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नौशाद: आवाज़ दे कहां है, दुनिया मेरी जवां है...

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2017, 12:55 IST

नौशाद साहब उन गुणी संगीतकारों में से थे जिन्होंने भारतीय संगीत को फिल्मी संगीत का हिस्सा बनाया. नौशाद अली को बचपन से संगीत का शौक था.

ये वो जमाना था जब फिल्में मूक होती थीं और परदे के पास ही तबला, हारमोनियम, सितार और वायलिन बजाने वाले बैठते थे. होता ये था कि साजिंदे फिल्म को पहले ही देख चुके होते थे और कहां पर क्या बजाना है, यह तय कर लेते थे. जब दर्शक फिल्म देखने आते थे तो इन साजिंदों का संगीत उस मूक फिल्म को नई ताज़गी से भर देता था. नौशाद अली भी ऐसी किसी टीम का हिस्सा बन चुके थे और खेल-खेल में ही सीख चुके थे कि ‘बैकग्राउंड म्यूजिक’ का क्या महत्त्व होता है.

मशहूर फिल्म 'मुगले आजम' के मधुर संगीत को आज की पीढ़ी भी गुनगुनाती है, लेकिन इसके गीत को संगीतबद्ध करने वाले संगीत सम्राट नौशाद ने पहले इसका संगीत निर्देशन करने से इनकार कर दिया था.

कहा जाता है 'मुगले आजम' के निर्देशक के. आसिफ एक बार नौशाद के घर उनसे मिलने के लिए गए. नौशाद उस समय हारमोनियम पर कुछ धुन तैयार कर रहे थे. तभी के आसिफ ने 50 हजार रुपये नोट का बंडल हारमोनियम पर फेंका. नौशाद इस बात से बेहद नाराज़ हुए और नोटों से भरा बंडल आसिफ की ओर फेंकते हुए कहा, "ऐसा उन लोगों के लिए करना जो बिना एडवांस फिल्मों में संगीत नहीं देते, मैं आपकी फिल्म में संगीत नहीं दूंगा."

First published: 5 May 2017, 12:55 IST
 
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