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रामगोपाल वर्मा बनाएंगे नक्सली से गैंगस्टर बने नईम पर फिल्म

ए साए शेखर | Updated on: 26 August 2016, 8:24 IST

लीक से हटकर अलग-अलग विषयों पर फिल्म बनाने के लिए मशहूर निर्देशक रामगोपाल वर्मा किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहते हैं. विवाद चाहे फिल्मी हों या अन्य कुछ और. फिल्मी पर्दा हो या ट्विटर, वर्मा की पहचान फिल्मी दुनिया के सफल नाम और कोर्ट-कचहरी के विवादों के चलते होती है.

वर्मा वर्तमान में सरकार-3 फिल्म बनाने के अपने मिशन में जुटे हुए हैं. फिल्म में अमिताभ बच्चन को वह एंग्रीमैन के रूप में प्रस्तुत करेंगे. उन्होंने हाल ही में ट्वीट किया कि वे नक्सली से माफिया डॉन बने तेलंगाना के शातिर अपराधी मोहम्मद नईमुद्दीन की जिन्दगी पर तीन हिस्सों में फिल्म बनाने जा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि नईमुद्दीन उर्फ नईम तेलंगाना में अपने अपराधों के लिए कुख्यात रहा है. नक्सली गतिविधियों समेत उसके विरुद्ध 100 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे. नईम वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के एस व्यास की जनवरी 1993 में हैदराबाद के लाल बहादुर स्टेडियम में हुई हत्या का प्रमुख अभियुक्त था.

आईपीएस व्यास को नक्सल विरोधी सुरक्षा दस्ते का जनक माना जाता है, आठ अगस्त, 2016 को उसे हैदराबाद के बाहरी इलाके में महबूबनर जिले के शादनगर में पुलिस ऑपरेशन में मार गिराया गया था. पुलिस तभी से नईम के छिपने के भूमिगत ठिकानों और उसके नजदीकी आंतरिक संबंधों का पता लगाने में जुटी हुई है.

वर्मा फिलहाल सरकार-3 बनाने में लगे हुए हैं. फिल्म में अमिताभ बच्चन को वह एंग्रीमैन के रूप में दिखाएंगे

नईम के छिपने के विभिन्न स्थलों, उसके डरावने अपराधों, दोस्तों और यहां तक कि बच्चों के बारे में भी अखबारों में ढेर सारा लिखा गया है. कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा उसे इन्फॉर्मर के रूप में तब्दील किए जाने के बाद से पुलिस ने उसके स्कैण्डल से भरे जीवन के बारे में परतें खोलनी शुरू की. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तेलगू मीडिया में प्रकाशित कुछ स्टोरीज को मनगढ़न्त, काल्पनिक और बकवास बताया है.

यहां तक कहा गया है कि मीडिया सनसनीखेज कहानियां छापकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए यह सब कर रहा है.

यह अटकलें भी तेजी से हैं कि नईम के सम्बंध कई पुलिस अधिकारियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अमीर लोगों से थे जो उससे मेलजोल रखते थे. इनके चलते डॉन अपना जीवन आसानी से जीता था. वह उद्योगपतियों, व्यापारियों और राजनीतिज्ञों को, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, आतंकित किए रहता था.

स्थानीय टीवी चैनल्स ने नईम और उसके वफादार समर्थकों की बातचीत भी एयर की थी. कथित रूप से दावा किया जाता है कि नईम ने पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी के पुत्र प्रतीक रेड्डी की नालगोंडा जिले में हत्या करा दी थी. प्रतीक की सड़क दुघर्टना में मौत हो गई थी.

फिल्म निर्माता नट्टी कुमार ने आरोप लगाए हैं कि तेलगू फिल्मों के कई निर्माताओं, फिल्मी हस्तियों, पुलिस अधिकारियों और यहां तक कि आंध्र प्रदेश के कुछ वरिष्ठ नेताओं के भी संबंध नईम से थे. नईम के अपराधों की जांच के लिए तेलंगाना सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस एन रेड्डी की अगुवाई में एक विशेष जांच टीम गठित की है. पुलिस ने अभी तक एक दर्जन से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां की हैं.

गैंगस्टर की कहानियों पर फिल्म बनाने के लिए मशहूर रामगोपाल वर्मा ने मंगलवार को ट्वीट किया कि वे नईमउद्दीन की जिंदगी को परदे पर उतारने जा रहे हैं. उन्होंने ट्वीट में लिखा-

ढेर सारे सूत्रों से नईमउद्दीन के बारे में अंदरूनी जानकारियां हासिल की. सालों से उसके द्वारा किए जा रहे अपराध वास्तव में इस तरह से हैं जैसे बढ़ते हुए बाल.

नईमुद्दीन उर्फ नईम तेलंगाना में नक्सली गितिविधियों से लेकर हार्डकोर अपराधों के लिए कुख्यात रहा है

नईमउद्दीन का एक नक्सली से पुलिस इन्फॉर्मर, उसके बाद अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर के रूप में शातिर अपराधी बनने का सफर खौफनाक है.

नईमुद्दीन की कहानी इतनी जटिल और इतनी आपस में घुली-मिली है कि केवल एक फिल्म में सब कुछ कहना असंभव है.

