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जन्मदिन विशेष: ख़य्याम के वो गाने जिन्हें आप भुला ना सकेंगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 February 2016, 8:17 IST

कभी कभी, उमराव जान, रजिया सुल्तान, थोड़ी सी बेवफाई, त्रिशुल जैसी फिल्मों का सुपरहिट संगीत देने संगाीतकार मोहम्मद जहूर ख़य्याम गुरुवार को 90 साल के हो गए हैं.

इस मौके पर उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति ( करीब 12 करोड़ रुपए) 'ख़य्याम प्रदीप जगजीत चैरिटेबल ट्रस्‍ट' को दान करने की घोषणा की है.

उनका का पूरा नाम मोहम्‍मद जहूर हाशमी है लेकिन वे ख़य्याम के नाम से मशहूर हुए. संपत्ति दान करने के मौके पर उन्‍होंने कहा, 'जिंदगी के 90वें बसंत पर मुझे लगता है कि देश ने मेरे लिए बहुत कुछ किया. अब वक्‍त है कि मैं अपने देश और फिल्‍म उद्योग के लिए कुछ करूं. यही वजह है कि पूरी दौलत दान करने का फैसला किया है.'

उन्‍हें तीन बार फिल्‍मफेयर सम्‍मान मिला. सबसे पहले 1977 में कभी कभी के लिए, फिर 1982 में उमराव जान के लिए और 2010 में फिल्‍मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया.

2011 में खय्याम को पद्म भूषण से भी नवाजा गया. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह पहले फिल्मों में हीरो बनना चाहते थे लेकिन बाद में उनका रूझान संगीत की ओर हो गया और वह संगीतकार बन गए.

ख़य्याम ने अपने करियर की शुरुआत 1947 में की थी. उन्होंने पहली बार फिल्म 'हीर रांझा' में संगीत दिया लेकिन मोहम्मद रफ़ी के गीत 'अकेले में वह घबराते तो होंगे' से उन्हें पहचान मिली.

फिल्म 'शोला और शबनम' ने उन्हें संगीतकार के रूप में स्थापित कर दिया. उनकी पत्नी जगजीत कौर भी अच्छी गायिका हैं और उन्होंने ख़य्याम के साथ 'बाज़ार', 'शगुन' और 'उमराव जान' में काम भी किया है.

ख़य्याम के पसंदीदा संगीतकार सी रामचंद्र हैं. इसके अलावा वो रोशन, मदनमोहन और जयदेव जैसे संगीतकारों के भी मुरीद हैं.

First published: 19 February 2016, 8:17 IST
 
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