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थिएटर और सिनेमा दोनों के नजीर नसीरुद्दीन शाह का आज जन्मदिन

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 July 2016, 16:47 IST
(ए वेडनेस डे )

भारत में समानान्तर सिनेमा को एक नई पहचान देने वाले अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का आज 67वां जन्मदिन है. थिएटर और सिनेमा को अभिनय की नई घुट्टी पिलाने वाले नसीर का जन्म उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में हुआ था.

उनकी स्कूली शिक्षा सेंट ऐंसेल्‍म अजमेर और सेंट जॉजेफ कॉलेज नैनीताल से हुई. नसीर को बचपन से एक्टिंग का शौक था. यही वजह थी कि उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता था और इसकी वजह से उनके पिता अली मोहम्मद शाह अक्सर ही डांटते थे.

नसीर की अपने पिता मोहम्मद शाह से पटती नहीं थी. नसीर ने पिता की डांट से तंग आकर 19 साल की उम्र में अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया. अलीगढ आकर नसीर थिएटर से जुड़ गए.

यहां आकर उन्हें अभियन का शुरुआती प्लेटफॉर्म मिला. अलीगढ में पढाई के दौरान ही 19 साल की उम्र में नसीर को एक 34 साल की पाकिस्तानी महिला से इश्क हो गया. उस महिला का नाम परवीन था और वह उस समय अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में मेडिसिन की पढ़ाई पढ़ रही थीं.

परवीन, नसीर में एक बेहतर एक्टर को देख रही थीं और वह उनका खुलकर समर्थन करती थीं. नसीर ने एक नवंबर 1969 को परवीन से निकाह कर लिया.

अलीगढ से ग्रेजुएट होने के बाद नसीर ने दिल्ली के मशहूर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में एडमिशन लिया. वहां इन्होंने इब्राहिम अल्का जी से थिएटर की बारीकियां सीखीं. एनएसडी में नसीर के सहपाठी थे ओमपुरी. आगे चल कर दोनों ही अभिनेताओं ने समानान्तर सिनेमा को एक नई पहचान दी.

एनएसडी में पढ़ाई के दौरान उनकी पत्नी परवीन से रिश्ते कटु हो गए. धीरे-धीरे ये कटुता इतनी बढ़ गई कि परवीन, नसीर की बेटी हिबा के साथ लंदन चली गईं. लगभग 12 साल तक लंदन में रहने के बाद परवीन का इंतकाल हो गया. नसीर परवीन से दूर तो थे, लेकिन उन्हें भूल नहीं पाए थे. यही कारण था कि उनके इंतकाल के बाद वो टूट गए थे.

उसी समय थिएटर डायरेक्टर सत्यदेव दुबे ने उनकी मुलाकात अभिनेत्री रत्ना पाठक से कराई. नसीर ने जल्द ही रत्ना पाठक के साथ दूसरा विवाह कर लिया. नसीर को रत्ना पाठक शाह से दो बच्चे हैं. इनमें से एक का नाम इमाद और दूसरे का नाम विवान शाह है. नसीरुद्दीन शाह के भाई जमीरुद्दीन शाह अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे हैं. 

एनएसडी से पढ़ने के बाद शाह ने मायानगरी मुंबई का रुख किया. नसीरुद्दीन शाह को सिनेमा में पहला ब्रेक डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने दिया. शाह ने साल 1975 में श्याम बेनेगल के निर्देशन में फिल्म 'निशांत' में अपने अभिनय का लोहा मनवाया.

नसीर ने 1976 में निर्देशक श्याम बेनेगल की फिल्म 'भूमिका' और 'मंथन' में भी शानदार अभिनय से अपने-आप को सिद्ध कर दिया. फिल्म 'मंथन' दुग्ध क्रांति पर बनी थी. इस फिल्म के निर्माण में गुजरात के लगभग पांच लाख किसानों ने अपनी प्रतिदिन की मिलने वाली मजदूरी में से दो-दो रुपये फिल्म निर्माताओं को दिए और बाद में जब यह फिल्म प्रदर्शित हुई तो यह बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी.

इसके अलावा नसीर ने नसीर ने 'आक्रोश', 'स्पर्श', 'मिर्च मसाला', 'भवनी भवाई', 'अर्धसत्य', 'मंडी' और 'चक्र', ‘अलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’, ‘मोहन जोशी हाज़िर हों’, ‘अर्द्ध सत्य’, ‘कथा’ जैसी कई फिल्मों में अपने अभिनय की जबरदस्त छाप छोड़ी है.

समानानंतर सिनेमा में नसीर ने स्मिता पाटिल, शबाना आजमी, अमरीश पुरी, ओम पुरी सरीखे माहिर कलाकारों के साथ काम किया. नसीर ने कॉमर्शियल फिल्मों में ‘मासूम’, ‘कर्मा’, ‘इजाज़त’, ‘जलवा’, ‘हीरो हीरालाल’, ‘गुलामी’, ‘त्रिदेव’, ‘विश्वात्मा’, ‘मोहरा’, ‘सरफ़रोश’ जैसी फिल्में करके साबित कर दिया कि वह सिर्फ आर्ट ही नहीं कॉमर्शियल फिल्मों में भी बेहतर एक्टिंग कर सकते हैं.

अपने करियर में शानदार अभिनय के लिए उन्हें तीन बार नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. साल 2000 में उन्हें “संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा भारत सरकार ने सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए साल 1987 में पद्म श्री और 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया.

First published: 20 July 2016, 16:47 IST
 
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