देखा जाए तो वर्मा गैंगस्टर, भूत, साइकोलॉजी पर फिल्में बनाने के लिए मशहूर हैं. उन्होंने एक से बढ़कर एक अच्छी अच्छी फिल्में बनाई हैं. नईम पर तीन भागों में बनने वाली फिल्म की सफलता या नाकामयाबी के बारे में कुछ कहना अभी मुनासिब नहीं होगा. सुनिश्चित होना चाहिए कि फिल्म पर आरजीवी-मार्क लगा हुआ है.

वर्मा, विजयवाडा के दो राजनीतिक परिवारों के बीच गुटबंदी की लड़ाई पर आधारित फिल्म बनाना चाहते थे. उन्होंने पूर्व मंत्री देवीनेनी नेहरू जैसे कुछ राजनीतिकों से मुलाकात भी की थी जिसका इस परिवार से झगड़ा था. उन्हें सलाह दी गई कि वे इस विषय पर फिल्म न बनाएं. लोग भड़क गए. अशांति फैल गई और लोगों की मौतें तक हुईं. वर्मा ने उस समय घोषणा की थी कि यह आखिरी तेलुगु फिल्म होगी जो वे बनाएंगे.

वास्तव में, रामगोपाल वर्मा को मिली फिल्मी सफलता का सफर फिल्म फिल्म शिवा से शुरू होता है. यह फिल्म गैंगवार पर बनी थी. आरजीवी की यह फिल्म पांच अक्टूबर 1989 को रिलीज हुई थी जो बॉक्स आफिस पर सुपरहिट रही थी.

तब से लेकर अभी तक वर्मा ने कई फिल्में बनाई हैं जो हिट भी रहीं और फ्लॉप भी. कभी उनके हाथ में गुलदस्ते आए तो कभी कांटे पड़े. वह अपनी फिल्मों की सफलता या विफलता को लेकर बहुत ज्यादा चिन्तित नहीं होते हैं. हालांकि फिल्म की लोकप्रियता की स्वीकार्यता कई तथ्यों पर निर्भर करती है, इससे वह वाकिफ हैं.

वास्तव में, उनकी कई फिल्में बॉक्स आफिस पर फ्लॉप भी रहीं. दो हिस्सों में बनी रक्तचरित्र का पहला भाग राजनेताओं एनटीआर कैबिनेट में पूर्व मंत्री पारिताला रवि और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के मेडीलाचेरवू सूरी के बीच टकराव की कहानी पर आधिरत है जो हिट रही जबकि दूसरा भाग बॉक्स आफिस पर शानदार प्रदर्शन न कर सकी. बताते चलें कि रवि राज्य में मुख्य विपक्षी दल तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के नेता थे. 2005 में कथित तौर पर कांग्रेस नेता सूरी के समर्थकों ने उनकी हत्या कर दी थी.

वर्मा 26/11 के मुम्बई हमलों के बाद तीन दिसम्बर 2008 को होटल ताजमहल पैलेस समेत अन्य स्थलों, जहां विस्फोट किया गया था, तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख (अब स्वर्गीय) के साथ गए थे. इसी के चलते विलासराव को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ गई थी. लोगों ने सवाल उठाया था कि मुख्यमंत्री के कार्यकारी दौरे में वर्मा और रितेश देशमुख को क्‍यों शामिल किया गया.

यह भी खबरें उड़ी कि रामगोपाल वर्मा अक्‍सर वास्‍तविक जिन्दगी की घटनाओं को फिल्‍मी परदे पर दिखाते रहे है, शायद इसलिए वे वहां पर गए थे और उसमे रितेश देशमुख को मुख्‍य भूमिका में लेना चाह रहे थे.

वर्मा ने फिल्म, सावित्री बनाने की ओर भी कदम बढ़ा दिया है. दक्षिण भारतीय फिल्म की यह कहानी एक स्कूली छात्र के अपनी अध्यापिका के साथ भावनाओं पर आधारित है. वर्मा ने सावित्री फिल्म के जो पोस्टर रिलीज किए हैं, उनमें 13 साल के एक लड़के को महिला के शरीर के कुछ हिस्सों को घूरते हुए दिखाया गया है. इसका कैप्सन भी शरारत भरा है–आपकी सावित्री कौन है? कृपया ऐसी सावित्रियों के साथ अनुभव साझा करें. हम उसे अपनी फिल्म में शामिल करेंगे.

सावित्री के पोस्टर को लेकर विवाद छिड़ गया तो वर्मा ने इसका नाम बदल कर श्रीदेवी कर दिया. अब नईम की जिन्दगी पर फिल्म बन रही है. दर्शक इसे कितना पसन्द करेंगे, यह तो समय ही बताएगा. ठीक इसी समय रियो ओलम्पिक में सिल्वर मेडल जीत कर इतिहास रचने वाली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के कोच पुलेला गोपीचंद पर फिल्म बनाने की तैयारी चल रही है. यह फिल्म तेलुगु और हिन्दी में बनाई जाएगी. फिल्म के निर्देशक राष्ट्रीय अवॉर्ड जीत चुके निर्देशक प्रावीन सातारू और प्रोड्यूसर अभिषेक हैं. फिल्म का निर्माण नवंबर से शुरू होगा.

First published: 26 August 2016, 8:24 IST
 
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