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शशि कपूर की आत्मकथा: बॉलीवुड का पहला अंतरराष्ट्रीय स्टार

लमत आर हसन | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
QUICK PILL
  • लीजेंड जैसे शब्द शशि कपूर के अपार प्रतिभा से न्याय नहीं करते. फिल्म, परिवार,\r\n थिएटर और सामाजिक मूल्यों के प्रति उनके समर्पण, उनकी सहृदयता, आदि किसी लीजेंड\r\n से कहीं बड़े हैं.
  • असीम छाबड़ा की लिखी हुई बायोग्राफी \"शशि कपूर: द हाउसहोल्डर, द स्टार\" रिलीज़ हो चुकी है. छाबड़ा ने बताया कि शुरू से ही वो शशि कपूर की फिल्मों और उनकी अदाकारी के फैन रहे हैं.

दीवार फिल्म का अमर डायलॉग 'मेरे पास मां है' शायद शशि कपूर की निजी और फिल्मी  जिंदगी को समझने का सबसे बेहतरीन जरिया है. लीजेंड, महान जैसी किताबी उपमाएं शशि कपूर के विराट व्यक्तित्व से न्याय नहीं करतीं. उनकी खूबसूरती, गालों पर पड़ने वाले डिंपल, निर्दोष मुस्कान और जेंटलमैन छवि का कोई मुकाबला नहीं है.

लीजेंड जैसे शब्द उनकी अपार प्रतिभा से भी न्याय नहीं करते. फिल्म, परिवार, थिएटर और सामाजिक मूल्यों के प्रति उनके समर्पण, उनकी सहृदयता, आदि लीजेंड से कहीं बड़े हैं.

बहुत संभव है कि हम इस असीम प्रतिभा वाले शख्स के तमाम पहलुओं से कभी रूबरू ही नहीं हो पाते अगर असीम छाबड़ा ने उनकी जीवनी न लिखी होती. फिल्म पत्रकार असीम छाबड़ा की लिखी हुई बायोग्राफी "शशि कपूर: द हाउसहोल्डर, द स्टार" रिलीज़ हो चुकी है. हालांकि छाबड़ा ने यह आत्मकथा लिखने में थोड़ी देर कर दी. फिलहाल तो खुद शशि कपूर खुद इसके बारे में बहुत कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हैं.

हालांकि उन्होंने शशि कपूर के जीवन से जुड़े हर करीबी शख्स को आत्मकथा में बहुत ही खूबसूरती के साथ पिरोया है. शशि कपूर की प्रोफेशनल ज़िन्दगी, करोड़ों फैंस और उनके बच्चे, कुणाल, करण और संजना के बारे में भी अच्छी रोशनी डाली गई है.

फिल्म पत्रकार असीम छाबड़ा की लिखी हुई बायोग्राफी "शशि कपूर: द हाउसहोल्डर, द स्टार" रिलीज़ हो चुकी है

शशि कपूर के फैन्स की सूची बहुत लंबी और प्रतिष्ठित लोगोंं से भरी हुई है. इशमें सबसे पहला नाम शबाना आज़मी का है जो खुद को उनका सबसे बड़ी फैन कहती हैं.

शशि कपूर और शबाना आज़मी के परिवार एक दूसरे के पडोसी थे. शशि को लेकर उनकी दीवानगी इस हद तक थी कि 12 साल की उम्र में वो शशि कपूर के पोस्टर्स खरीद कर उनसे उस पर ऑटोग्राफ लिया करती थीं.

उनके प्रशंसक सभी पीढ़ियों में मिलते हैं. ये कहना गलत होगा कि 60-70 के दशक के इस एवरग्रीन हीरो की फैन फोलोविंग सिर्फ उस दौर के दर्शकों के बीच ही थी. वक्त बदला, दौर बदला, बहुत से नए कलाकार आये और गए. पर आज भी शशि कपूर की वो शांत मुस्कराहट लोगों के दिलों में ताजा है. उनकी एक्टिंग के दर्शक दीवाने हैं.

