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बात खत्म नहीं हुई है, सलमान खान अभी भी जेल जा सकते हैं

(कैच न्यूज)

काले हिरण की मौत पर पर्याप्त कहानियां और चुटकुले आ चुके हैं. मसलन वह अपनी मौत मर गया होगा, या उसने आत्महत्या कर ली होगी क्योंकि वह अगले जन्म में गाय बनना चाहता होगा.

इस बारे में रिकॉर्ड पर ध्यान दीजिए तो मामला साफ हो जाएगाः सलमान खान राजस्थान में 1998 के दो काले हिरण का शिकार करने के आरोप से बरी नहीं किए गए हैं. राजस्थान हाईकोर्ट के 25 जुलाई के फैसले में साफ है कि उन्हें दो चिंकारों का शिकार करने के आरोप से बरी किया गया है. चिंकारा का शिकार उन्होंने कथित काले हिरण का शिकार करने से पहले छह से लेकर चार दिनों के बीच दो अलग-अलग मौकों पर किया था.

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यह घटना उस समय की है जब सलमान खान 1998 में जोधपुर में फिल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग कर रहे थे. काले हिरण का कथित शिकार 1-2 अक्टबूर 1998 की रात में किया गया था.जांच के दौरान अभिनेता के खिलाफ पहला मामला तो इसी का दर्ज किया गया था. यह तो गवाह ने बताया था कि सलमान ने 26 और 28 सितम्बर 1998 को चिंकारा का भी शिकार किया है. चिंकारा शिकार मामले के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे.

आरोप

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार के अपने फैसले में सलमान को इन्हीं दो मामलों में बरी किया है. काले हिरण का मामला तो अभी ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है. राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय से भी यह स्पष्ट है.

यहां यह उल्लेख करना गलत नहीं होगा कि तीसरे मामले का ट्रायल यानी क्रिमिनल केस नम्बर 66/2011 जो एफआईआर नम्बर 93 (26) वन विभाग, जोधपुर द्वारा 2-10-1998 को 1-10-98 और 2-10-98 की रात में हुए शिकार मामले में दर्ज कराई गई थी, अभी भी लम्बित है... 1998 की एफआईआर नम्बर 93 (26) काले हिरण की शिकार घटना के संदर्भ में वन विभाग, जोधपुर ने दर्ज कराई थी.

बीते सोमवार को कोर्ट के बरी करने वाले दोनों फैसलों में इसके अलावा काले हिरण का कहीं कोई जिक्र नहीं है.

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काले हिरण का शिकार करने के मामले में सलमान के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून (संरक्षित वन्य जीवों की हत्या के लिए दंड) की धारा 51, भारतीय दंड संहिता की धारा 148 (मौज-मस्ती करने, लाइसेंस खत्म हो जाने के बाद भी हथियार रखना) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 (हथियारों का अवैध उपयोग) के तहत मामला दर्ज किया गया था.

हालांकि आर्म्स अधिनियम के तहत दर्ज आरोप से तो सलमान बरी हो गए हैं लेकिन यदि उन्हें दोषी ठहरा दिया जाता है तो उन्हें वन्यजीव अधिनियम के तहत अपराध में पांच साल तक की और आईपीसी के अपराध में तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है. सलमान के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक अन्य मामला लूणी थाने में 15 अक्टूबर, 1998 को दर्ज कराया गया था. वह अभी भी लम्बित है.

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फिर भी लगभग सभी न्यूज हैडलाइंस ने गलती कर दी कि अभिनेता काले हिरण शिकार मामले में बरी किए गए हैं जबकि वे चिंकारा शिकार मामले में बरी हुए हैं. यह गलती करने वालों में छोटे से लेकर सभी बड़े अखबार, न्यूज वेबसाइट्स और यहां तक कि एक न्यूज एजेंसी भी शामिल है. इससे यह संदेह उत्पन्न हो गया कि सलमान सभी तीनों मामलों से बरी कर दिए गए हैं.

चिंकारा शिकार मामले की तुलना में काले हिरण मामले की ट्रायल में देरी हुई है और यह मामला अभी ट्रायल कोर्ट में ही पड़ा हुआ है. गवाहों में से एक के अनुसार सुनवाई की अगली तारीख 10 अगस्त तय की गई है.

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वास्तव में देखा जाए तो चिंकारा मामला, जिसमें वह बरी किए जा चुके हैं, हमेशा ही काले हिरण मामले की तुलना में नाजुक रहा है. इसकी पहली वजह यह है कि काले हिरण को कानून के तहत सर्वाधिक संरक्षित जीवों की श्रेणी-1 में रखा गया है.

गवाह

दूसरी बात चिंकारा मामले में केवल एक ही गवाह था, हरीश दुलानी. उसके गायब हो जाने और उसके बार-बार बयान बदलने से गवाही कमजोर हो गई और हाईकोर्ट के लिए सलमान की रिहाई का यही कारण बनी.इसके विपरीत काले हिरण मामले में दो मजबूत गवाह हैं. ये विश्नोई समाज के सदस्य हैं जो अभी भी अपने बयान पर अड़े हुए हैं. यह समाज हिरणों के संरक्षक के तौर पर जाना जाता है. 

जोधपुर के पास के गुढ़ा विश्नोई गांव के विश्नोई लोगों ने ही सलमान खान को पहली बार जिप्सी गाड़ी चलाते देखा था. जांच अधिकारी और पूर्व डिप्टी फॉरेस्ट अफसर ललित बोरा के अनुसार अभिनेता ने घटना स्थल से भागने से पहले गांव वालों पर बंदूक भी तान दी थी. गांव वालों को उस जगह से बाद में बुलेट के खोखे, कारतूस मिले थे.

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वास्तव में, विश्नोइयों ने ही पहली बार सलमान खान की संलिप्तता पर वन विभाग में शिकायत लिखाई थी. वे पिछले 18 सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने अभिनेता के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी है और सैफ अली खान, तब्बू, नीलम और सोनाली बेन्द्रे समेत अन्य की संलिप्तता बताई है.

दिलचस्प बात यह है कि सभी गवाहों के बयान बोरा द्वारा वीडियो में रिकॉर्ड किए गए हैं और वे 10 अगस्त को अपने क्रास परीक्षण के दौरान इसे पेश करेंगे. बोरा ने जांच करने में कड़ी मेहनत की थी और सलमान के शिकार मामले में बहुत ही निर्णायक साक्ष्य जुटाए थे. और यही एक वजह है कि विश्नोइयों और बोरा ने अपनी लम्बी कानूनी लड़ाई अभी तक नहीं छोड़ी है.

First published: 30 July 2016, 8:09 IST
 
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