एपिसोड कर डाले.

लगातार काम करने की वजह से उनका चेहरा पहचाना जाने लगा और फिर अक्षय कुमार स्टारर गब्बर में उन्हें पहली बार बड़े पर्दे पर रोल मिला. हालांकि वह बेहद मामूली रोल था. इसी दौरान उनकी मुलाक़ात राहुल बोस से हुई जिन्हें आदिवासी बच्ची पूर्णा के लिए एक कोच की ज़रूरत थी.


पूर्णा पिछले महीने रिलीज़ हो गई और अपनी रचनात्मकता की वजह से बेहद सराही भी गई और कोच के रूप में शेखर बाबू बने ज्ञानेद्र अपनी भूमिका को देखकर मंद-मंद मुस्कुराते रहते हैं. मानों की बचपन में देखे गए सपनों को पंख लगना शुरू हो गए हैं. ज्ञानेंद्र कहते हैं कि यह फिल्म अभिनय के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण रहे और यह मेरे करियर में मील का पत्थर साबित होगी.

First published: 4 May 2017, 16:54 IST
 
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