बहुत दिलचस्प बात है कि इस आत्मकथा के लेखक की पूर्व पत्नी भी शशिजी की बहुत बड़ी फैन थीं. शादी के दो-तीन बाद उनके बीच हुआ झगड़ा सिर्फ इस बात पर खत्म हो गया था कि जिस होटल में वो लोग रुके हुए थे, वहां शशि कपूर भी लॉबी में मौज़ूद थे.

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असीम छावड़ा

बॉलीवुड की दुनिया में हर स्टार का एक दौर चलता है. शशि कपूर की ज़िन्दगी से जुडी बहुत सी कही-अनकही कहानियां हैं. ये कहना गलत होगा कि इस दिलकश अंदाज़ वाले एक्टर की फैन्स ज्यादातर महिलाएं हुआ करती थी. हर वर्ग के दर्शकों के बीच शशि कपूर के फैंस मौजूद थे, इनमें पुरुषों की भी अच्छी खासी तादात  थी.

इनमें से एक नाम है करण जौहर

फिल्म निर्माता करण जौहर ने किताब पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 1960 में एक उत्साह से भरा हुआ खूबसूरत नौजवान स्क्रीन पर आया, जिसके चेहरे पर हर वक्त डिंपल  पड़ता रहता था. खूबसूरत वादियों में जब वो अपनी हीरोइन को बांहों में भर कर उसकी आंखों में देखता, तो ऐसा लगता मानो वो लम्हा वहीं थम जाएगा. ऐसा लगता था मानो वक्त के साथ-साथ कई दिलों की धड़कनें भी उस वक्त रुक जाएंगी.

अपनी किशोरावस्था से ही असीम छाबड़ा शशि कपूर के फैन रहे हैं. उन्होंने पहली बार इनकी फिल्म- शर्मीली और दीवार देखी थी. इसके बाद असीम ने 1970 के दशक की शशिजी की हर सुपरहिट फ़िल्में देखीं जिसमे 'जब जब फूल खिले', 'प्यार का मौसम', 'धर्मपुत्र' और 'द हाउसहोल्डर' मुख्य हैं. 'द हाउसहोल्डर' शशि कपूर द्वारा निर्मित पहली फिल्म थी जो उन्होंने इस्माइल मर्चेंट-जेम्स आइवरी टीम के साथ मिल कर बनाई थी.

शबाना आजमी12 साल की उम्र में शशि कपूर के पोस्टर्स खरीद कर उनसे उस पर ऑटोग्राफ लिया करती थीं

कैच न्यूज़ से बातचीत में असीम छाबड़ा ने बताया कि शुरू से ही वो शशि कपूर की फिल्मों और उनकी अदाकारी के फैन रहे हैं. उन्होंने बताया कि "मैं अमेरिका में 35 साल रहा हूं और इस बीच शशि कपूर की हर फिल्म देखी है, जो उन्होंने भारतीय और विदेशी प्रोडक्शन हाउस के साथ की हैं, जैसे कि हीट एंड डस्ट, द कस्टडी, सैमी एंड रोसी गेट लेड, जिन्नाह और साइड स्ट्रीट्स.” छाबड़ा ने बताया कि शशि कपूर स्टार होने के साथ-साथ एक ज़िम्मेदार पारिवारिक इंसान भी रहे हैं. इसीलिए इस किताब का नाम हाउसहोल्डर रखा गया है.

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छाबड़ा ने कहा कि वो एक ऐसे इंसान की कहानी दुनिया को बताना चाहते हैं जो एक उम्दा फिल्म कलाकार के साथ साथ जेनिफर केंडल कपूर के पति और तीन बच्चों के पिता भी है. वो अपनी किताब के ज़रिये लोगों को शशि कपूर की अच्छी फिल्मों और साथ साथ थिएटर के प्रति उनके समर्पण की भावना को बताना चाहते हैं. अपनी किताब के लिए रिसर्च करने में असीम को एक साल से ऊपर का वक्त लग गया. कैच न्यूज़ के साथ अपने अनुभव बांटते हुए असीम ने बताया कि जब वो अपनी किताब पर काम कर रहे थे तब उन्हें हर पल ऐसा महसूस होता था जैसे शशिजी और उनका आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है.

