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कौन हैं कविराज प्रसून जोशी जो पीएम मोदी का इंटरव्यू लेकर चर्चा में हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 April 2018, 14:35 IST

लंदन में आयोजित 'भारत की बात सबके साथ' कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के कई मुद्दों पर खुल कर बात करने के कारण काफी चर्चा में रहा. लंदन में 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम को प्रसून जोशी ने होस्ट किया. सेंसर बोर्ड के चीफ और बॉलीवुड गीतकार प्रसून जोशी ने इस दौरान मोदी का इंटरव्यू भी किया.

लंदन के टाउन हॉल में आयोजित ये कार्यक्रम सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है. पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सर्जिकल स्ट्राइक और बलात्कार के मामलों पर उनके बयान की यहां खूब चर्चा है. हालांकि इसके साथ ही उनके विरोधियों और अन्य लोगों ने इस कार्यक्रम को लेकर कई सवाल भी उठाए हैं और तंजभरी टिप्पणियां की हैं. प्रसून जोशी ने उनका दो घंटे 20 मिनट तक इंटरव्यू लिया.

प्रसून जोशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे लंबा इंटरव्यू लेने वाले कवि और लेखक बन चुके हैं. उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मे प्रसून के करियर पर डालते हैं कुछ नजर. एमबीए की पढ़ाई करके दस साल काम एक कंपनी में काम किया. फिर लेखन में अलग ही मुक़ाम पाया.

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एडवरटाइमेंट की पंचलाइन ने मचाई धूम

प्रसून जोशी को कलम के जादूगर और ऐड गुरू भी कहा जाने लगा.

  • ठंडा मतलब कोका कोला
  • क्लोरमिंट क्यों खाते हैं? दोबारा मत पूछना
  • ठंडे का तड़का... यारा का टशन
  • अतिथि देवो भव:
  • उम्मीदों वाली धूप, सनसाइन वाली आशा. रोने के बहाने कम हैं, हंसने के ज़्यादा.

उन्होंने फिल्मों के लिए गीत भी लिखते हैं.राजकुमार संतोषी की फिल्म 'लज्जा' ने उन्हें फिल्मों में एंट्री दिलवा दी. उसके बाद से वो लगातार फिल्मों से जुड़े हैं. उन्होंने 'मौला', 'कैसे मुझे तू मिल गई', 'तू बिन बताए', 'खलबली है खलबली', 'सांसों को सांसों' में जैसे मशहूर गाने लिखे हैं, तारे जमीन पर, क्या इतना बुरा हूं मैं मां जैसे मशहूर गाने लिखे हैं.


17 साल की उम्र में लिखी दी थी पहली किताब

लिटरेचर से उनके इस लगाव का ही असर था कि सिर्फ 17 साल की उम्र में उनकी पहली किताब 'मैं और वो' भी प्रकाशित हो गई थी. लिटरेचर में इतनी गहरी रुचि होने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई के लिए साइंस को चुना.

पहले बीएससी की और फिर फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन. इसके बाद उन्होंने एमबीए किया और एडवरटाइजिंग के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला कर लिया. मगर यहां भी उनके भीतर का कवि बार-बार बाहर आता रहा. नतीजे में हमें मिली 'ठंडा मतलब कोका-कोला', 'अभी तो मैं जवान हूं', 'उम्मीद वाली धूप' जैसी टैगलाइंस. और इस तरह प्रसून एड गुरु बन गए. उन्होंने अपनी जिंदगी के दस साल विज्ञापन की दुनिया को दिए और फिर उनका अगला पड़ाव बना बॉलीवुड.

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First published: 20 April 2018, 14:01 IST
 
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