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लोगों को दुखी करता है फेसबुक

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 6:41 IST

दुनिया में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म यानी फेसबुक यूं तो वर्चुअल रूप से आपको अपने करीबियों और अंजान व्यक्तियों से जोड़कर कुछ प्रसन्नता देता है. लेकिन एक दूसरी हकीकत यह सामने आई है कि फेसबुक लोगों को नाखुश बना रहा है और जिन्हें 'फेसबुक ईर्ष्या' है उन्हें तनावग्रस्त बना रहा है.

एक ताजा शोध में पता चला कि जिन फेसबुक यूजर्स ने इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से एक सप्ताह की दूरी बनाई वो अपनी जिंदगी से ज्यादा संतुष्ट दिखे और उन्होंने खुद को ज्यादा खुश बताया.

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द यूनिवर्सिटी ऑफ कोपनहेगेन ने अपने शोध में 1,095 लोगों को शामिल किया. इनमें से आधे प्रतिभागियों से अपनी फेसबुक की आदतों को बरकरार बनाए रखने के लिए कहा गया जबकि आधे लोगों से कहा गया कि वे खुद को इसपर लॉगिन करने से रोकें.

ऐसे लोग जिन्होंने खुद को फेसबुक ईर्ष्या (यानी अपने दोस्तों के ज्यादा लाइक्स-फ्रेंड्स-कमेंट्स देखकर जलना) का ज्यादा शिकार बताया, उन्हें फेसबुक से दूर जाने पर ज्यादा फायदा हुआ. 

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इस रिपोर्ट के लेखक मार्टेन ट्रॉमहॉल्ट लिखते हैं, "फेसबुक पर रोजाना करोड़ो घंटे बिताए जाते हैं. अब तक के इतिहास में आज हम सबसे ज्यादा जुड़े (कनेक्टेड) हुए हैं, लेकिन क्या यह नया जुड़ाव हमारी खुशी या बेहतरी के लिए कुछ अच्छा कर रहा है." 

"इस नए शोध के मुताबिक जवाब 'ना' में है. वास्तव में फेसबुक के इतने बढ़ते इस्तेमाल यानी दूसरे लोगों की जानकारी पाने या फिर उनसे संपर्क साधने की रोज की आदत हमारी खुशी पर तमाम वजह से नकारात्मक प्रभाव डाल रही है."

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इस शोध के प्रतिभागियों में 86 फीसदी डेनमार्क की महिलाएं थीं जिनकी औसत आयु 34 साल थी और उनके फेसबुक मित्रों की औसत संख्या 350 थी. 

इन प्रतिभागियों से परीक्षा से पहले 15 मिनट का एक छोटा सा टेस्ट लिया गया जिसके मुताबिक उन्हें फेसबुक इस्तेमाल करना है या नहीं वाले ग्रुप में डाला गया. यानी एक ग्रुप से कहा गया कि वो एक सप्ताह तक पहले की ही तरह फेसबुक इस्तेमाल करे और दूसरे से कहा गया कि वो न करे. 

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परीक्षण के बाद आखिरी दिन 888 प्रतिभागियों ने इसे पूरा कर लिया जबकि 13 फीसदी ने इसे पूरा नहीं किया और फेसबुक का इस्तेमाल करना जारी रखा. नियमों को न मानने वालों का दावा था कि या तो उन्होंने इस वजह से फेसबुक का इस्तेमाल किया क्योंकि यह आपातकालीन था या फिर उनकी आदत में शुमार है.

इस जांच में फेसबुक यूजर्स ने जीवन की संतुष्टि के पैमाने को 10 में 7.74 के पैमाने पर रखा जबकि जो लोग फेसबुक से दूर रहे उन्होंने अपने खुशी के पैमाने को 8.11 पर रखा.

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खुशी के मामले में फेसबुक छोड़ने का प्रभाव उन पर ज्यादा दिखा जिन्होंने फेसबुक छोड़ दिया था, न कि उनपर जिन्हें फेसबुक से ईर्ष्या थी.

इसके अलावा एक अन्य शोध में पाया गया कि 19 से लेकर 32 साल तक के जो व्यक्ति सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताते थे, उनमें तनावग्रस्त होने की संभावना ज्यादा थी.

First published: 24 December 2016, 2:13 IST
 
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