असीम ने बताया की असल में वो अपनी इस किताब पर उस वक्त से काम कर रहे हैं जब वो शशि कपूर की उन सारी फिल्मों को देखते थे जो कभी पर्दे पर नहीं आ सकीं.

भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय कलाकार

छाबड़ा लिखते हैं कि शशि कपूर भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय कलाकार हैं, जिन्होंने प्रियंका चोपड़ा और इरफ़ान खान जैसे कलाकारों से बहुत पहले हॉलीवुड तक का सफर पूरा किया था. वो लिखते हैं कि शर्मिला टैगोर से लेकर जेम्स आइवरी तक- उस दौर के हर एक्टर के अनुसार शशि कपूर फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिभावान, खबसूरत और स्मार्ट कलाकार थे.

शशि कपूर ने हमेशा अच्छी फिल्मों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की और इन सबमें हमेशा उन्हें पैसे का नुकसान हुआ

इस आत्मकथा का सबसे दिलचस्प हिस्सा वो है जो शशि कपूर की जिंदादिली और आदर्शवाद को दर्शाता है. थिएटर के प्रति शशि कपूर का समर्पण अप्रतिम था. एक वक्त ऐसा भी था जब वो और उनकी मंगेतर जेनिफर ने आधे परांठे पर गुज़र बसर की है.

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हालांकि कभी-कभी उनकी बेटी संजना को अपने पिता की कुछ फिल्मों पर आपत्ति रहती थी. संजना का कहना था की वो नारीवाद में ज्यादा भरोसा नहीं रखती पर कुछ फिल्में उन्हें उदास करती थीं. मूलतः वो फिल्में जिनमें महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव किया जाता था. फिर जेनिफर ने उन्हें समझाया कि अगर स्टेज से ज्यादा पैसे मिलते तो उनके पिता सिर्फ स्टेज पर ही एक्ट करते. शशि कपूर ने हमेशा अच्छी फिल्मों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की और इन सबमें हमेशा उन्हें पैसे का नुकसान हुआ.

छाबड़ा ने कहा कि जब उन्होंने अपनी किताब पर काम करना शुरू किया तब वो शशि कपूर को एक स्मार्ट एक्टर और स्टार के तौर पर जानते थे. जैसे-जैसे किताब पूरा करने का सफर आगे बढ़ा वो उस शशि कपूर से मिले जिन्होंने कला के तौर पर खुद को फिल्मों के प्रति समर्पित किया था.

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जिस तरह से उन्होंने श्याम बेनेगल की फ़िल्म जूनून और कलयुग, अपर्णा सेन की 36 चौरंगी लेन, गोविन्द निहलानी की विजेता और गिरीश कर्नाड की उत्सव को प्रोड्यूस किया, वो उनके कला प्रेम को दर्शाता है. शशि कपूर बहुत ही उम्दा और उदार प्रोडूसर रहे हैं. दुःख की बात ये है कि अपने उदार चरित्र की वजह से उन्हें काम में हमेशा पैसे का नुकसान हुआ.

छाबड़ा के अनुसार शशि कपूर ने कभी भी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में हायरार्की को नहीं माना. तकनीशियन से लेकर जूनियर आर्टिस्ट तक- सब उनकी नज़र में बराबर थे. उन्होंने बताया कि रिसर्च के दौरान जितने लोगों से बात हुई, उन सब की बातों और यादों में शशि कपूर का एक अच्छा और उदार चरित्र बसा हुआ है. यह अच्छाई उनके साथ ही इस दुनिया से जाएगी.

First published: 11 May 2016, 8:00 IST
 
लमत आर हसन @LamatAyub

संवाददाता, कैच न्यूज़

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