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'सुल्तान' भाई का धोबीपाट है, फैंस हो जाएंगे चित्त

रंगनाथ सिंह | Updated on: 8 July 2016, 18:59 IST

हरियाणा का हो, जाट हो, पहलवान हो और फिर वो सलमान ख़ान हो, ऐसे हीरो की फिल्मी कहानी क्या होगी, इसका अंदाज भले किसी विलायती को न लग पाए, हमारे देसी दर्शकों को बखूबी होगा. और सलमान ख़ान की कहानी दर्शकों की उम्मीद के उलटी निकल जाए तो फिल्म ही पिट जाए. जगहों और पात्रों के नाम बदलते हैं, घटनाक्रम बदलता है लेकिन नहीं बदलता तो सल्लू भाई.

शायद पहली बार 1998 में भाई ने अपने बगैर शर्ट और फटी जींस में कहा था, "आई लव यू ऑल...", तब से अब तक भाई को जनता और जनता को भाई से प्यार बना हुआ है. तब से अब तक जनता मानती आई है कि भाई जैसी बॉडी किसी की नहीं. भाई इत्ता सीधा-सादा है कि उसका टोटल कैरेक्टर दो शब्दों में बयां किया जा सकता है, अक्खड़ और इमोशनल.  

देश की लाखों जनता जानती है कि भाई के जो दिल में होता है, वही ज़ुबान पर. भाई ने कमिटमेंट कर दी तो ख़ुद की भी नहीं सुनता. केवल भाई ही नेशनल चैनल पर कह सकता है कि 'द होल टीवी इंडस्ट्री इज बिग झोल,' केवल भाई ही एक दूसरे नेशनल चैनल पर एक दूसरे एंकर से कह सकता है कि पैसे से 'प्यार' भी ख़रीदा जा सकता है.

'सुल्तान' का कैरेक्टर सलमान की रियल लाइफ इमेज के इतने करीब है कि शुभ्रा गुप्ता जैसी कड़क क्रिटिक ने भी इसे 'सलमान की लाइफ का सबसे रियल परफॉर्मेंस' बताया है. भाई के सारे फैंस जानते हैं कि फिल्म भाई के एक्टिंग से नहीं, उसके करिश्मे से चलती है. सुल्तान में भाई का करिश्मा अपने टॉप पर है, फिल्म में भाई का कैरेक्टर मिट्टी से जुड़ा हुआ है. यानी अपने ज़मीनी फैंस का पूरी तरह ज़मीनी भाई. 

'सुल्तान' हरियाणा के रेवाड़ी जिले के मनमौजी नौजवान है. 20 साल की उम्र में भी उसे बस पतंग लूटना आता है. पतंग लूटने में वो चैंपियन है. इसी पतंग लूटने के चक्कर में वो एक दिन आरफा (अनुष्का शर्मा) से टकरा जाता है और उसकी ज़िंदगी बदल जाती है. तुलसीदास प्यार में कवि बने तो 'सुल्तान' प्यार में पहलवान बन जाता है.

इंटरवल से पहले मिट्टी के अखाड़े से पहलवानी शुरू करके ओलिंपिक और विश्व विजेता बनने वाला भाई, इंटरवल के बाद आज के जमाने की फ्री स्टाइल मार्डन फाइट का चैंपियन बनकर फ़िल्म का दी एंड कर देता है. और इंटरवल से पहले भी और बाद में भी, दोनों बार भाई ये सब प्यार के लिए करता है.

भाई के सभी फैंस को पता है कि उसकी फ़िल्म में क्या होगा. सबको पता है कि फ़िल्म में आने वाली हर मुश्किल से भाई और उसका प्यार कुछ नाटकीय उतार-चढ़ाव के बाद जीत जाएंगे. लेकिन इस बार ये कैसे होगा इसे ही देखने के लिए भाई के फैंस एडवांस बुकिंग कराते हैं.

अनुष्का शर्मा 'सुल्तान' में हरियाणवी लड़की की भूमिका में हैं लेकिन उन्हें देखकर बार-बार दत्तो (तनु वेड्स मनु रिटर्न्स) की याद आती रही. दत्तो की भूमिका में कंगना रनौत जितनी हरियाणवी लगती हैं, आरफा उसका चौथाई भी नहीं लगती. सलमान की ज्यादातर फिल्मों की तरह इस फिल्म में भी हिरोइन इसीलिए है कि भाई को उससे प्यार हो सके और उसके प्यार में भाई वो सब कर सके जो उसके फैंस को पसंद है.

पिछले हफ्ते शेविंग कराते हुए मैंने सैलूनवाले शाहिद भाई से यूं ही पूछ लिया कि ईद कब है? उन्होंने कहा, शायद 7 की. शाहिद भाई आगे कुछ बोलते इससे पहले ही उनके दो शागिर्द बोल उठे, शाहिद भाई ईदी में सुल्तान दिखाने वाले हैं, बस टिकट मिल जाए. सुल्तान में सलमान ख़ान अपने ऐसे फैंस को बिल्कुल निराश नहीं करेंगे. 

लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि फिल्म उनको कैसी लगेगी जो सलमान के फैन नहीं हैं?

इसपर बस इतना ही कि आज सुबह घर से दफ्तर आते हुए मेरी बहन का मैसेज आया, 'बहुत दिनों बाद सलमान खान की मूवी अच्छी लगी.' दो शब्दों में कहा जाए तो सुल्तान फेस्टिवल मूड के हिसाब से 'फुल्ली फ़िट' है.

फिल्म में कुमुद मिश्रा, रणदीप हुड्डा, अनंत विधात और अमित साध कैरेक्टर रोल में है. सबने अच्छा अभिनय किया है लेकिन दर्शकों को शायद इससे कोई ख़ास वास्ता नहीं होगा.

First published: 8 July 2016, 18:59 IST
 
रंगनाथ सिंह @singhrangnath

पेशा लिखना, शौक़ पढ़ना, ख़्वाब सिनेमा, सुख-संपत्ति यार-दोस्त.

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