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वीडियो: धुनों के जादूगर पंचम ने इन दस गानों को आवाज़ भी दी है

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2016, 17:01 IST

रैना बीती जाए श्याम न आए, मेरे नैना सावन भादो, कुछ तो लोग कहेंगे... जैसे सुरीले गीतों से लोगों के दिलों पर राज करने वाले मशहूर संगीतकार राहुल देव बर्मन (आरडी बर्मन) की सोमवार को 77वीं जयंती है.

महान संगीतकार सचिव देव बर्मन के बेटे आरडी बर्मन फिल्म जगत में पंचम दा के नाम से विख्यात थे. त्रिपुरा के शाही परिवार से संबंध रखने वालेे आरडी बर्मन का जन्म 27 जून 1939 को कलकत्ता में हुआ था.

घर में संगीत का माहौल होने के कारण आरडी बर्मन नौ साल की उम्र में ही संगीत की धुने बनाने लगे थे. पिता से संगीत की शिक्षा की लेने के अलावा उन्होंने उस्ताद अली अकबर खान से सरोद वादन भी सिखा.

छोटी सी उम्र में पंचम दा ने अपनी पहली धुन 'ए मेरी टोपी पलट के आ' बनाई जिसका इस्तेमाल उनके पिता सचिन देव बर्मन ने साल 1956 में आई फिल्म 'फंटूश' में किया. इसके अलावा उनकी बनाई धुन 'सर जो तेरा चकराए' भी गुरुदत्त की फिल्म 'प्यासा' के लिए इस्तेमाल की गई.

आरडी बर्मन ने लगभग 300 फिल्मों में संगीत दिया. उन्हें माउथआर्गन बजाने का बेहद शौक था. वह सिर्फ संगीतकार ही नहीं बल्कि अपनी पिता की तरह फिल्मों में गाते भी थे. पंचम दा ने फिल्मों में करीब 50 से ज्यादा गाना गाया है. उनके द्वारा गाए कई गााने आज भी सुपरहिट हैं.

पंचम दा फिल्मी दुनिया में अपनी शुरुआत पिता के साथ बतौर सहायक संगीतकार के तौर पर की है. लंबे संघर्ष के बाद उन्हें 1961 में महमूद ने फिल्म 'छोटे नवाब' में बतौर संगीतकार ब्रेक दिया.

उनके पिता क्लासिकल संगीत देने के मशहूर थे, जबकि इसके उलट पंचम दा को नई तकनीक के साथ संगीत में प्रयोग बेहद पसंद था. भारतीय संगीत के साथ पाश्चात्य संगीत का उन्होंने भरपूर उपयोग किया.

वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म 'भूत बंगला' से बतौर संगीतकार पंचम दा बॉलीवुड में अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे. इस फिल्म का गाना 'आओ टि्वस्ट करें' लोगों को खूब पसंद आया.

1966 में आई नासिर हुसैन की फिल्म 'तीसरी मंजिल' के सुपरहिट गाने 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' और 'ओ हसीना जुल्फों' वाली जैसे लोकप्रिय गानों जरिए पंचम दा छा गए.

राजेश खन्ना के करियर को शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचाने में पंचम दा के संगीतबद्ध गीतों का अहम योगदान रहा है. 1970 के दशक में राजेश खन्ना, किशोर कुमार और आरडी बर्मन की तिकड़ी ने 70 के दशक में धूम मचा दी थी.

इस दौरान सीता और गीता, मेरे जीवन साथी, बांबे टू गोवा, परिचय और जवानी दीवानी जैसी कई फिल्में आईं और उनका संगीत लोगों के जुबां चढ़ गया.

1973 में यादों की बारात, 1974 में आप की कसम, 1975 में शोले और आंधी, 1978 में कसमें वादे, 1978 में घर, 1979 में गोलमाल, 1980 में खूबसूरत, 1981 में सनम तेरी कसम,  रॉकी, मासूम, सत्ते पे सत्ता, लव स्‍टोरी जैसी फिल्‍मों में भी पंचम दा ने अपने संगीत का जलवा बिखेरा.

बतौर गायक पंचम दा के कई गाने सुपरहिट हैं. साल 1975 में रमेश सिप्पी की सुपरहिट फिल्म 'शोले' का गाना 'महबूबा महबूबा' में अलग अंदाज के चलते पंचम दा गायकी की दुनिया में भी अलग पहचान बनाने में सफल रहे.

पंचम दा को तीन बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इनमें सनम तेरी कसम, मासूम और 1942 ए लवस्टोरी शमिल हैं. जिन पुराने गानों को रीमिक्स कर आज पेश किया जाता है, उनमें पंचम दा के ही संगीत सबसे अधिक होते हैं.

विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म '1942 ए लवस्टोरी' बतौर संगीतकार पंचम दा की आखिरी फिल्म थी. 4 जनवरी 1994 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए.

First published: 27 June 2016, 17:01 IST
 
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